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10वीं, 12वीं में विषय बदलने के नियम हुए सख्त,अब दस्तावेजों के साथ करना होगा पहले ये काम..
Tue, 30 Jul 2019 10:02 PM IST
Trainee Trainee
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Published by: Trainee Trainee
Updated Tue, 30 Jul 2019 10:02 PM IST
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सीबीएसई
- फोटो : सोशल मीडिया
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 10वीं और 12वीं कक्षा में विषय बदलने के नियमों को सख्त कर दिया है। सीबीएसई ने अपने तहत आने वाले सभी स्कूलों से अनुरोध किया है कि छात्रों का विषय बदलने का कोई आग्रह इस आधार पर स्वीकार न करें कि वे अपने पढ़ाई की व्यवस्था खुद कर लेंगे। सीबीएसई ने 10वीं, 12वीं क्लास में विषय बदलने के आवेदनों से निपटने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है।
बोर्ड के मुताबिक, 10वीं और 12वीं कक्षाएं दो वर्ष का पाठ्यक्रम है। सभी स्कूल छात्रों को 9वीं और 11वीं में ऐसे विषयों को चुनने की सलाह दें, जिन्हें छात्र अगली कक्षा में भी जारी रख सकें और जो स्कूल में उपलब्ध हों। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि छात्र जब 10वीं और 12वीं कक्षा में आते हैं तो विभिन्न आधार पर विषय बदलना चाहते हैं। संशोधित नियमों के तहत विषय बदलने का आग्रह तभी स्वीकार्य होगा, जब अनुरोध शैक्षणिक सत्र में ही किया गया हो। इस प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए एसओपी जारी की गई है। साथ ही, स्कूलों के सभी अनुरोध को एकत्र कर सीबीएसई के क्षेत्रीय कार्यालय भेजने को निर्देश दिया गया है। अधिकारी ने बताया कि अगर किसी मामले में पाया जाता है कि स्कूल ने निर्देशों का पालन नहीं किया है तो बोर्ड अनुरोध खारिज कर देगा। इसके लिए स्कूल जिम्मेदार होगा।
इसके मुताबिक, छात्र या अभिभावकों को विषय बदलने के लिए इसके पीछे के कारण का समर्थन करने वाले दस्तावेजों के साथ आधिकारिक अनुरोध करना होगा। इसके बाद स्कूल यह जांचेंगे कि विषय बदलने का अनुरोध वास्तविक है और 9वीं व 11वीं कक्षा में छात्र का प्रदर्शन क्या था। साथ ही स्कूलों को यह भी देखना होगा कि क्या नया विषय उपलब्ध है और चुने गए विषय अध्ययन की योजना के अनुसार मान्य हैं।
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बोर्ड के मुताबिक, 10वीं और 12वीं कक्षाएं दो वर्ष का पाठ्यक्रम है। सभी स्कूल छात्रों को 9वीं और 11वीं में ऐसे विषयों को चुनने की सलाह दें, जिन्हें छात्र अगली कक्षा में भी जारी रख सकें और जो स्कूल में उपलब्ध हों। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि छात्र जब 10वीं और 12वीं कक्षा में आते हैं तो विभिन्न आधार पर विषय बदलना चाहते हैं। संशोधित नियमों के तहत विषय बदलने का आग्रह तभी स्वीकार्य होगा, जब अनुरोध शैक्षणिक सत्र में ही किया गया हो। इस प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए एसओपी जारी की गई है। साथ ही, स्कूलों के सभी अनुरोध को एकत्र कर सीबीएसई के क्षेत्रीय कार्यालय भेजने को निर्देश दिया गया है। अधिकारी ने बताया कि अगर किसी मामले में पाया जाता है कि स्कूल ने निर्देशों का पालन नहीं किया है तो बोर्ड अनुरोध खारिज कर देगा। इसके लिए स्कूल जिम्मेदार होगा।
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आवेदन के साथ पेश करने होंगे दस्तावेज
इसके मुताबिक, छात्र या अभिभावकों को विषय बदलने के लिए इसके पीछे के कारण का समर्थन करने वाले दस्तावेजों के साथ आधिकारिक अनुरोध करना होगा। इसके बाद स्कूल यह जांचेंगे कि विषय बदलने का अनुरोध वास्तविक है और 9वीं व 11वीं कक्षा में छात्र का प्रदर्शन क्या था। साथ ही स्कूलों को यह भी देखना होगा कि क्या नया विषय उपलब्ध है और चुने गए विषय अध्ययन की योजना के अनुसार मान्य हैं।
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