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Supreme Court: जबरन धर्मांतरण पर केंद्र ने दाखिल किया हलफनामा, कहा- नौ राज्यों में पहले से लागू है कानून

Mon, 28 Nov 2022 02:58 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव Updated Mon, 28 Nov 2022 02:58 PM IST
सार

केंद्र ने कहा, जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए ओडिशा, मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक व हरियाणा में कानून है। 

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Center filed  affidavit in Supreme Court, said- Government will enact a law against forced conversions
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media

विस्तार

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि भारत का संविधान हर व्यक्ति को अपने धर्म का स्वतंत्रतापूर्वक पालन करने का अधिकार देता है। हालांकि, इसमें किसी को भी अन्य लोगों को किसी विशेष धर्म में परिवर्तित करने का मौलिक अधिकार शामिल नहीं है। इसलिए, महिलाओं, आर्थिक व सामाजिक रूप से पिछड़े और समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए अवैध धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून आवश्यक है।

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गृह मंत्रालय ने बड़े पैमाने पर धर्मांतरण के खिलाफ वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की जनहित याचिका के जवाब में हलफनामा दाखिल किया है। इसमें कहा है कि वह याचिका में उठाए गए मुद्दे की गंभीरता से अवगत है। केंद्र सरकार की ओर से इस मामले को गंभीरता से लिया जाएगा और उचित कदम उठाए जाएंगे।
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केंद्र ने यह भी कहा कि धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार, और विशेष तौर पर, देश के सभी नगारिकों की चेतना का अधिकार एक अत्यंत पोषित और मूल्यवान अधिकार है। इसे कार्यपालिका और विधायिका दोनों की ओर से संरक्षित किया जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने केंद्र से इस मामले पर सभी राज्यों से निर्देश लेकर हलफनामा दायर करने को कहा। मामले में अगली सुनवाई पांच दिसंबर को होगी।
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लालच या धोखे से नहीं करा सकते किसी का धर्मांतरण  
गृह मंत्रालय ने हलफनामे में कहा, धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार में अन्य लोगों को धर्मांतरित करने का मौलिक अधिकार शामिल नहीं है। इस अधिकार में किसी को धोखे, जबरदस्ती, प्रलोभन या ऐसे अन्य माध्यमों से परिवर्तित करने का अधिकार शामिल नहीं है। 

  • याचिकाकर्ता ने छल, धोखे, जबरदस्ती, लालच या ऐसे अन्य माध्यमों से देश में कमजोर नागरिकों के लोगों के संगठित, व्यवस्थित तरीके से बड़ी संख्या में धर्मांतरण होने के उदाहरणों पर प्रकाश डाला है।

नौ राज्यों में पहले से है कानून
केंद्र ने कहा, ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए नौ राज्यों में कानून है। इसमें- ओडिशा, मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक व हरियाणा शामिल हैं। यहां धर्मांतरण कानून बना हुआ है। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में  कहा कि महिलाओं व आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए इस तरह के अधिनियम आवश्यक हैं।

कानून बनाने के लिए दाखिल की गई थी याचिका

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में जबरन धर्मांतरण के खिलाफ याचिका दायर की गई है। वकील अश्विनी उपाध्याय ने याचिका में इस पर कानून बनाकर रोकने की मांग की थी। कहा गया है कि इसे रोकने के लिए केंद्र व राज्य सरकारों को कड़े कदम उठाने होंगे। याचिका में दावा किया गया है कि देश में काला जादू, अंधविश्वास, चमत्कार आदि के जरिये जबरन धर्म परिवर्तन की घटनाएं हर हफ्ते सामने आती हैं। एक भी जिला ऐसा नहीं है, जो धोखाधड़ी व धमकी से धर्मांतरण से मुक्त हो। 

धर्म की आजादी, जबरन धर्म परिवर्तन की नहीं
इस मामले में 14 नवंबर को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि धर्म की आजादी हो सकती है, लेकिन जबरन धर्म परिवर्तन की कोई स्वतंत्रता नहीं है। संविधान के तहत धर्मांतरण कानूनी है, पर जबरन नहीं हो सकता। इस मामले में कोर्ट ने केंद्र से जवाब दाखिल करने के लिए कहा था। 

...तो हिंदू जल्द हो जाएंगे भारत में अल्पसंख्यक, संविधान का किया जा रहा उल्लंघन 

  • याचिका में धमकी, छल, उपहार व आर्थिक लालच और धोखाधड़ी के अन्य माध्यमों से कराए जा रहे धर्म परिवर्तन के खिलाफ कदम उठाने की गुहार लगाई गई है। इसमें कहा गया है कि यह संविधान के अनुच्छेद-14, 21 और 25 का उल्लंघन है। 
  • याचिका के मुताबिक, ऐसे धर्मांतरण पर रोक नहीं लगी, तो भारत में हिंदू जल्द ही अल्पसंख्यक हो जाएंगे।

बहस के बाद अनुच्छेद 25 में आया ‘प्रचार’
सरकार ने आगे कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत आने वाले ‘प्रचार’ शब्द के अर्थ और तात्पर्य पर संविधान सभा में विस्तार से चर्चा और बहस हुई थी। संविधान सभा की ओर से इस स्पष्टीकरण के बाद ही इस शब्द को शामिल किया गया था कि अनुच्छेद 25 के तहत मौलिक अधिकार में धर्मांतरण का अधिकार शामिल नहीं होगा। केंद्र सरकार ने कहा कि शीर्ष अदालत ने माना है कि प्रचार शब्द किसी व्यक्ति को धर्मांतरित करने के अधिकार की परिकल्पना नहीं करता है।



जबरन धर्मांतरण को सुप्रीम कोर्ट भी बता चुका है गंभीर 
सुप्रीम कोर्ट ने बीते 14 नवंबर को इस मामले में सुनवाई के दौरान भी कहा था कि जबरन धर्म परिवर्तन बहुत ही गंभीर मुद्दा है और यह देश की सुरक्षा को भी प्रभावित कर सकता है। अदालत ने केंद्र से इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने को भी कहा था।

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