CAPF: 11 लाख जवानों को नहीं मिली 100 दिन की छुट्टी, पेंशन बंद तो कैंटीन पर है GST, अब ऐसे घिरेगी सरकार!
CAPF: कॉन्फेडरेशन के चेयरमैन एवं पूर्व एडीजी एचआर सिंह ने कहा, अर्धसैनिक बलों की मांगों को लेकर केंद्र एवं राज्य सरकारों की अनदेखी के खिलाफ 14 फरवरी 2023 को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन किया जाएगा...
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केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के 11 लाख जवानों को तीन साल बाद भी '100' दिन की छुट्टी नहीं मिल पा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2019 में यह घोषणा की थी कि अर्धसैनिक बलों के जवानों को एक साल में सौ दिन की छुट्टी मिलेगी। मतलब, इस योजना के लागू होने के बाद कोई भी जवान 100 दिन अपने परिवार के साथ व्यतीत कर सकता है। कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स मार्टियर्स वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय सेमिनार में इस मुद्दे पर चर्चा की गई। पूर्व अर्धसैनिकों ने इस मुद्दे को जवानों के साथ एक छलावा बताया है। 100 दिन की छुट्टी, ये घोषणा अब एक जुमला बन कर रह गई है। पुरानी पेंशन, सीपीसी कैंटीन पर 50 फीसदी छूट देना और झंडा दिवस जैसे दर्जनभर मुद्दों को लेकर एसोसिएशन, केंद्र सरकार को घेरेगी। अपनी मांगों के समर्थन में एसोसिएशन द्वारा 'पुलवामा डे' यानी 14 फरवरी 2023 को जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
अर्धसैनिकों की मांग पर गंभीर नहीं केंद्र सरकार
कॉन्फेडरेशन के चेयरमैन एवं पूर्व एडीजी एचआर सिंह ने कहा, अर्धसैनिक बलों की मांगों को लेकर केंद्र एवं राज्य सरकारों के साथ बातचीत की गई है। जवानों एवं उनके परिवार के हितों के लिए विभिन्न स्तरों पर ज्ञापन सौंपे गए। केंद्र सरकार, अर्धसैनिकों की मांगों को लेकर गंभीर नहीं है। लंबे समय से चली आ रही इन मांगों के प्रति केंद्र की अनदेखी के खिलाफ 14 फरवरी 2023 को जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन किया जाएगा। सरकारें आती-जाती रहीं, मगर किसी ने भी अर्धसैनिक बलों की तरफ ध्यान नहीं दिया। पूर्व कार्मिकों व शहीद परिवारों की मांगों की बराबर अनदेखी होती रही। 12 सितंबर को कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आयोजित सेमिनार में हरियाणा, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़, मध्यप्रदेश, राजस्थान, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, दिल्ली व अन्य प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सेमिनार के बाद प्रधानमंत्री मोदी व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नाम साउथ एवं नॉर्थ ब्लॉक कार्यालयों में ज्ञापन सौंपा गया।
एक राज्य को छोड़, कहीं नहीं हुआ बोर्ड का गठन
एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने कहा, हरियाणा को छोड़ कर किसी भी राज्य सरकार ने अर्धसैनिक कल्याण बोर्ड का गठन नहीं किया है। तकरीबन सभी राज्यों को इस बाबत मांग पत्र सौंपा गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 23 नवंबर 2012 का वह आदेश भी लागू नहीं किया जा रहा, जिसमें एक्स सीएपीएफ कार्मिकों को एक्स सर्विसमैन के समकक्ष दर्जा देने के लिए दिशानिर्देश जारी किए गए थे। आयुष्मान स्वास्थ्य योजना में पूर्व अर्धसैनिकों को बाहर रखना बेमानी है। गृह मंत्रालय का जवानों को 100 दिनों की छुट्टी देना, अब एक जुमला साबित हो रहा है। बल की विधवाओं, वीरांगनाओं, शहीद परिवारों एवं रिटायर्ड अर्द्धसैनिकों के लिए झंडा दिवस कोष की स्थापना का मामला भी लंबित है। केंद्रीय गृह सचिव, द्वारा इसके गठन का भरोसा दिलाया गया था।
सरदार पटेल के नाम पर अर्धसैनिक स्कूलों की मांग अधूरी
बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए जिला स्तर पर सीजीएचएस डिस्पेंसरियों का विस्तार करने की मांग की गई थी, लेकिन वह भी लंबित है। सेमिनार में सरदार पटेल के नाम पर राज्यों की राजधानियों में अर्धसैनिक स्कूलों की स्थापना, इस मांग को एक स्वर से दोहराया गया। इन बलों की सीपीसी कैंटीन मार्केट रेट पर आ गई है, उसे 50 फीसदी जीएसटी में छूट देने की मांग रखी गई थी, उसे भी पूरा नहीं किया गया। अगर सरकार इस मांग को पूरा कर देती तो 33 लाख पैरामिलिट्री परिवारों को घरेलू सामान बाजार भाव से सस्ता मिल सकता था। जवानों के लिए पुरानी पेंशन बहाली, वन रैंक वन पेंशन व अधिकारियों को ऑर्गेनाइज्ड सर्विस के लाभ देने जैसे मुद्दों पर केंद्रीय गृह मंत्री से मांग की गई है कि वे इन पर तत्परता से विचार कर उन्हें अविलंब लागू करें। कल्याण एवं पुनर्वास के नाम पर बने वार्ब को तुरंत प्रभाव से पुनर्गठित कर श्वेत पत्र जारी किया जाए।
राजनीतिक पार्टी बनाने का प्रस्ताव हुआ पेश
एसोसिएशन के तेलंगाना प्रदेश के अध्यक्ष बी. साइदेय्या गौड़ द्वारा पूर्व अर्धसैनिकों को अलग से राजनीतिक पार्टी बनाने का प्रस्ताव सेमिनार में पेश किया गया। साइदेय्या का कहना था, जब तक हमारे पूर्व अर्धसैनिक विधानसभा व लोकसभा में नहीं पहुंचेंगे, तब तक हमारा भला होने वाला नहीं है। मध्यप्रदेश इकाई के अध्यक्ष जयेंद्र सिंह राणा ने उत्तराखण्ड की तर्ज पर सभी राज्यों में अर्धसैनिक हेल्प डेस्क बनाने पर बल दिया। कॉर्डिनेटर तारादत्त शर्मा ने कहा, हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड के पहाड़ी एवं दुर्गम इलाकों में रहने वाले हजारों पैरा मिलिट्री परिवारों के लिए जिला स्तर पर सीजीएचएस डिस्पेंसरियां वेलनेस सेंटर खोले जाने की मांग की है। सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए केरल के एएम मोहम्मद 'रिटायर्ड आईजी' ने कहा, यह देश की अकेली ऐसी कॉन्फेडरेशन है, जो शहीद परिवारों की भलाई से संबंधित मुद्दों को केंद्र एवं राज्यों की सरकारों तक पहुंचा रही है।