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सीबीआई जांचेगी डीम्ड संस्थानों से डिस्टेंस में दी गई इंजीनियरिंग की डिग्रियां

Wed, 13 Dec 2017 09:52 AM IST
सीमा शर्मा
सीमा शर्मा Updated Wed, 13 Dec 2017 09:52 AM IST
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CBI investigate engineering degrees issue by deemed universities of India
सर्वोच्च अदालत की फटकार और निर्देश के चलते अब सीबीआई डीम्ड मामलों की जांच करेगी। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने चार डीम्ड संस्थानों में रोक के बाद भी डिस्टेंस मोड से इंजीनियरिंग डिग्री की पढ़ाई करवाने की जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंप दी है। खास बात यह है कि मंत्रालय पहली बार किसी संस्था और मामले की जांच सीबीआई को सौंप रहा है।
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सरकार से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, जावडेकर ने जांच संबंधी फाइल सीबीआई के पास शिफ्ट कर दी है। केंद्रीय एजेंसी यह पता लगाएगी कि चारों डीम्ड संस्थानों ने किसकी अनुमति से डिस्टेंस मोड से इंजीनियरिंग डिग्री की पढ़ाई करवाई। उक्त डीम्ड संस्थानों को डिस्टेंस मोड से इंजीनियरिंग डिग्री की पढ़ाई की अनुमति देने में किस स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार हुआ। क्या यूजीसी प्रबंधन को इसकी जानकारी थी या फिर इस साजिश में यूजीसी का भी कोई अधिकारी शामिल है? यूजीसी ने किस प्रकार की कार्रवाई की? उक्त चार डीम्ड संस्थानों में ही डिस्टेंस मोड से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करवाई गई या अन्य संस्थान भी ऐसा कर रहे हैं।
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सूत्रों का कहना है कि सीबीआई उक्त चारों डीम्ड संस्थानों की जानकारियां जुटाएंगी। इसके अलावा उन पूर्व छात्रों से भी बातचीत होगी, जिन्होंने इस अवधि में डिस्टेंस मोड से इंजीनियरिंग की डिग्री ली है। उक्त छात्रों ने कैसे दाखिला लिया, क्या उक्त संस्थानों ने कोई विज्ञापन निकाला था? यदि विज्ञापन निकाला गया था तो फिर यूजीसी की पकड़ में क्यों नहीं आया?
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सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई यूजीसी के कामकाज की भी जांच करेगी। इसमें यह पता लगाया जाएगा कि मंजूरी के बिना किस प्रकार संस्थानों या कॉलेजों में कोर्स शुरू हो जाते हैं। ऐसे मामलों की निगरानी या जांच के लिए यूजीसी की कोई टीम गठित है भी या नहीं? सीबीआई रिपोर्ट मंत्रालय और सुप्रीम अदालत को देगी।

ये हैं संस्थान
  1. इलाहाबाद एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट
  2. जेआरएन राजस्थान विद्यापीठ, राजस्थान
  3. एडवांस स्ट्डीज इन एजुकेशन, राजस्थान
  4. विनायक मिशन रिसर्च फाउंडेशन, तमिलनाडु

सुप्रीम कोर्ट ने डिग्री कर दी थी निरस्त
सुप्रीम कोर्ट ने उक्त चारों डीम्ड संस्थानों से वर्ष 2001-05 से पासआउट छात्रों की डिग्री इसलिए निरस्त कर दी थी, क्योंकि उन्होंने यूजीसी की अनुमति के बगैर ही डिस्डेंस मोड से इंजीनियरिंग की डिग्री दी। नियमों के अनुसार, इंजीनियरिंग की डिग्री डिस्टेंस मोड से पढ़कर नहीं ली जा सकती। 
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