CDS Gen. Anil Chauhan: कैसे बदल जाएंगे भविष्य के युद्ध, वजह क्या होगी? सीडीएस अनिल चौहान ने बारीकी से समझाया
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने कहा है कि जंग में गलत जानकारी और अफवाहें एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमारे जवानों का 15 फीसदी वक्त फर्जी खबरों से निपटने में बर्बाद हो गया। उन्होंने कहा कि हमारी रणनीति यह रही कि बिना जल्दबाजी किए पुख्ता तथ्यों व सबूतों के साथ अपनी बात रखी जाए।
विस्तार
शांगरी-ला संवाद में 'भविष्य की चुनौतियों के लिए रक्षा नवाचार समाधान' पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने विकसित भू-राजनीतिक गतिशीलता और तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों पर प्रकाश डाला, जिससे युद्ध की प्रकृति को फिर से परिभाषित हो रही है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रौद्योगिकी के लोकतंत्रीकरण ने गैर-राज्य अभिनेताओं को सशक्त बनाया है, जिससे छद्म युद्ध और अस्थिरता को बढ़ावा मिला है। गैर-राज्य अभिनेता ऐसी संस्थाएं, समूह या संगठन होते सकते हैं जो स्वतंत्र रूप से काम करते हैं। सीडीएस का मतलब आतंकवादी संगठनों और आतंक के आकाओं से था।
'भविष्य के युद्ध को चार तरीकों से आकार दिया जाएगा'
सीडीएस ने जोर देकर कहा कि भविष्य के युद्ध को चार तरीकों से आकार दिया जाएगा- सभी डोमेन में सेंसर का प्रसार, लंबी दूरी के हाइपरसोनिक और सटीक हथियार, स्वायत्त प्रणालियों के साथ मानव-मानव रहित टीमिंग और एआई, एमएल, एलएलएम और क्वांटम तकनीक द्वारा संचालित युद्धक्षेत्र का बुद्धिमत्ताकरण।
'आत्मनिर्भरता के माध्यम से क्षमता विकास'
सीडीएस ने अनुकूलनशीलता, नवाचार और आत्मनिर्भरता के माध्यम से क्षमता विकास के दृष्टिकोण को भी रेखांकित किया। इसमें जिक्र किया गय कि कैसे भारत ने परिचालन आवश्यकताओं और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल प्रणालियों को विकसित करने में 'रणनीति-आधारित आधुनिकीकरण' योजना को अपनाते हुए निजी उद्योग के साथ सहयोगी रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र बनाया है।
शांगरी-ला वार्ता की सराहना की
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि चल रहे परिवर्तन में सिद्धांत, संगठनात्मक संस्कृति और मानव पूंजी में बदलाव शामिल होंगे, जहां भारत की अनूठी भौगोलिक स्थिति, अनुभव और आकांक्षाएं उसके रक्षा दृष्टिकोण को आकार देती हैं। जनरल अनिल चौहान ने वैश्विक शांति और जिम्मेदार नवाचार के लिए भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि की और वैश्विक स्थिरता की सामूहिक खोज में संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए शांगरी-ला वार्ता की सराहना की।
'सूचना युद्ध के लिए एक अलग और विशेष शाखा की जरूरत'
शांगरी-ला संवाद में सीडीएस ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के वक्त महसूस हुआ कि हमें सूचना युद्ध के लिए एक अलग और विशेष शाखा की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के शुरुआती दौर में दो महिला अधिकारी मीडिया को जानकारी दे रही थी क्योंकि उस समय वरिष्ठ सैन्य अधिकारी वास्तविक ऑपरेशन में व्यस्त थे। उन्होंने कहा कि भले ही भारत और पाकिस्तान ने एक दूसरे पर साइबर हमले किए, लेकिन भारत की सैन्य प्रणालियां इंटरनेट से जुड़ी नहीं हैं, इसलिए वे सुरक्षित रहीं।