शहीद भगत सिंह मामला: डीयू के वीसी-जेएनयू के तीन प्रोफेसरों पर केस दर्ज
- डीयू में इतिहास के पाठ्यक्रम में शामिल एक पुस्तक में है जिक्र
- भगत सिंह के परिजनों ने कुलपति से मुलाकात कर जताई आपत्ति
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शहीद भगत सिंह को एक पुस्तक में आतंकी लिखे जाने पर डीयू के वाइस चांसलर और तीन प्रोफेसरों के खिलाफ केस दर्ज कराया गया है। यह मामला कानपुर में दर्ज करवारा गया है। गौरतलब है कि दिल्ली विश्वविद्यालय में इतिहास के पाठ्यक्रम में शामिल एक पुस्तक में भगत सिंह को क्रांतिकारी आतंकवादी बताया गया है।
भगत सिंह के परिजनों ने इस पर आपत्ति जताते हुए इस मामले को डीयू के समक्ष उठाया है। बुधवार को परिजनों ने डीयू कुलपति प्रो. योगेश त्यागी से भी मुलाकात की। कुलपति ने इस मामले की स्टडी करने का आश्वासन दिया है।
उल्लेखनीय है कि इतिहासकार बिपिन चंद्रा और मृदुला मुखर्जी द्वारा स्वतंत्रता के लिए भारत का संघर्ष शीर्षक से लिखी इस पुस्तक में भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सूर्य सेन और अन्य को क्रांतिकारी आतंकवादी बताया गया है।
स्मृति ईरानी को पत्र लिखकर पुस्तक में बदलाव करने की मांग
इस मामले को लेकर भगत सिंह के परिजन मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने और पुस्तक में बदलाव करने की मांग कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि पुस्तक में चटगांव आंदोलन को भी आतंकी कृत्य व सैंडर्स की हत्या को आतंकी कार्रवाई कहा गया है।
कुलपति प्रो. त्यागी ने बताया कि भगत सिंह के परिजनों ने उनसे बुधवार को मुलाकात कर आपत्ति दर्ज की है। उन्होंने संज्ञान में ले लिया है। यह एक पुरानी किताब है जो कि नोटिस में अब आई है। दरअसल, इतिहास विभाग में इस पुस्तक को एक संदर्भ पुस्तक के तौर पर पढ़ाया जाता है न कि बतौर टेक्सट बुक।
उल्लेखनीय है कि परिजनों को आपत्ति इस बात पर है कि देश की आजादी के लिए जीवन का बलिदान करने वाले क्रांतिकारी के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है। गौरतलब है कि यह मामला संसद में भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर द्वारा उठाए जाने के बाद गर्माया हुआ है।