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केंद्र ने बढ़ी पारिवारिक पेंशन के लिए निरंतर सात साल की सेवा अनिवार्यता खत्म की

Tue, 06 Oct 2020 05:15 AM IST
Kuldeep Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Tue, 06 Oct 2020 05:15 AM IST
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Center government said: ends seven-year service not imperative for increased family pension
गृह मंत्रालय - फोटो : ANI

रक्षा मंत्रालय ने मृत रक्षाकर्मियों के परिजनों को बढ़ी सामान्य पारिवारिक पेंशन (ईओएफपी) की मंजूरी के लिए न्यूनतम सात साल की निरंतर सेवा अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि कर्मी के अंतिम कुल वेतन का 50 फीसदी ईओएफपी होता है और यह सेवा में रहते हुए कर्मी की मृत्यु की तिथि से 10 साल के लिए दी जाती है।

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नया नियम एक अक्तूबर 2019 से ही लागू किया गया
मंत्रालय के अनुसार, ईओएफपी पाने के लिए न्यूनतम सात साल की निरंतर सेवा की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है और यह नियम एक अक्तूबर 2019 से प्रभावी हो गया है। यदि किसी कर्मी की सेवा से मुक्त किए जाने, सेवानिवृत्त, डिस्चार्ज या फिर अयोग्य ठहराए जाने के बाद मृत्यु हो जाती है तो ईओएफपी मृत्यु तिथि या फिर उसकी 67 साल की उम्र होने के बाद सात साल के लिए ईओएफपी दी जाती है। इस नियम के तहत मृत्यु या फिर 67 साल की उम्र जो भी पहले हो।    
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इसके अलावा, उन सशस्त्र बल कर्मियों के परिजन भी ईओएफपी के हकदार होंगे जिनकी मृत्यु एक अक्तूबर 2019 से पहले 10 साल के अंदर ही हो गई हो, चाहे उन्होंने सात साल की अनिवार्य सेवा पूरी न की हो। अभी के नियमों के अनुसार, परिजनों को ईओएफपी की मंजूरी के लिए रक्षा कर्मी का सात साल की सेवा पूरा करना अनिवार्य था। ईओएफपी कर्मी के कुल अंतिम वेतन का 50 फीसदी होता है जबकि सामान्य पारिवारिक पेंशन (ओएफपी) कुल अंतिम वेतन का 30 फीसदी होता है।

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