Tamil Nadu: 'मिचौंग' चक्रवात से प्रभावित हुए एक करोड़ से ज्यादा लोग, CM स्टालिन ने कही ये बात
Tamil Nadu: पिछले तीन दिनों में अधिकांश क्षेत्रों में स्थिति सामान्य हो गई है और कुछ स्थानों पर राहत कार्य जारी है। मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि चक्रवात 'मिचौंग' के कारण पिछले करीब 47 वर्षों में भारी बारिश नहीं हुई और भारी बारिश से एक करोड़ से अधिक लोग प्रभावित हुए।
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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने शुक्रवार को कहा कि मानसून के मौसम से पहले बरसाती पानी की निकासी का काम पूरा हो गया था। जिसके कारण चक्रवात के कारण अभूतपूर्व बारिश के बावजूद बड़े पैमाने तबाही टल गई। उन्होंने बताया कि चक्रवात मिचौंग से प्रभावित चेन्नई और आसपास के इलाकों में ज्यादातर स्थानों पर स्थिति सामान्य हो गई है।
चक्रवात राहत पहले के लिए समाज के सभी वर्गों से समर्थन मांगते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह अपना एक महीने का वेतन दान कर रहे हैं। उनहोंने सभी विधायकों और सांसदों से तमिलनाडु मुख्यमंत्री जन राहत कोषण में इसी तरह योगदान देने का अनुरोध किया और स्वेच्छा से योगदान शुरू करने वालों को धन्यवाद दिया।
एक्स पर एक पोस्ट में स्टालिन ने कहा कि सरकार ने पहले से योजना बनाकर बरसाती पानी की निकासी का काम पूरा कर लिया, जिसके कारण बड़े पैमाने पर तबाही को टाला गया।
तीन दिनों में अधिकांश क्षेत्रों में स्थिति सामान्य हो गई है और कुछ स्थानों पर राहत कार्य जारी है। स्टालिन ने कहा कि चक्रवात 'मिचौंग' के कारण पिछले करीब 47 वर्षों में भारी बारिश नहीं हुई और भारी बारिश से एक करोड़ से अधिक लोग प्रभावित हुए।
नगरपालिका प्रशासन मंत्री केएन नेहरू ने यहां लोगों को राहत सामग्री वितरितकी और उसके बाद कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के लिए पेयजल और अन्य बुनियादी जरूरतें सुनिश्चित की गई हैं। केवल पल्लीकरनई, मुदिचुर, पेरुम्बक्कम, आरके नगर और कोलाथुर के एक हिस्से जैसे कुछ इलाकों में जलभराव जारी रहा। उन्होंने कहा कि ऐसे इलाकों में बारिश के पानी की निकासी के लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं।
इस बीच, बचावकर्मियों ने करीब पांच दिन की मशक्कत के बाद यहां एक निर्माण स्थल पर एक बड़े गड्ढे से दो श्रमिकों के शव निकाले। फाइव फर्लोंग रोड पर गड्ढे से शवों को बाहर निकालने के अभियान में शामिल एनडीआरएफ की विशेषज्ञ टीम के एक सदस्य ने कहा कि गोताखोरों को तैनात करके उन्होंने पहले पता लगाया कि गहराई 60 फीट से अधिक थी, और बारिश के पानी से भरा था।
उन्होंने कहा, अन्य चुनौतियां भी थीं क्योंकि गड्ढा लोहे और अन्य सामग्री से भरा हुआ था। इसके अलावा, निर्माण उद्देश्यों के लिए अनुकूलित कार्गो कंटेनर जलमग्न हो गए थे। मंत्री ने कहा कि इस तरह की चुनौतियों का सामना करते हुए दोनों शवों को आखिरकार शुक्रवार को बाहर लाया गया। तमिलनाडु राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, तमिलनाडु पुलिस, अग्निशमन और बचाव सेवा भी अभियान में शामिल थे।