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CBI: 4037 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी मामले में सीबीआई ने की कोलकाता में दो स्थानों पर छापेमारी
Tue, 27 Dec 2022 02:37 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Tue, 27 Dec 2022 02:37 AM IST
सार
जांच एजेंसी ने कहा कि यह मामला यूनियन बैंक आफ इंडिया की एक शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था, जिसमें 20 बैंकों के कंसोर्टियम से लगभग 4037.87 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई थी।
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सीबीआई
- फोटो : फाइल
विस्तार
सीबीआई ने 4037.87 करोड़ रुपये से अधिक की बैंक धोखाधड़ी मामले में सोमवार को कोलकाता की कारपोरेट पावर लिमिटेड कंपनी के साल्टलेक व दक्षिण कोलकाता स्थित परिसरों में छापे मारे।
इससे पहले शुक्रवार को सीबीआई ने नागपुर, मुंबई, रांची, कोलकाता, दुर्गापुर, गाजियाबाद और विशाखापत्तनम सहित 16 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था। जानकारी के मुताबिक सोमवार को तलाशी अभियान के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज व डिजिटल उपकरण जब्त किए गए। सीबीआई ने कंपनी के प्रमोटरों, निदेशकों और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
जांच एजेंसी ने कहा कि यह मामला यूनियन बैंक आफ इंडिया की एक शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था, जिसमें 20 बैंकों के कंसोर्टियम से लगभग 4037.87 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई थी। कंसोर्टियम के प्रमुख ऋणदाता यूनियन बैंक आफ इंडिया ने 30 सितंबर, 2013 को खाते को गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) के रूप में घोषित किया और बाद में अन्य सदस्य कंसोर्टियम बैंकों ने भी उक्त खाते को एनपीए के रूप में वर्गीकृत किया। उक्त कर्जदार कंपनी के खातों को 25 अक्तूबर, 2019 को जालसाजी घोषित किया गया था।
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इससे पहले शुक्रवार को सीबीआई ने नागपुर, मुंबई, रांची, कोलकाता, दुर्गापुर, गाजियाबाद और विशाखापत्तनम सहित 16 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था। जानकारी के मुताबिक सोमवार को तलाशी अभियान के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज व डिजिटल उपकरण जब्त किए गए। सीबीआई ने कंपनी के प्रमोटरों, निदेशकों और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
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जांच एजेंसी ने कहा कि यह मामला यूनियन बैंक आफ इंडिया की एक शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था, जिसमें 20 बैंकों के कंसोर्टियम से लगभग 4037.87 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई थी। कंसोर्टियम के प्रमुख ऋणदाता यूनियन बैंक आफ इंडिया ने 30 सितंबर, 2013 को खाते को गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) के रूप में घोषित किया और बाद में अन्य सदस्य कंसोर्टियम बैंकों ने भी उक्त खाते को एनपीए के रूप में वर्गीकृत किया। उक्त कर्जदार कंपनी के खातों को 25 अक्तूबर, 2019 को जालसाजी घोषित किया गया था।
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