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मेजर विजय सिंह समेत 8 सैन्यकर्मियों पर केस, सातवीं के छात्र को घर से उठाकर मार दिया गया था
एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Fri, 03 Aug 2018 01:47 AM IST
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मणिपुर फर्जी एनकाउंटर मामले में सीबीआई ने एक सैन्य अधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई इन मामलों की जांच कर रही है। सीबीआई ने फर्जी एनकाउंटर मामले में 29 एफआईआर दर्ज की है।
जांच एजेंसी ने 12 वर्षीय आजाद खान की हत्या मामले में मेजर विजय सिंह बल्हारा समेत सात अन्य सैन्यकर्मियों का नाम बतौर आरोपी शामिल किया है। मेजर बल्हारा उस वक्त असम राइफल्स से जुड़े हुए थे। हत्या से जुड़ी आईपीसी की धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त आयोग ने इस मामले को फर्जी एनकाउंटर करार दिया था। इस आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट से रिटायर जज संतोष हेगड़े कर रहे थे।
आयोग को दिए बयान में परिवार ने बताया कि आजाद की हत्या 4 मार्च 2009 को कर दी गई थी। फौबाकचाओ हाई स्कूल के सातवीं कक्षा का छात्र आजाद का कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं था। मारने से पहले उसे घर से उठाया गया था। कथित एनकाउंटर से दो महीने पहले एक एफआईआर हत्या की कोशिश, आर्म्स एक्ट और अन्य सख्त आरोपों के तहत दर्ज की गई थी।
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सुरक्षा बलों के सबूतों के मुताबिक, मृतक पीपुल्स यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट (पीयूएलएफ) का सदस्य था। हालांकि मणिपुर सरकार के अनुसार, यह प्रतिबंधित संगठन नहीं था। आजाद के परिवार के अनुसार, करीब 30 सुरक्षा कर्मी सुबह करीब 11.50 बजे उसके घर आए और आजाद को घसीटकर ले गए। एक मैदान पर उसकी जमीन पिटाई की। परिजनों, रिश्तेदारों और आजाद के दोस्तों को सुरक्षा बलों ने एक कमरे में बंद कर दिया।
हालांकि उन्होंने खिड़की से देखा कि पिटाई के बाद एक कमांडो ने उसे गोली मार दी और उसके शव के पास एक पिस्टल फेंक दी। आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, परिवार के बयान का रिश्तेदारों ने भी पुष्टि की। पिछले साल जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को 41 से अधिक फर्जी एनकाउंटर के मामले सौंपे थे, जिसमें सुरक्षा बलों के हाथों 86 लोग मारे गए।
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जांच एजेंसी ने 12 वर्षीय आजाद खान की हत्या मामले में मेजर विजय सिंह बल्हारा समेत सात अन्य सैन्यकर्मियों का नाम बतौर आरोपी शामिल किया है। मेजर बल्हारा उस वक्त असम राइफल्स से जुड़े हुए थे। हत्या से जुड़ी आईपीसी की धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त आयोग ने इस मामले को फर्जी एनकाउंटर करार दिया था। इस आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट से रिटायर जज संतोष हेगड़े कर रहे थे।
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आयोग को दिए बयान में परिवार ने बताया कि आजाद की हत्या 4 मार्च 2009 को कर दी गई थी। फौबाकचाओ हाई स्कूल के सातवीं कक्षा का छात्र आजाद का कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं था। मारने से पहले उसे घर से उठाया गया था। कथित एनकाउंटर से दो महीने पहले एक एफआईआर हत्या की कोशिश, आर्म्स एक्ट और अन्य सख्त आरोपों के तहत दर्ज की गई थी।
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सुरक्षा बलों के सबूतों के मुताबिक, मृतक पीपुल्स यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट (पीयूएलएफ) का सदस्य था। हालांकि मणिपुर सरकार के अनुसार, यह प्रतिबंधित संगठन नहीं था। आजाद के परिवार के अनुसार, करीब 30 सुरक्षा कर्मी सुबह करीब 11.50 बजे उसके घर आए और आजाद को घसीटकर ले गए। एक मैदान पर उसकी जमीन पिटाई की। परिजनों, रिश्तेदारों और आजाद के दोस्तों को सुरक्षा बलों ने एक कमरे में बंद कर दिया।
हालांकि उन्होंने खिड़की से देखा कि पिटाई के बाद एक कमांडो ने उसे गोली मार दी और उसके शव के पास एक पिस्टल फेंक दी। आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, परिवार के बयान का रिश्तेदारों ने भी पुष्टि की। पिछले साल जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को 41 से अधिक फर्जी एनकाउंटर के मामले सौंपे थे, जिसमें सुरक्षा बलों के हाथों 86 लोग मारे गए।