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मक्का मस्जिद से मालेगांव तक, वो मामले जिन्हें लेकर साध्वी प्रज्ञा पर लगे आरोप

Wed, 17 Apr 2019 02:28 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Priyesh Mishra Updated Wed, 17 Apr 2019 02:28 PM IST
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Cases against sadhvi pragya singh thakur, Makka to Malegaon
sadhvi pragya
लोकसभा चुनाव 2019 में भोपाल संसदीय सीट से साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवार घोषित कर सकती है। इनके सामने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह मैदान में हैं। साध्वी प्रज्ञा का नाम कई विवादों में भी शामिल रहा है। यहां जानिए उसे जुड़े मामलों के बारे में-
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मक्का मस्जिद धमाका

18 मई, 2007 को हैदराबाद के चार मीनार इलाके के पास स्थित मस्जिद के वजुखाने में हुआ था जिसमें 9 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 58 लोग घायल हुए थे। प्राथमिक जांच में इस धमाके में आतंकी संगठन हरकत उल जमात-ए-इस्लामी यानी हूजी पर शक जताया गया था। तीन साल बाद साल 2010 में पुलिस ने अभिनव भारत नामक संगठन से जुड़े स्वामी असीमानंद को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा इस संगठन के सदस्य लोकेश शर्मा, देवेंद्र गुप्ता और संघ से जुड़ी साध्वी प्रज्ञा को अभियुक्त बनाया गया था। कोर्ट ने बाद में सबूतों के अभाव में सभी को बरी कर दिया था।
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सुनील जोशी की हत्या

Cases against sadhvi pragya singh thakur, Makka to Malegaon
साध्वी प्रज्ञा - फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के प्रचारक सुनील जोशी की हत्याकांड की जांच 2011 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंपी गई थी। आरएसएस प्रचारक सुनील जोशी की हत्या मध्यप्रदेश के देवास में 29 दिसंबर 2009 को की गई थी।

इस मामले में साध्वी प्रज्ञा, हर्षद सोलंकी, रामचरण पटेल, वासुदेव परमार, आनंदराज कटारिया, लोकेश शर्मा, राजेंद्र चौधरी और जितेंद्र शर्मा को आरोपी बनाया गया था। इस मामले में फरवरी 2017 में देवास के तत्कालीन एडीजे राजीव कुमार आप्टे की कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा सहित आठ अभियुक्तों को बरी कर दिया था।

2008 मालेगांव में दूसरा विस्फोट

Cases against sadhvi pragya singh thakur, Makka to Malegaon
साध्वी प्रज्ञा - फोटो : SELF
रमजान के दौरान मालेगांव के अंजुमन चौक और भीखू चौक पर 29 सितंबर 2008 को सिलसिलेवार बम धमाके हुए जिसमें छह लोगों की मौत हुई जबकि 101 लोग घायल हुए थे। इन धमाकों की शुरुआती जांच महाराष्ट्र एटीएस ने की थी। उनके अनुसार धमाकों में एक मोटरसाइकिल प्रयोग की गई थी जिसके बारे में ये खबर आई थी कि वो मोटरसाइकिल साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के नाम पर थी।

इस मामले में साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित समेत सात अन्य लोग अभियुक्त बनाए गए थे। बाद में इस जांच को भी महाराष्ट्र एटीएस से एनआईए ने अपने पास ले लिया था।

13 मई 2016 को एनआईए ने एक नई चार्जशीट में रमेश शिवाजी उपाध्याय, समीर शरद कुलकर्णी, अजय राहिरकर, राकेश धावड़े, जगदीश महात्रे, कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित, सुधाकर द्विवेदी उर्फ स्वामी दयानंद पांडे सुधाकर चतुर्वेदी, रामचंद्र कालसांगरा और संदीप डांगे के खिलाफ पुख्ता सबूत होने का दावा किया।

इसके अलावा साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, शिव नारायण कालसांगरा, श्याम भवरलाल साहू, प्रवीण टक्कलकी, लोकेश शर्मा, धानसिंह चौधरी के खिलाफ मुकदमा चलाने लायक सबूत नहीं होने की बात कही गई।

दिसंबर 2017 में मालेगांव ब्लास्ट मामले में साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित पर से मकोका (महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून) हटा लिया गया है। हालांकि यह केस अभी भी चल रहा है।
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