{"_id":"64defdf0fe4d0e059b099754","slug":"cauvery-dispute-karnataka-shivakumar-appeal-authority-reconsider-decision-sharing-water-with-tamilnadu-2023-08-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"कावेरी विवादः सूखे से जूझ रहे कर्नाटक को देना होगा तमिलनाडु को पानी, शिवकुमार बोले- फैसले पर हो पुनर्विचार","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
कावेरी विवादः सूखे से जूझ रहे कर्नाटक को देना होगा तमिलनाडु को पानी, शिवकुमार बोले- फैसले पर हो पुनर्विचार
Fri, 18 Aug 2023 10:45 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलुरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलुरू
Published by: नितिन गौतम
Updated Fri, 18 Aug 2023 10:45 AM IST
सार
पूर्व सीएम बासवराज बोम्मई ने राज्य की कांग्रेस सरकार को घेर लिया है। बोम्मई ने राज्य सरकार पर किसानों को धोखा देने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार ने प्राधिकरण के सामने सही तरीके से अपना पक्ष नहीं रखा।
विज्ञापन
कावेरी के पानी को लेकर है विवाद
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने गुरुवार को कावेरी वाटर मैनेजमेंट अथॉरिटी (CWMA)से अपील की है कि वह तमिलनाडु को पानी देने के फैसले पर पुनर्विचार करे। बता दें कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण ने कर्नाटक सरकार को निर्देश दिया है कि वह अगले 15 दिनों में तमिलनाडु के लिए 10 हजार क्युसेक पानी छोड़े। जिस पर विपक्षी भाजपा ने राज्य सरकार को घेर लिया है और उस पर प्राधिकरण के सामने राज्य का पक्ष सही ढंग से नहीं रखने का आरोप लगा दिया है।
सूखे से जूझ रहे कर्नाटक के इलाके
इस पर कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने कहा कि 'हमें प्राधिकरण से 10 हजार क्युसेक पानी छोड़ने का निर्देश मिला है। हम जानते हैं कि राज्य में इन दिनों पानी का संकट है और कई इलाके गंभीर रूप से सूखे का सामना कर रहे हैं। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए हमने बीते चार से पांच दिन पानी छोड़ा है। हालांकि हम प्राधिकरण से अपील करते हैं कि वह अपने फैसले पर पुनर्विचार करे क्योंकि इसके चलते कर्नाटक में पीने के पानी की कमी हो सकती है।'
विपक्ष ने सरकार पर लगाए आरोप
वहीं इस मुद्दे पर पूर्व सीएम बासवराज बोम्मई ने राज्य की कांग्रेस सरकार को घेर लिया है। बोम्मई ने राज्य सरकार पर किसानों को धोखा देने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार ने प्राधिकरण के सामने सही तरीके से अपना पक्ष नहीं रखा। बोम्मई ने कहा कि 'कांग्रेस सरकार ने किसानों से धोखा किया है, खासकर कावेरी नदी बेसिन के किसानों पर इसका ज्यादा असर पड़ेगा। सरकार ने कावेरी जल प्रबंधन के सामने सही तरीके से अपना पक्ष नहीं रखा। सरकार को सुप्रीम कोर्ट में किसानों के लिए खड़ा होना चाहिए और आत्मसमर्पण करने के बजाय मजबूती से अपना पक्ष रखना चाहिए।'
विज्ञापन
कावेरी नदी के पानी को लेकर है विवाद
इससे पहले सोमवार को डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने कहा था कि तमिलनाडु को कावेरी का पानी छोड़े जाने की चिंता करने की जरूरत नहीं है। हम अदालत के फैसले की इज्जत करते हैं और तमिलनाडु के लोगों को जल्दबाजी में सुप्रीम कोर्ट का रुख नहीं करना चाहिए। हमें साथ मिलकर दोनों राज्यों के लोगों के हितों को ध्यान में रखकर काम करना होगा। बता दें कि कावेरी नदी का उद्गम कर्नाटक से होता है और यह तमिलनाडु, पुडुचेरी से गुजरते हुए बंगाल की खाड़ी में गिरती है। कावेरी नदी बेसिन 81,155 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और इसका 34,273 वर्ग किलोमीटर इलाका कर्नाटक में पड़ता है। 2866 वर्ग किलोमीटर केरल और बचा हुआ 44,016 वर्ग किलोमीटर तमिलनाडु और पुडुचेरी में है।
विज्ञापन
सूखे से जूझ रहे कर्नाटक के इलाके
इस पर कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने कहा कि 'हमें प्राधिकरण से 10 हजार क्युसेक पानी छोड़ने का निर्देश मिला है। हम जानते हैं कि राज्य में इन दिनों पानी का संकट है और कई इलाके गंभीर रूप से सूखे का सामना कर रहे हैं। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए हमने बीते चार से पांच दिन पानी छोड़ा है। हालांकि हम प्राधिकरण से अपील करते हैं कि वह अपने फैसले पर पुनर्विचार करे क्योंकि इसके चलते कर्नाटक में पीने के पानी की कमी हो सकती है।'
विज्ञापन
विपक्ष ने सरकार पर लगाए आरोप
वहीं इस मुद्दे पर पूर्व सीएम बासवराज बोम्मई ने राज्य की कांग्रेस सरकार को घेर लिया है। बोम्मई ने राज्य सरकार पर किसानों को धोखा देने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार ने प्राधिकरण के सामने सही तरीके से अपना पक्ष नहीं रखा। बोम्मई ने कहा कि 'कांग्रेस सरकार ने किसानों से धोखा किया है, खासकर कावेरी नदी बेसिन के किसानों पर इसका ज्यादा असर पड़ेगा। सरकार ने कावेरी जल प्रबंधन के सामने सही तरीके से अपना पक्ष नहीं रखा। सरकार को सुप्रीम कोर्ट में किसानों के लिए खड़ा होना चाहिए और आत्मसमर्पण करने के बजाय मजबूती से अपना पक्ष रखना चाहिए।'
विज्ञापन
कावेरी नदी के पानी को लेकर है विवाद
इससे पहले सोमवार को डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने कहा था कि तमिलनाडु को कावेरी का पानी छोड़े जाने की चिंता करने की जरूरत नहीं है। हम अदालत के फैसले की इज्जत करते हैं और तमिलनाडु के लोगों को जल्दबाजी में सुप्रीम कोर्ट का रुख नहीं करना चाहिए। हमें साथ मिलकर दोनों राज्यों के लोगों के हितों को ध्यान में रखकर काम करना होगा। बता दें कि कावेरी नदी का उद्गम कर्नाटक से होता है और यह तमिलनाडु, पुडुचेरी से गुजरते हुए बंगाल की खाड़ी में गिरती है। कावेरी नदी बेसिन 81,155 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और इसका 34,273 वर्ग किलोमीटर इलाका कर्नाटक में पड़ता है। 2866 वर्ग किलोमीटर केरल और बचा हुआ 44,016 वर्ग किलोमीटर तमिलनाडु और पुडुचेरी में है।