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सीबीआई रेडः ये है चिदंबरम फैमिली और पीटर मुखर्जी के बीच का कनेक्शन

Tue, 16 May 2017 05:56 PM IST
amarujala.com-Presented by-संदीप भट्ट
amarujala.com-Presented by-संदीप भट्ट Updated Tue, 16 May 2017 05:56 PM IST
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CBI Raid At P Chidambaram's Home, Peter and Indrani Mukerjea Link

सीबीआई ने पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम के उनके दिल्ली, मुंबई और चेन्नई के घर और दफ्तर ठिकानों पर छापेमारी की । साथ ही मुंबई के चर्चित शीना बोरा मर्डर केस के मुख्य आरोपी पीटर मुखर्जी के मुंबई के ठिकानों पर भी छापा मारा।

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मालूम हो कि शीना बोरा मर्डर केस के मुख्य आरोपी इंद्राणी और पीटर मुखर्जी आईएनएक्स मीडिया के निदेशक रह चुके हैं। इसके अलावा कार्ति चिदंबरम की एक और कंपनी चैस मैनेजमेंट सर्विसेज पर भी सीबीआई ने केस दर्ज किया है। आरोप है कि चिदंबरम के वित्तमंत्री रहते हुए ही आईएनएक्स मीडिया को स्वीकृति दी गई थी। आइए जानते हैं चिदंबरम परिवार और पीटर मुखर्जी के बीच क्या कनेक्‍शन है।
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-पी. चिदंबरम के ठिकानों पर सीबीआई छापे एफआईपीबी बोर्ड की ओर से आईएनएक्स मीडिया ( अब 9एक्स मीडिया) को क्लीयरेंस देने में नियमों के कथित उल्लंघन के आरोप में मारे गए हैं। 2007 में जब आईएनएक्स मीडिया को विदेशी निवेश क्लीयरेंस दी गई थी तो उस दौरान चिदंबरम वित्त मंत्री थे और कंपनी का मालिकाना हक पीटर और इंद्राणी मुखर्जी के पास था।
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-कहा जा रहा है कि आईएनएक्स मीडिया को यह मंजूरी चिदंबरम के बेटे के कार्ति चिदंबरम ने दिलवाई। आईएनएक्स मीडिया को सिर्फ चार करोड़ रुपये विदेशी निवेश की अनुमति थी लेकिन वास्तविक निवेश काफी ज्यादा हुआ।

-कार्ति के कहने की वजह से नियमों के उल्लंघन के बावजूद आईएनएक्स मीडिया में विदेशी निवेश को हरी झंडी दे दी गई। सीबीआई का कहना है कि इस सौदे में कार्ति ने रिश्वत खाई। एक रिपोर्ट के मुताबिक कार्ति को 90  लाख रुपये मिले। सीबीआई की एफआईआर में पी. चिदंबरम का नाम नहीं है लेकिन कहा जा रहा है कि उनकी भूमिका भी जांच के दायरे में है। 


सूत्रों के मुताबिक, आईएनएक्स मीडिया सौदे के कुछ सुराग तब सामने आए जब सनसनीखेज शीना बोरा की हत्या के आरोप में पीटर मुर्खर्जी के वित्तीय लेनदेन की छानबीन की गई थी।

हालांकि इस पूरे मामले में दर्ज एफआरआई में कार्ति चिदंबरम का नाम नहीं है लेकिन उनकी भूमिका का उल्‍लेख जरूर है। कहा गया कि बोर्ड ने निवेश की मंजूरी नहीं दी मगर तत्कालीन वित्त मंत्री ने निवेश के प्रस्ताव का अनुमोदन किया था। 




 

ये भी हैं आरोप 

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1. ईडी ने इस साल 17 अप्रैल को वासन हेल्थकेयर और इसके प्रमोटर कार्ति और एडवांटेज स्ट्रेटजिक कंस्लटिंग को 2307 करोड़ रुपये के विदेशी मुद्रा घोटाले में नोटिस जारी किया। फेमा मामले में भी कंपनी, कार्ति और उनके रिश्तेदारों के खिलाफ नोटिस जारी हुए हैं। एडवांटेज स्ट्रेटजिक कंस्लटिंग को वासन हेल्थ केयर के शेयर विदेशी निवेशकों को बेचने के आरोप में नोटिस जारी किए गए। एडवांटेज चिदंबरम के रिश्तेदार की कंपनी है। 

2. पी. चिदंबरम पर एयरसेल-मैक्सिस डील को भी मंजूरी देने का आरोप है। भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि चिदंबरम के वित्त मंत्री रहते हुए एफआईपीबी ने एयरसेल-मैक्सिस डील को मंजूरी दी थी। इसके लिए ली गई रिश्वत की रकम पूरी तरह कार्ति चिदंबरम के विदेशी खाते में जमा की गई।  

इन कंपनियों के खिलाफ केस 
सीबीआई ने इस मामले में आईएनएक्स मीडिया और इसके निदेशकों इंद्राणी और पीटर मुखर्जी, कार्ति चिदंबरम और उनकी कंपनी चेस मैनेजमेंट सर्विस और पद्मा विश्वनाथन और उनकी कंपनी एडवांटेज स्ट्रेटजिक कंस्लटिंग के खिलाफ केस दर्ज किए हैं। इन पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, भ्रष्ट तरीके अपनाने, लोकसेवकों को प्रभावित करने और आपराधिक  दुराचरण का आरोप लगाया है।

कार्ति के इन सौदों पर भी नजर
1. 2006 में एक कॉटन मिल के 845 लाख रुपये का सौदा 
2. अमेरिका के लावेयर स्थित एक कंपनी से मिले 5.46 लाख डॉलर पर 
3. अर्जेंटीना में खेती की जमीन खरीदने से जुड़े दस्तावेजों पर 
4. रेस के घोड़ों और पेंटिंग्स में निवेश पर 
5. डीएलएफ गुड़गांव और चेन्नई में फ्लैट खरीद पर ब्रिटेन में रेस्तराओं में निवेश पर 
6. अफगानिस्तान में एलपीजी आयात सौदे पर 
7. ब्रिटेन की एक फर्म में 24 लाख डॉलर के निवेश प्रस्ताव पर 
8. दक्षिण अफ्रीका में वाइन एस्टेट खरीदने से जुड़े दस्तावेजों पर  

क्या है एफआईआर में 

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आईएनएक्स मीडिया ने 13 मार्च 2017 को विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड यानी एफआईपीबी से तीन नॉन रेजिडेंट निकायों को दस रुपये के 1498995 इक्विटी शेयर और दस रुपये के 3122605 के कनवर्टेबल, नॉन-कम्यूलेटिव रिडेमेबल प्रिफरेंस शेयर जारी करने की इजाजत मांगी थी। यह आईएनएक्स की ओर से जारी किए गए कुल इक्विटी शेयर का 46.21 फीसदी था। जिन विदेश निवेशकों को शेयर जारी करने की इजाजत मांगी गई थी वे थे डनअर्न इनवेस्टमेंट (मॉरीशस) लिमिटेड, एनएसआर पीई मॉरीशस और न्यू वरनॉन प्राइवेट इक्विटी लिमिटेड। 

एफआईपीबी यूनिट ने साफ कहा है कि दस रुपये के अंकित मूल्य पर 4.62 करोड़ रुपये के प्रस्तावित शेयरों को विदेशी निवेश के तौर पर अनुमति मिल सकती है। लेकिन आईएनएक्स न्यूज में होने वाले इस निवेश के लिए एफआईपीबी से अलग से अनुमति लेनी होगी। बोर्ड ने वित्त मंत्री के पास आईएनएक्स मीडिया में विदेशी निवेश को मंजूरी की सिफारिश भेजी थी, आईएनएक्स न्यूज में नहीं।

एफआईआर में कहा गया है कि तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने बोर्ड की इन सिफारिशों को मंजूरी दे दी थी। लेकिन कंपनी ने इन सिफारिशों का उल्लंघन करते हुए आईएनएक्स न्यूज में 26 फीसदी पूंजी (जिसमें विदेशी निवेश भी शामिल था) का निवेश कर दिया और आईएनएक्स मीडिया में 305 करोड़ रुपये का विदेशी निवेश करवाया। जबकि इजाजत सिर्फ 4.62 करोड़ रुपये की थी। यह सब विदेशी निवेशकों को 800 रुपये के प्रीमियर पर शेयर बेच कर किया गया।   

एफआईआर में कहा गया कि एफआईपीबी के अधिकारियों ने यह मंजूरी कार्ति चिदंबरम के कहने पर दी गई। अधिकारियों ने न सिर्फ आईएनएक्स न्यूज के गैरकानूनी कदम को नजरअंदाज किया बल्कि जान-बूझ कर पूरे आईएनएक्स ग्रुप को फायदा पहुंचाया। उन्होंने समूह को विदेशी निवेश के क्लीयरेंस के लिए नए सिरे से आवेदन करने की सलाह देकर अपने पद को दुरुपयोग किया। 


छापेमारी और आरोपों पर सफाई

ये छापे सिर्फ राजनीतिक दुश्मनी निकालने के लिए मारे जा रहे हैं। हमने कुछ भी गलत नहीं किया। मेरे खिलाफ वे कोई आरोप साबित नहीं कर पाए इसलिए हमारी आवाज दबाना चाहते हैं।
- कार्ति चिदंबरम 
 

सरकार मुझे लिखने से रोकना चाहती है। मेरे साथ सरकार वही करना चाहती है जो इसने विपक्ष के नेताओं, पत्रकारों, स्तंभकारों, एनजीओ और सिविल सोसाइटी के साथ किया है।  ऐसा करके सरकार मुझे बोलने और लिखने से नहीं रोक सकती। विदेश निवेश का हर केस नियमों और कानूनी प्रक्रिया के तहत मंजूर किया गया या रोका गया। हर मामले  पर एफआईपीबी की सिफारिश के मुताबिक फैसला हुआ। बोर्ड में भारत सरकार के पांच सचिव होते हैं और फैसला उनकी सिफारिश पर होता है। - पी. चिदंबरम 

 
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