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सीबीआई में सबसे बड़ा घमासानः वर्मा-अस्थाना छुट्टी पर भेजे गए, 13 अफसरों का तबादला 

Wed, 24 Oct 2018 10:03 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 24 Oct 2018 10:03 PM IST
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cbi bribery case: Alok Verma and deputy Rakesh Asthana were sent on leave Know full story
सीबीआई - फोटो : अमर उजाला

सीबीआई में पहली बार दो शीर्ष अधिकारियों को लेकर चल रहे घमासान में जबरदस्त नाटकीय मोड़ आ गया। केंद्र सरकार ने मंगलवार आधी रात को सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को सभी जिम्मेदारियों से मुक्त करते हुए छुट्टी पर भेजने का आदेश जारी कर दिया। वर्मा की जगह तत्काल प्रभाव से एजेंसी में चौथे नंबर के अधिकारी नागेश्वर राव को अंतरिम निदेशक बनाया गया। राव ने आते ही करीब 13 अधिकारियों को भी इधर से उधर कर दिया। इस बीच, केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने भी मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की है। 

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नियुक्ति मामले की कैबिनेट कमेटी के इस फैसले के बाद नागेश्वर राव ने रात करीब 1.30 बजे पद की जिम्मेदारी भी ले ली। इसके बाद करीब 2 बजे वर्मा और अस्थाना को उनके आवास पर इन फैसले की सूचना पहुंचाई गई। राव ने जिम्मेदारी संभालते ही अस्थाना के खिलाफ घूसखोरी की जांच कर रही पूरी टीम को ही हटा दिया। इनमें जांच अधिकारी अजय बस्सी और डीआईजी मनीष सिन्हा भी शामिल हैं। नागेश्वर ने कुल 13 अधिकारियों के तबादले और अतिरिक्त जिम्मेदारी देने का फरमान जारी किया है। राव 1986 बैच के ओडिशा कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं।
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केंद्र सरकार ने पहली बार पूरे विवाद पर बुधवार को बयान दिया। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सीबीआई में पहली बार विचित्र और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति पैदा हुई है। निदेशक और विशेष निदेशक पर आरोप लगे हैं, लेकिन सरकार इसकी जांच नहीं कर सकती। यह अधिकार सीवीसी का है। लिहाजा सीवीसी ने जांच के लिए एसआईटी का गठन किया है। जब तक एसआईटी जांच करेगी, तब तक अंतरिम उपाय के तौर पर दोनों अधिकारियों को अवकाश पर रखा जाएगा।    
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बस्सी का तबादला पोर्ट ब्लेयर किया 
राकेश अस्थाना के खिलाफ आरोपों के जांच अधिकारी (आईओ) एके बस्सी का तबादला पोर्ट ब्लेयर कर दिया गया। अस्थाना ने सीवीसी से की गई शिकायत में बस्सी पर निदेशक आलोक वर्मा के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया था। इसके साथ ही निगरानी विभाग के अति महत्वपूर्ण पद पर काम कर रहे डीआईजी अनीस प्रसाद को प्रशासन विभाग भेज दिया गया है। आर्थिक अपराध यूनिट-1 के केआर चौरसिया को प्रसाद की जगह अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। एक अन्य निगरानी अधिकारी एस एस गुरुम को जबलपुर भेजा गया है। 

वर्मा-अस्थाना के दफ्तर सील 
अतंरिम निदेशक नागेश्वर राव मंगलवार रात ही सीबीआई मुख्यालय पहुंचे और 11वीं मंजिल पर स्थित आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के दफ्तरों को सील कर दिया। साथ ही 13वीं मंजिल को सील कर दिया गया। हालांकि सीबीआई के प्रवक्ता ने ऐसी किसी भी कार्रवाई से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि किसी भी मंजिल या दफ्तर को सील नहीं किया गया, बस कुछ देर के लिए वहां जाने पर रोक लगाई गई थी। बुधवार को इन दफ्तरों को खोल दिया गया।

डायरेक्टर आलोक वर्मा ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप, निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
सीबीआई निदेशक के पद से हटाए जाने के चंद घंटों के बाद वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी आलोक वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में सरकार के इस निर्णय को चुनौती दे दी। अपनी याचिका में वर्मा ने केंद्रीय सतर्कता आयोग व कार्मिक विभाग द्वारा उन्हें पद से हटाने और संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को अंतरिम तौर पर सीबीआई निदेशक का कार्यभार देने के निर्णय को निरस्त करने की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा है कि यह आदेश मनमाना है और यह नैसर्गिक न्याय के खिलाफ है। यह संविधान के अनुच्छेद-14, 19 और 21 का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करेगा।   

विश्वसनीयता के लिए जरूरी था कदम : जेटली  
नई दिल्ली। कैबिनेट बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना को हटाने का फैसला सीवीसी की सिफारिशों के आधार पर किया गया। सीबीआई की ईमानदारी और विश्वसनीयता कायम रखने के लिए यह बेहद जरूरी था। आरोपियों को उनके खिलाफ हो रही जांच का प्रभारी नहीं बनाया जा सकता। जांच में निष्पक्षता जरूरी है। सीवीसी ने स्पष्ट किया था कि दोनों अफसर और न ही उनके अंतर्गत आने वाली कोई एजेंसी आरोपों की जांच नहीं कर सकती। 


जो राफेल सौदे के इर्दगिर्द आएगा, हटा दिया जाएगा : राहुल  
नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को हटाए जाने को राफेल सौदे से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने ट्वीट किया, ‘सीबीआई चीफ आलोक वर्मा राफेल सौदे से जुड़े कागजात इकट्ठा कर रहे थे। उन्हें जबरदस्ती छुट्टी पर भेज दिया गया। प्रधानमंत्री का मैसेज एकदम साफ है। कोई भी राफेल सौदे के इर्दगिर्द आएगा, हटा दिया जाएगा, मिटा दिया जाएगा। देश और संविधान खतरे में है।’  

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