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Caste Census: टैक्स देने वालों की हो जातिगत जनगणना, दिल्ली में बड़े प्रदर्शन की तैयारी
Wed, 11 Sep 2024 08:58 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Wed, 11 Sep 2024 08:58 PM IST
सार
कांग्रेस की अगुवाई में विपक्ष लगातार देश में जातिगत जनगणना कराने की मांग कर रहा है। उसका कहना है कि देश के संसाधनों का उचित बटवारा करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के पास उनकी जनता का जातिगत आंकड़ा होना चाहिए जिससे वह लोगों के विकास के लिए सही योजनाएं बना सके।
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टैक्स दाताओं की जातिगत जनगणना की मांग।
- फोटो : freepik
विस्तार
व्यापारी संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने टैक्स देने वालों की जातिगत जनगणना कराने की मांग की है। इस मांग को लेकर गुरुवार 12 सितंबर को देश की राजधानी दिल्ली में बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया गया है। संगठन का कहना है कि जो लोग टैक्स देते हैं, एक मायने में वे देश की सेवा करते हैं। ऐसे में जिस जाति के लोग जितना ज्यादा टैक्स देते हैं, उन्हें उतनी ही अधिक सुविधाएं देकर प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। सीटीआई का मानना है कि जातिगत जनगणना कराकर ऐसे लोगों को हतोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए जो दिन-रात अपने कार्य-व्यापार या नौकरी के माध्यम से देश के विकास के लिए काम कर रहे हैं। सीटीआई ने इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों से शामिल होने का आह्वान किया है।
दरअसल, कांग्रेस की अगुवाई में विपक्ष लगातार देश में जातिगत जनगणना कराने की मांग कर रहा है। उसका कहना है कि देश के संसाधनों का उचित बटवारा करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के पास उनकी जनता का जातिगत आंकड़ा होना चाहिए जिससे वह लोगों के विकास के लिए सही योजनाएं बना सके। लेकिन अनेक लोग देश में जातिगत जनगणना करने का विरोध भी कर रहे हैं। ऐसे लोगों का कहना है कि इससे हिंदू समाज को जातियों में बंट जाएगा जिससे देश और समाज कमजोर होगा। ऐसे लोगों का कहना है कि जातिगत जनगणना नहीं होनी चाहिए।
टैक्स देने वालों की हो जनगणना
सीटीआई के अध्यक्ष बृजेश गोयल ने अमर उजाला से कहा कि यह पता लगाना चाहिए कि टैक्स देने वालों में किस जाति की हिस्सेदारी कितनी है। टैक्स के माध्यम से ही देश का विकास होता है। देश के विकास, कार्यों मूलभूत ढांचा गत निर्माण और लोगों को शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकार को टैक्स के माध्यम से ही पैसा मिलता है। ऐसे में जो लोग टैक्स देते हैं वे सही मायने में देश की सेवा भी कर रहे होते हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग/व्यापारी टैक्स देते हैं, सरकार को उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए। इस मुद्दे की मांग को लेकर वे 12 सितंबर को बड़ा प्रदर्शन कर रहे हैं।
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दरअसल, कांग्रेस की अगुवाई में विपक्ष लगातार देश में जातिगत जनगणना कराने की मांग कर रहा है। उसका कहना है कि देश के संसाधनों का उचित बटवारा करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के पास उनकी जनता का जातिगत आंकड़ा होना चाहिए जिससे वह लोगों के विकास के लिए सही योजनाएं बना सके। लेकिन अनेक लोग देश में जातिगत जनगणना करने का विरोध भी कर रहे हैं। ऐसे लोगों का कहना है कि इससे हिंदू समाज को जातियों में बंट जाएगा जिससे देश और समाज कमजोर होगा। ऐसे लोगों का कहना है कि जातिगत जनगणना नहीं होनी चाहिए।
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टैक्स देने वालों की हो जनगणना
सीटीआई के अध्यक्ष बृजेश गोयल ने अमर उजाला से कहा कि यह पता लगाना चाहिए कि टैक्स देने वालों में किस जाति की हिस्सेदारी कितनी है। टैक्स के माध्यम से ही देश का विकास होता है। देश के विकास, कार्यों मूलभूत ढांचा गत निर्माण और लोगों को शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकार को टैक्स के माध्यम से ही पैसा मिलता है। ऐसे में जो लोग टैक्स देते हैं वे सही मायने में देश की सेवा भी कर रहे होते हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग/व्यापारी टैक्स देते हैं, सरकार को उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए। इस मुद्दे की मांग को लेकर वे 12 सितंबर को बड़ा प्रदर्शन कर रहे हैं।
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