नोटबंदी: डिजिटल भुगतान की बजाए कारोबारियों का नकद भुगतान पर जोर
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चार्टर्ड एकाउंटेंट हिमांशु कुमार ने बताया कि नोटबंदी के दौरान नवंबर व दिसंबर में जिस किसी दुकान में डिजिटल भुगतान की सुविधा थी, उनकी सफेद (व्हाइट) बिक्री में तेज उछाल दर्ज किया गया। अब चालू वित्त वर्ष 2016-17 की अंतिम तिमाही चल रही है, इसलिए ऐसे दुकानदार अपनी सालाना औसतन बिक्री को कम करने में लग गए हैं।
कुमार ने बताया कि दुकानदार अगर ऐसा नहीं करेंगे तो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले उनकी बिक्री काफी बढ़ी हुई दिखेगी, जिससे उन्हें आयकर भी अधिक देना होगा और वैट भुगतान पर भी असर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि अगर अगले वित्त वर्ष में ये दुकानदार कम बिक्री दिखाएंगे तो टैक्स विभाग उन्हें तलब कर सकता है। इसलिए दुकानदार नहीं चाहते हैं कि उनकी सालाना बिक्री (सफेद में) का औसत काफी अधिक दिखे क्योंकि चालू वित्त वर्ष की पहली व दूसरी तिमाही में उनकी बिक्री तीसरी तिमाही के मुकाबले काफी कम दिखेगी।
तीसरी तिमाही में बिक्री बढ़ने पर कर विभाग कर सकता है सवाल
तीसरी तिमाही में बिक्री बढ़ने पर कर विभाग कर सकता है सवाल
कर विशेषज्ञों का कहना है कि इन दुकानदारों को इस बात का डर तो सता ही रहा है कि कर विभाग उनसे यह पूछ सकता है कि तीसरी तिमाही में उनकी बिक्री अचानक कैसे बढ़ गई। पिछले सप्ताह कनॉट प्लेस की दुकान में गारमेंट खरीदारी करने गए सुबोध पाठक ने बताया कि खरीदारी के बाद दुकानदार ने उनसे नकद में भुगतान करने की गुजारिश की। हालांकि पाठक की तरफ से सामान वापस करने की बात करने पर दुकानदार ने डिजिटल भुगतान स्वीकार किया।
नोटबंदी से पहले नकद में हो रही थी 95 फीसदी बिक्री
कर विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले साल 8 नवंबर को नोटबंदी की घोषणा से पहले 95 फीसदी से अधिक बिक्री नकद में चल रही थी। ऐसे में दुकानदार अपने मुताबिक अपनी सफेद बिक्री दिखाता था। लेकिन डिजिटल भुगतान लेने पर वह अपनी सफेद बिक्री में घालमेल नहीं कर सकता है। इससे बचने के लिए ये सारे उपाय किए जा रहे हैं।