CAPF: वित्तीय मामले में गिरी गाज, केंद्र सरकार ने SSB के डीआईजी को किया बर्खास्त, कैसे हुआ ये फर्जीवाड़ा
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विस्तार
वित्तीय अनियमितताओं के मामले में केंद्र सरकार, कोई बड़ी कार्रवाई करने से नहीं चूक रही। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में शामिल सशस्त्र सीमा बल 'एसएसबी' के एक डीआईजी को वित्तीय अनियमितताओं के चलते बर्खास्त कर दिया गया है। टीएन नामग्याल 'आईपीएस' आईजी (पर्स) ने फ्रंटियर हेडक्वार्डर एसएसबी लखनऊ के डीआईजी रजनीश लांबा को केंद्र सरकार की तरफ से बर्खास्त करने के आदेश जारी किए हैं। उक्त डीआईजी पर एलटीसी एयर टिकट मामले में फर्जीवाड़ा करने के आरोप लगे हैं।
'फ्रीक्वेंट फ्लायर नंबर' के चक्कर में फंसा 'सीओ'
एसएसबी के सूत्रों के मुताबिक, रजनीश लांबा, नई दिल्ली स्थित एसएसबी मुख्यालय में फरवरी 2016 से जुलाई 2018 तक कमांडेंट 'प्रशासन' के पद पर तैनात थे। उस वक्त ये मामला सामने आया था। उन पर निजी फायदे के लिए नीचे वालों को साथ लेकर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे थे। कमांडेंट द्वारा अपने क्रेडिट कार्ड से एयर टिकट बुक कर दी जाती थी। 'फ्रीक्वेंट फ्लायर नंबर' के माइलेज के चक्कर में दूसरे लोगों की टिकटें बुक की गईं। वजह, उन्हें हर ट्रैवल पर कुछ एक्सट्रा माइलेज मिल जाता था। बाद में किसी रूट पर एक तरफ का फुल माइलेज, उन्हें अतिरिक्त तौर पर हासिल हो जाता था। इस कार्य में उन्हें एसआई मिनिस्ट्रयल, मिलन खेरकटारी का सहयोग हासिल हुआ। जांच में सामने आया कि उन दोनों ने मिलकर एलटीसी के नकली टिकट या उनमें बदलाव के जरिए क्लेम डाले थे। दोनों ने साथ मिलकर साजिश रची थी। एलटीसी ब्लॉक ईयर 2014 से 2017 तक के मामले की कोर्ट ऑफ इंक्वायरी में भी यह बात सामने आई थी। जांच के बाद भी वित्तीय अनियमितताएं बंद नहीं हुईं।
कार्रवाई के जरिए एक उदाहरण पेश करना चाहिए था
कोर्ट ऑफ इंक्वायरी में यह मामला साबित होने के बाद भी बतौर सीओ लांबा ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया। सीओ की जानकारी में सारा मामला था। इसके बावजूद मामले को दबाने का प्रयास हुआ। लांबा ने अपने पद का दुरुपयोग किया। एलीट केंद्रीय अर्धसैनिक बल के सदस्य होने के नाते वे भारत सरकार के हितों की रक्षा करने में असफल रहे। आधिकारिक ड्यूटी का निर्वहन नहीं कर सके। इस मामले में लांबा को अपनी कार्रवाई के जरिए एक उदाहरण पेश करना चाहिए था। रजनीश लांबा के बर्खास्तगी आदेशों में कहा गया है कि उन्हें अपने स्टे्टस और रैंक को ध्यान में रखना चाहिए था। इन सबके विपरित वे वित्तीय अनियमितताओं का हिस्सा बन गए। उन्हें बल के डीजी की संस्तुति के साथ नियमों के तहत कारण बताओ नोटिस दिया गया। बाद में इसे केंद्र सरकार को भेजा गया। उसमें लांबा को बर्खास्त करने की बात कही गई थी। क्लेम के लिए फ्रॉड करना, ऐसे मामले में सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।
27 जून 2023 से प्रभावी हुए बर्खास्तगी आदेश
डीआईजी की बर्खास्तगी का आदेश, 14 नवंबर 2022 को जारी हुआ था। उसमें कहा गया कि ये आदेश 27 जून 2023 से प्रभावी होगा। इस मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष याचिका भी लगाई गई। उसके बाद ही यह आदेश दिया गया कि डीआईजी लांबा के बर्खास्तगी आदेश 27 जून से मान्य होंगे। रजनीश लांबा, 90 दिन के अंदर इस सजा के खिलाफ अपील कर सकते हैं। बर्खास्तगी के बाद किसी अधिकारी या कर्मचारी को पैंशन और दूसरे वित्तीय फायदों से वंचित कर दिया जाता है।