{"_id":"5a148ca34f1c1b7a548be6da","slug":"cctv-cameras-are-required-in-court-rooms-nothing-private-says-supreme-court","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"कोर्ट रूम में CCTV लगाना जरूरी, प्राइवेसी की नहीं जरूरत: सुप्रीम कोर्ट","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
कोर्ट रूम में CCTV लगाना जरूरी, प्राइवेसी की नहीं जरूरत: सुप्रीम कोर्ट
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 22 Nov 2017 06:20 AM IST
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : SOCIAL MEDIA
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत कक्षों में प्राइवेसी की जरूरत नहीं है क्योंकि यहां कुछ भी गोपनीय नहीं होता। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए अदालत कक्षों में जल्द सीसीटीवी कैमरे लगाने की बात कही। शीर्ष अदालत ने कहा कि अदालतों में सीसीटीवी कैमरे लगाना न सिर्फ जनहित, बल्कि सुरक्षा और अनुशासन से जुड़ा मामला भी है।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की निचली अदालतों में अदालती कार्यवाही रिकॉर्ड करने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए कहा था। न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने केंद्र सरकार से अदालत कक्षों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के उसके आदेश पर कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है।
विज्ञापन
पढ़ें- ट्रिपल तलाक खत्म करने के लिए बनेगा कानून, शीत सत्र में विधेयक ला सकती है सरकार
विज्ञापन
पीठ ने कहा, ‘प्राइवेसी क्या होती है। हमें यहां प्राइवेसी की कोई जरूरत नहीं है। यहां कुछ भी प्राइवेट नहीं होता। हम सभी आपके सामने हैं।’ शीर्ष अदालत प्रद्युमभन बिष्ट की ओर से अदालती कार्यवाही में पारदर्शिता लाने के लिए इसकी ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग कराने की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
वहीं केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद ने पीठ से कहा कि कानून मंत्रालय से अदालतों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए वित्तीय खर्च के प्रस्ताव को हरी झंडी मिलना बाकी है। उन्होंने कहा कि जल्द ही इसे हरी झंडी मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी कैमरे लगाना और अदालती कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग बहुत जरूरी है और सभी के लिए फायदेमंद है।
केंद्र 23 नवंबर तक सौंपें रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट
पीठ ने कहा कि अदालत कक्षों में सीसीटीवी लगाने और वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था करने में देर न करें और हमें अगली सुनवाई 23 नवंबर तक इसकी रिपोर्ट दें। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि अन्य देशों की संवैधानिक अदालतों में ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था है इसलिए यह जजों की प्राइवेसी का कोई मामला नहीं है।
अमेरिका में तो अदालती प्रक्रियाओं की रिकॉर्डिंग यूट्यूब पर भी डाली जाती है। हालांकि शीर्ष अदालत ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज और रिकॉर्डिंग को आरटीआई के तहत उपलब्ध नहीं कराया जा सकता और न ही संबंधित कोर्ट की इजाजत के बगैर किसी व्यक्ति को यह दिया जा सकता है।
अमेरिका में तो अदालती प्रक्रियाओं की रिकॉर्डिंग यूट्यूब पर भी डाली जाती है। हालांकि शीर्ष अदालत ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज और रिकॉर्डिंग को आरटीआई के तहत उपलब्ध नहीं कराया जा सकता और न ही संबंधित कोर्ट की इजाजत के बगैर किसी व्यक्ति को यह दिया जा सकता है।