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बंगलूरू: अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय में ABVP के विरोध के बाद केस दर्ज, सोशल मीडिया पोस्ट से उपजा विवाद

Thu, 26 Feb 2026 03:43 PM IST
Rahul Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू। Published by: Rahul Kumar Updated Thu, 26 Feb 2026 03:43 PM IST
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Case filed after ABVP protests at Azim Premji University Bengaluru , controversy stems from social media posts
अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय में विरोध प्रदर्शन। - फोटो : आईएनएस

बंगलूरू स्थित अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय में सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट के बाद शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। एबीवीपी कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन के बाद विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार की शिकायत पर सरजापुर पुलिस ने इंस्टाग्राम पेज "स्पार्क रीडिंग सर्कल" के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

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क्या है विवाद?
यह विरोध प्रदर्शन स्पार्क रीडिंग सर्कल नामक एक इंस्टाग्राम अकाउंट द्वारा कथित तौर पर साझा किए गए एक सोशल मीडिया पोस्ट के विरोध में शुरू हुआ, जिसमें दावा किया गया था कि कुनान-पोशपोरा घटना पर "प्री-कश्मीर" शीर्षक के तहत परिसर में चर्चा आयोजित की जाएगी।
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विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ऋषिकेश ने पुलिस को दी शिकायत में कहा है कि इंस्टाग्राम पेज "स्पार्क रीडिंग सर्कल" के पोस्ट ने संस्थान की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया और भ्रम पैदा किया। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया था और उसका सोशल मीडिया अकाउंट से कोई संबंध नहीं है।
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वहीं, सरजापुर पुलिस ने कहा कि पोस्ट से लोगों की भावनाएं आहत हुईं, जिसके बाद कार्यकर्ता परिसर में घुस गए और हंगामा किया। शिकायत के आधार पर स्पार्क रीडिंग सर्कल के इंस्टाग्राम अकाउंट के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और आगे की जांच जारी है।

एबीवीपी ने लगाए आरोप
वहीं, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने कहा कि प्रशासनिक अनुमति के बिना परिसर में किसी कार्यक्रम का आयोजन करना विश्वविद्यालय के प्रोटोकॉल का उल्लंघन हो सकता है, हालांकि छात्र परिषद का मानना है कि ऐसे उल्लंघन का समाधान एफआईआर के बजाय विश्वविद्यालय की आंतरिक प्रक्रियाओं, जैसे अनुशासनात्मक समिति के माध्यम से करना बेहतर है। परिसर में अनधिकृत रूप से प्रवेश करने वाले, हमारे समुदाय के सदस्यों को शारीरिक नुकसान पहुंचाने वाले और विश्वविद्यालय की संपत्ति को क्षति पहुंचाने वाले लोगों को जमानत दे दी गई है और उन पर जमानती आरोप लगाए गए हैं।


जबकि जिन छात्रों ने शांतिपूर्ण सभा का आयोजन किया, अब उन पर धारा 299 के तहत गैर-जमानती अपराध का आरोप लगाया गया है। विश्वविद्यालय की शिक्षा इतिहास, राजनीति और सामाजिक न्याय के साथ गहन चिंतन को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करती है। हमें कठिन प्रश्न पूछना सिखाया जाता है और हमने विश्वविद्यालय को खुली चर्चाओं के लिए एक सुरक्षित स्थान माना है। ठीक ऐसा करने पर प्रशासन द्वारा छात्रों के खिलाफ आपराधिक एफआईआर दर्ज करना उस बौद्धिक स्वतंत्रता को ही कमजोर करता है, जिस पर यह संस्था स्थापित है। हम प्रशासन से विनम्रतापूर्वक अनुरोध करते हैं कि छात्रों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करने के अपने निर्णय पर पुनर्विचार करे।

(इनपुट: आईएएनएस)

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