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Scam: ‘नौकरी के बदले जमीन घोटाले में सीबीआई दाखिल करे निर्णायक आरोपपत्र’; अदालत ने जांच एजेंसी को दिया निर्देश
Mon, 08 Jul 2024 05:29 AM IST
विशांत श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विशांत श्रीवास्तव
Updated Mon, 08 Jul 2024 05:29 AM IST
सार
रेलवे में नौकरी के बदले जमीन घोटाले में अदालत ने सीबीआई को आरोप पत्र दाखिल करने के लिए कहा है। कोर्ट ने इसके लिए 15 जुलाई तक का समय दिया है।
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सीबीआई
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
अदालत ने रेलवे में नौकरी के बदले जमीन घोटाले में सीबीआई को 15 जुलाई तक अंतिम आरोपपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने साथ ही इसकी प्रति प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को 10 जुलाई तक मुहैया कराने का निर्देश दिया है। इस मामले में बिहार की पूर्व सीएम राबड़ी देवी, उनकी बेटियों मीसा भारती और हेमा यादव के साथ अमित कत्याल और हृदयानंद चौधरी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था।
राउज एवेन्यू कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को इस मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग में 6 अगस्त तक पूरक आरोप पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। ईडी के विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) ने 7 जून की सुनवाई में पूरक आरोपपत्र दाखिल करने के लिए और समय मांगा था। इस पर विशेष सीबीआई न्यायाधीश विशाल गोगने ने इस मामले को केस रिकॉर्ड के साथ 6 जुलाई को पेश होने और मामले की प्रगति से अवगत कराने का निर्देश दिया था।
लालू परिवार है आरोपी
यह घोटाला उस समय का है, जब लालू यादव यूपीए-1 सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि 2004 से 2009 तक भारतीय रेलवे के अलग-अलग जोन में ग्रुप डी पदों पर कई लोगों को नियुक्त किया गया था। बदले में इन लोगों ने अपनी जमीनें तत्कालीन रेल मंत्री लालू यादव के परिवार के सदस्यों और उनसे संबंधित कंपनी एके इन्फो सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड को हस्तांतरित कर दी थी।
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राउज एवेन्यू कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को इस मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग में 6 अगस्त तक पूरक आरोप पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। ईडी के विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) ने 7 जून की सुनवाई में पूरक आरोपपत्र दाखिल करने के लिए और समय मांगा था। इस पर विशेष सीबीआई न्यायाधीश विशाल गोगने ने इस मामले को केस रिकॉर्ड के साथ 6 जुलाई को पेश होने और मामले की प्रगति से अवगत कराने का निर्देश दिया था।
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लालू परिवार है आरोपी
यह घोटाला उस समय का है, जब लालू यादव यूपीए-1 सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि 2004 से 2009 तक भारतीय रेलवे के अलग-अलग जोन में ग्रुप डी पदों पर कई लोगों को नियुक्त किया गया था। बदले में इन लोगों ने अपनी जमीनें तत्कालीन रेल मंत्री लालू यादव के परिवार के सदस्यों और उनसे संबंधित कंपनी एके इन्फो सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड को हस्तांतरित कर दी थी।
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