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राम रहीम के राजदार रंजीत की अंतिम यात्रा के बाद मिठाई लेकर पहुंचे थे डेरे के लोग

Tue, 29 Aug 2017 04:58 PM IST
amarujala.com: राजेश शांडिल्य
amarujala.com: राजेश शांडिल्य Updated Tue, 29 Aug 2017 04:58 PM IST
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case against dera, ram rahim supporters murdered ranjit singh
- फोटो : social media

साल 2002 गांव खानपुर कौलियां में क्षणभर पहले अपने इकलौते पुत्र रणजीत सिंह का अंतिम संस्कार कर घर पहुंचे पिता को डेरा प्रमुख मिष्ठान भिजवाया था। यही हरकत डेरा प्रमुख की भूमिका को संदेह के घेरे में लाने में मददगार साबित हुई। तब यह सवाल रणजीत सिंह हत्याकांड के बाद पीड़ित परिवार को सांत्वना देने आए लोगों के जेहन में कौंधा था।

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बता दें कि मिष्ठान वितरण से कुछ ही क्षण पहले परिजन, रिश्तेदार और आसपास क्षेत्र के लोग 11 जुलाई 2002 को रणजीत सिंह के अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे। इसके बाद सरपंच जोगिंद्र सिंह के घर में ढांढस बंधाने के लिए बैठे थे। इनमें कुछेक डेरा सच्चा सौदा के सदस्य भी थे। रणजीत के जीजा प्रभुदयाल के मुताबिक हद उस समय हो गई, जब दो गाड़ियां उनके ससुर जोगिंद्र सिंह की कोठी के बाहर आकर रुकीं। इन कारों से उतरे लोग डेरा सच्चा सौदा सिरसा से भेजे गए थे। इनके पास काफी मात्रा में गुलदाना (मिष्ठान) था।
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इन लोगों ने बताया कि पिताजी (डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम) ने रणजीत की आत्मिक शांति के लिए यह प्रसाद भेजा है। इसके बाद यहां बैठे लोगों को डेरे के सदस्यों ने यह मिष्ठान वहां पहले से बैठे स्थानीय डेरा सच्चा सौदा के सदस्यों को देना शुरू किया। यह दृश्य परिवार, रिश्तेदार और गांव को लोग हैरान करने वाला था। इससे एक दिन पहले ही सरपंच जोगिंद्र सिंह के इकलौते जवान पुत्र रणजीत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

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हत्या के बाद डेरा प्रमुख ने भेजी थी मिठाई

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परिवार, रिश्तेदार और गांव के किसी भी व्यक्ति ने इसे हाथ में नहीं लिया और लोग भड़क गए। सभी ने धिक्कार देते हुए कड़ा रुख अपनाया तो डेरे के लोग मौके की नजाकत को समझते हुए भाग खड़े हुए थे। रणजीत के साले एवं रोहतक मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन जसबीर हुड्डा किलोई ने अमर उजाला को बताया कि वह गुलदाना रणजीत की आत्मिक शांति के लिए नहीं,बल्कि हत्या के बाद डेरा प्रमुख की खुशी को जाहिर करने के लिए भेजा गया था।

रणजीत के परिजनों के मुताबिक डेरा प्रमुख को सजा मिली है, उनके लिए यह दिन विशेष है। डेरा प्रमुख के गुनाहों की गिनती अब शुरू हो चुकी है। जल्द ही रणजीत हत्याकांड में डेरा प्रमुख को कड़ी सजा मिलेगी, यह उन्हें पूरी उम्मीद है।

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत सिंह राम रहीम को साध्वी यौन उत्पीड़न केस में 10 की सजा मिलने के बाद स्व.रणजीत के चचेरे भाई मिलखी राम बोले, काश! उनके ताऊ जी आज जीवित होते तो बेहद खुश होते। उन्होंने कहा कि उनके ताऊ जोगिंद्र सिंह ने रणजीत हत्याकांड में डेरा प्रमुख को सजा दिलाने के लिए 14 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी थी,लेकिन जुलाई 2016 में उनका स्वर्गवास हो गया। उन्होंने कहा कि रणजीत का परिवार,रिश्तेदार और गांव के लोग चाहते हैं कि डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख को रणजीत हत्याकांड और पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में कड़ी से कड़ी सजा मिले।

इस तरह हुआ शक 

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खेत में मजदूरों का खाना लेकर जाते समय 10 जुलाई 2002 को चार गोलियां मारकर रणजीत सिंह की हत्या की गई। तबसे लेकर पोस्टमार्टम तक किसी को अंदाजा भी नहीं था कि इस हत्या के पीछे किसका हाथ है।

रणजीत के जीजा प्रभुदयाल बताते हैं कि रणजीत सिंह ने अपने घर और परिवार के किसी सदस्य को कभी भी यह नहीं बताया था कि उसने डेरे से दूरी क्यों अपनाई? परिवार के सदस्य बस इतना जानते थे कि रणजीत अब डेरे में नहीं जाता। अंतिम संस्कार रणजीत की मौत के छठे दिन जब उसकी अलमारी को खंगाला गया तो ऐसे कई दस्तावेज मिले,जिनसे परिवार को ये जानकारी मिली कि डेरे में रणजीत सिंह ने 50 लाख से ज्यादा की रकम दी हुई है।

उन्होंने बताया कि जब रणजीत की जब हत्या हुई उस समय 60 एकड़ जमीन के इकलौते मालिक रणजीत सिंह कर्जदार थे। डेरे से संबंधित कागज मिलने और ऐसे कई तथ्य सामने आने के बाद ही रणजीत की हत्या का शक डेरे पर गया था। दरअसल, डेरे की गतिविधियों के खिलाफ पीएमओ को भेजी गई चिट्ठी का शक रणजीत सिंह पर था। बाद में इस मामले की जांच के खुलने के बाद गुरमीतराम रहीम के निजी सुरक्षा कर्मी सहित दो लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। बता दें कि रणजीत हत्याकांड में मुख्य आरोपी डेरा प्रमुख हैं।

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