दाभोलकर हत्याकांड: सीबीआई ने सात साल बाद बरामद की हत्या में इस्तेमाल पिस्तौल
सामाजिक कार्यकर्ता, लेखक और बुद्धिजीवी डॉ नरेंद्र दाभोलकर की हत्या में इस्तेमाल पिस्तौल बरामद होने की बात सामने आई है। सीबीआई सूत्र के मुताबिक एक टीम कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर की हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार की तलाश कर रही थी। टीम को ठाणे की एक खाड़ी से एक पिस्तौल मिली है। हालांकि अभी यह पता लगाया जाना बाकी है कि क्या यह वहीं हथियार है जिससे दाभोलकर की हत्या की गई थी। बरामद पिस्तौल को फॉरेंसिक लैब भेजा गया है।
CBI sources: A weapon (Pistol) recovered from the creek near Thane. A team was searching for the murder weapon used in the murder of activist Narendra Dabholkar. It is still to be ascertained if it is the same weapon. The weapon will be sent for ballistic examination.
— ANI (@ANI) March 5, 2020विज्ञापन
सीबीआई को अगस्त 2019 में पुणे की शिवाजीनगर कोर्ट से ठाणे की खाड़ी में हथियार तलाशने की मंजूरी मिली थी। इसके बाद नॉर्वे के गोताखोरों को इसकी खोज में लगाया गया। हथियार ढूंढने के लिए दुबई स्थित एनविटेक मरीन कंसल्टेंट्स ने नार्वे से अपनी मशीनरी पहुंचाई।
बता दें कि दाभोलकर की 20 अगस्त 2013 को दो अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीते माह फरवरी में नरेंद्र दाभोलकर और सामाजिक कार्यकर्ता गोविंद पंसारे की हत्याओं के मामलों में ट्रायल शुरू किए जाने को लेकर की जा रही देरी पर चिंता जताई थी। हाईकोर्ट ने इसके लिए सीबीआई और सीआईडी को जमकर फटकार लगाते हुए कहा था कि दोनों मृतकों और उनके परिवारों और गिरफ्तार किए गए आरोपियों, किसी को भी न्याय देने में विफलता नहीं होनी चाहिए।
अदालत ने कहा था कि इन लोगों के भी कुछ मूल अधिकार होते हैं। पीठ ने दोनों जांच एजेंसियों को 24 मार्च को यह बताने का आदेश दिया है कि दोनों मामलों में ट्रायल कब शुरू किया जाएगा। जस्टिस एससी धर्माधिकारी और जस्टिस आरआई चागला की खंडपीठ ने कहा था कि दाभोलकर की गोली मारकर हत्या किए जाने को सात साल और पंसारे की हत्या को पांच साल हो चुके हैं। पीठ ने गौर किया कि जांच एजेंसियां अभी भी दाभोलकर हत्याकांड में शामिल हथियार की बरामदगी के मामले में जांच कर रही है। पीठ ने कहा कि इन लोगों के खिलाफ जल्द से जल्द मुकदमा शुरू होना चाहिए।
‘लोगों का सिस्टम से विश्वास खत्म नहीं होना चाहिए’
पीठ ने सीबीआई और सीआईडी को फटकारते हुए कहा था कि यहां क्रिमिनल जस्टिस डिलीवरी सिस्टम की अति विश्वसनीयता दांव पर है। लोगों का सिस्टम में से पूरा विश्वास खत्म नहीं होना चाहिए। पीठ ने कहा कि अपराध 2013 और 2015 में अंजाम दिए गए थे।
13 फरवरी 2019 को दाखिल हुई थी पूरक चार्जशीट
इस मामले में पूरक चार्जशीट 13 फरवरी, 2019 में दाखिल हुई। इसमें दो हमलावरों के नाम सचिन आंदुरे और शरद कालस्कर बताए गए। एक अन्य चार्जशीट 20 नवंबर 2019 में वकील संजीव पुनालेकर और उनके सहयोगी विक्रम भावे के खिलाफ दाखिल हुई। इन्हें हत्या में सहयोगी साजिशकर्ता के तौर पर बताया गया। जिन सात लोगों के नाम चार्जशीट में लिखे गए, उनमें तवाड़े, कालस्कर, आंदुरे और भावे जेल में हैं। अकोल्कर और पवार की गिरफ्तारी नहीं हुई है। 25 मई 2019 को वकील पुनालेकर और भावे को गिरफ्तार किया गया था। पुनालेकर को 5 जुलाई 2019 को जमानत दी गई थी।