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कैट ने सही ठहराया मोदी सरकार का नाकारा अधिकारियों की सेवानिवृत्ति का फैसला

Thu, 17 Dec 2020 04:22 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Thu, 17 Dec 2020 04:22 AM IST
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CAT justifies Modi government decision to Retirement of Incompetent officers
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

कैट ने केंद्र सरकार के उस बोल्ड कदम को सही और वैध बताया है, जिसमें पिछले साल कर प्रबंधन से जुड़े नाकारा आला अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई थी। इसके साथ ही कैट ने इस निर्णय के खिलाफ दाखिल तत्कालीन आयकर आयुक्त प्रमोद कुमार बजाज की याचिका को भी खारिज कर दिया। बजाज उन 85 अधिकारियों में से एक थे, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने केंद्रीय सेवा के आधारभूत नियम 56(जे) के तहत अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी थी।

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केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की जस्टिस एल नरसिम्हा रेड्डी की अध्यक्षता वाली प्रधान पीठ ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये अपना फैसला सुनाया। जस्टिस रेड्डी के अलावा सदस्य के तौर पर आराधना जौहरी की मौजूदगी वाली पीठ ने कहा, हम इस याचिका पर सुनवाई का कोई कारण नहीं तलाश पा रहे हैं और इसे खारिज कर रहे हैं।
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प्रधान पीठ ने कहा, हम सरकार के इस तर्क से सहमत हैं कि 56 (जे) को लागू करने के लिए पारित आदेश में हस्तक्षेप का दायरा बहुत सीमित है। पीठ ने शिकायतकर्ता पीके बजाज के सामने उन्हें लेकर कठोर टिप्पणी करते हुए कहा कि याची का रिकॉर्ड खुद ही सबकुछ बताता है और उसे ज्यादा समय तक सेवा में जारी रखना विभाग के हित में नहीं था, क्योंकि याची की न केवल निजी जिंदगी असाधारण थी, बल्कि विभाग की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचा रही थी। ऐसी स्थिति में, जिसे याची ने खुद ही अपने लिए तय किया था, सरकार और सीबीडीटी के सामने नियम 56 (जे) को छोड़कर कोई अन्य विकल्प शेष नहीं है।
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बता दें कि आधारभूत नियम 56 (जे) के तहत किसी भी केंद्रीय सेवा में कार्यरत अधिकारी को नौकरी से समय से पहले ही सेवानिवृत्त किया जा सकता है। प्रधान पीठ ने अपने फैसले में इस तथ्य का भी संज्ञान लिया कि आयकर विभाग ने 2019 में एक व्यापक अभियान के जरिये उन अधिकारियों की पहचान कराई थी, जिनका पद पर बने रहना जनहित में नहीं थी। पीठ ने कहा, इस दौरान चिह्नित किए गए 15 अधिकारियों में बजाज का नाम भी शामिल था। पीठ ने केंद्र सरकार बनाम दुलाल दत्त (1993) मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला भी दिया।


भ्रष्टाचार से लेकर अय्याशी तक के आरोप थे बजाज पर
पीके बजाज पर भ्रष्टाचार से लेकर अय्याशी तक के आरोप थे। उनकी पूर्व पत्नी सपना ने उन पर बिना तलाक लिए रेणु और फिर राखी के साथ विवाह करने का आरोप लगाया था। साथ ही बजाज के आय से अधिक संपत्ति जुटाने के भी सबूत सामने आए थे। बजाज ने दिल्ली के अशोक विहार में एक फ्लैट खरीदा था, जिसे मुआवजे के तौर पर बाद में अपनी पत्नी को सौंप दिया था। लेकिन इसकी सूचना नियमों के तहत विभाग को नहीं दी थी।

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