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शहादत की अनदेखी: शहीद होने वाले अर्धसैनिक बलों के जवानों को क्यों नहीं मिल पा रही एक करोड़ रुपये की सम्मान राशि

Wed, 25 Aug 2021 05:54 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 25 Aug 2021 05:54 PM IST
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सार
कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह बताते हैं कि सीएपीएफ का जवान जब अपने कर्तव्य की राह पर शहीद हो जाता है तो उसके निकटतम संबंधियों को बतौर केंद्रीय अनुग्रह 35 लाख रुपये की एकमुश्त क्षतिपूर्ति राशि मिलती है। दूसरी तरफ ओलंपिक में मेडल जीतने वाले खिलाड़ी को चार से छह करोड़ की सम्मान राशि दी जा रही है...
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CAPF martyrs family are not getting the honor amount of one crore rupees
शहीद की अंत्येष्टि - फोटो : अमर उजाला (प्रतीकात्मक तस्वीर)

विस्तार

केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के वे जवान, जो किसी आतंकी या नक्सल ऑपरेशन के दौरान शहीद हो जाते हैं, उन्हें केंद्र सरकार की तरफ से एक करोड़ रुपये की सम्मान राशि देने बाबत कोई निर्णय नहीं लिया गया है। कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा इस बाबत राष्ट्रपति और पीएमओ से लेकर विभिन्न केंद्रीय मंत्रियों के यहां गुहार लगाई गई है। मंगलवार को एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुइया उइके से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा है। राज्यपाल ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि इस पर वे राज्य सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय से बातचीत करेंगी।



एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह बताते हैं कि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवान दुश्मनों से लड़कर देश के गौरव की रक्षा करते हैं, राष्ट्र का सम्मान बढ़ाते हैं। ये अलग बात है कि सीएपीएफ का जवान जब अपने कर्तव्य की राह पर शहीद हो जाता है तो उसके निकटतम संबंधियों को बतौर केंद्रीय अनुग्रह 35 लाख रुपये की एकमुश्त क्षतिपूर्ति राशि मिलती है। दूसरी तरफ एक खिलाड़ी जब देश के लिए पदक लाता है तो उसे करोड़ों रुपये मिल जाते हैं। सरकार जानबूझकर सम्मान राशि में बढ़ोतरी नहीं कर रही है। इससे सीएपीएफ जवानों में रोष व्याप्त है।


महासचिव रणबीर सिंह, प्रमोद कुमार शुक्ला, सुमित वर्मा, भुवन सिंह व जग सिंह ने राज्यपाल अनुसुइया उइके को बताया कि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवानों को पुरानी पेंशन व्यवस्था से भी बाहर कर दिया गया है। इन बलों में 2004 से पेंशन बंद है। डेढ़-दो दशक से चले आ रहे नक्सलवाद के कारण सैकड़ों पैरामिलिट्री जवान, स्थानीय पुलिस फोर्स के जवान व आम नागरिक शहीद हो गए हैं। छत्तीसगढ़ पुलिस और डीआरजी के जवान भी नक्सली हमलों में शहीद होते हैं। उनके कल्याण के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवान आतंकियों और नक्सलियों से लड़ने के अलावा सीमा की चौकसी भी करते हैं। परमाणु ऊर्जा संयंत्रों, बंदरगाहों, हवाई अड्डों, संसद भवन की सुरक्षा के अलावा वीआईपी सुरक्षा और निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी भी इन्हीं बलों को सौंपी जाती है। देश में अचानक आने वाली प्राकृतिक विपदाओं में आम जान-माल की सुरक्षा के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवान सदैव आगे रहते हैं।

इन बलों के सेवारत और सेवानिवृत कर्मियों के कल्याण को लेकर सरकार गंभीर नहीं है। केंद्र सरकार और राज्य सरकारों से आग्रह किया गया है कि इन बलों के लिए अर्धसैनिक कल्याण बोर्ड की स्थापना की जाए। इससे जवानों की विधवाओं, वीरांगनाओं, शहीद परिवारों एवं सेवानिवृत जवानों की वित्तीय दिक्कतों का हल और पुनर्वास एवं कल्याणकारी योजनाएं त्वरित गति से लागू की जा सकेंगी। शहीद परिवारों को मिलने वाली सम्मान राशि को बढ़ाकर एक करोड़ रुपये किए जाने की मांग की गई है। इससे उन शहीद जवानों के बच्चों को बेहतर शिक्षा-स्वास्थ्य एवं पुनर्वास में मदद मिल सकेगी।

रणबीर सिंह के मुताबिक, ओलंपिक में मेडल जीतने वाले खिलाड़ी को चार से छह करोड़ की सम्मान राशि दी जा रही है। देश के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करने वाले जवान भी इसी तरह की सम्मान राशि के हकदार हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 23 नवंबर 2012 को आफिस मेमोरेंडम जारी किया था। इसमें सेना की तर्ज पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवानों को एक्स-मैन का दर्जा देने बाबत आदेश जारी किया गया था। इसे सभी जगह पर लागू किया जाना चाहिए। इससे रिटायर्ड पैरामिलिट्री जवानों को पुनर्वास व सरकारी नौकरियों में लाभ मिल सकेगा।

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