{"_id":"6399c6677abab17be2045413","slug":"cbi-books-jewellery-firms-for-rs-352-crore-fraud-in-sbi","type":"story","status":"publish","title_hn":"CBI: SBI में 352 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला, सीबीआई ने तीन ज्वेलरी फर्मों के खिलाफ FIR दर्ज की","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
CBI: SBI में 352 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला, सीबीआई ने तीन ज्वेलरी फर्मों के खिलाफ FIR दर्ज की
Wed, 14 Dec 2022 06:19 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Wed, 14 Dec 2022 06:19 PM IST
सार
एसबीआई ने अपनी शिकायत में कहा कि प्रवर्तक/गारंटर बैंक की अनुमति के बिना गिरवी रखी संपत्तियों को बेच रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप सिक्योरिटी का नुकसान हुआ है जिसके आधार पर भारी ऋण दिया गया है। ऐसे में अब ऋण की वसूली गंभीर रूप से खतरे में आ गई है।
विज्ञापन
सीबीआई की छापेमारी
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारतीय स्टेट बैंक में 352 करोड़ रुपये से अधिक की कथित ऋण धोखाधड़ी के मामले में सीबीआई ने कार्रवाई की है। इस मामले में सीबीआई ने महाराष्ट्र के जलगांव की तीन आभूषण कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। सीबीआई के अधिकारियों ने यह जानकारी दी है।
विज्ञापन
अधिकारियों ने बताया कि ऋण धोखाधड़ी के इस मामले में तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। इन तीनों एफआईआर में राजमल लखीचंद ज्वेलर्स प्राइवेट लिमिटेड, आरएल गोल्ड प्राइवेट लिमिटेड, और मनराज ज्वेलर्स प्राइवेट लिमिटेड सहित उनके प्रमोटरों-निदेशकों और गारंटरों ईश्वरलाल शंकरलाल जैन लालवानी, मनीष ईश्वरलाल जैन लालवानी, पुष्पादेवी ईश्वरलाल जैन लालवानी और नीतिका मनीष जैन लालवानी को आरोपी के रूप में नामजद किया है।
विज्ञापन
बैंक ने आरोप लगाया है कि फॉरेंसिक ऑडिटर्स के अनुरोध के बावजूद प्रमोटरों द्वारा कंपनी राजमल लखीचंद की वित्तीय जानकारी प्रदान नहीं की गई। बैंक के पास आरोपित अचल संपत्तियों को बिना जानकारी के बेच दिया गया।
विज्ञापन
एसबीआई ने अपनी शिकायत में कहा कि प्रवर्तक/गारंटर बैंक की अनुमति के बिना गिरवी रखी संपत्तियों को बेच रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप सिक्योरिटी का नुकसान हुआ है जिसके आधार पर भारी ऋण दिया गया है। ऐसे में अब ऋण की वसूली गंभीर रूप से खतरे में आ गई है।
बैंक ने आरोप लगाया है कि कंपनियों ने भारतीय स्टेट बैंक से क्रेडिट सुविधाओं का लाभ उठाया और जिस उद्देश्य के लिए उन्हें स्वीकृत किया गया था, उसके बजाय उन्हें अन्य उपयोग के लिए डायवर्ट करके उनका दुरुपयोग किया। उधारकर्ताओं और सहयोगियों ने सार्वजनिक धन की हेराफेरी करके बैंक को धोखा देने के इरादे से कंपनी के झूठे वित्तीय और स्टॉक स्टेटमेंट दाखिल किए थे।
निवेशकों से ठगी करने वाली एप कंपनी के 51 करोड़ जब्त
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक मोबाइल एप कंपनी से जुड़े परिसरों पर छापे मारकर 51.11 करोड़ रुपये जब्त किए। एप कंपनी ने कथित तौर पर आकर्षक रिटर्न देने के बहाने निवेशकों से ठगी की है।
एजेंसी ने 9 दिसंबर को मैट्रिक्स पार्टनर्स फंड (एमपीएफ) एप और उससे जुड़े कुछ अन्य एप के ‘दुरुपयोग’ के मामले में नोएडा, पुणे और बंगलूरू के ठिकानों पर तलाशी ली। दरअसल, नवंबर 2021 में मेघालय पुलिस ने एमपीएफ एप से जुड़े संस्थानों और व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। इसी प्राथमिकी से मनी लॉन्ड्रिंग का मामला सामने आया। ईडी ने एक बयान में कहा, एमपीएफ एप एक ‘स्कैम इंवेस्टमेंट एप्लिकेशन’ है जिसने बहुत अधिक लाभ देने का वादा किया और भोले-भाले निवेशकों के साथ ठगी की।
आईएएस अधिकारी की 1.62 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच
प्रवर्तन निदेशालय ने केरल कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी टीओ सूरज की 1.62 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत की गई है। अटैच की गई संपत्ति में केरल में खाली पड़ी जमीन, एफडी, बैंक खाते और शेयरों में निवेश शामिल है। ये अधिकारी और परिजनों के नाम पर थी। सूरज ने 1980 में केरल सरकार सेवा ज्वाइंन की थी और वन विभाग में रेंजर थे। बाद में 1994 में वह आईएएस बने। ज्ञाज स्रोत से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में केरल विजिलेंस और भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो ने आरोप पत्र दायर किया था।