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सीएपीएफ में कैसे आए 61 आईपीएस?: बिना कैडर रिव्यू के रिटायर हुए 400 अफसर, अन्य 400 सेवानिवृत्ति के लिए तैयार

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 16 Oct 2026 08:36 PM IST
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CAPF Cadre Review Still Pending: 400 Officers Retire, Another 400 Near Retirement
CAPF - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की विशेष पीठ ने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों 'सीएपीएफ' के कैडर अफसरों से जुड़े मामलों की सुनवाई की। इस दौरान सामने आया है कि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में 400 कैडर अफसर बिना कैडर रिव्यू के ही रिटायर हो गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद अभी तक इन बलों में कैडर रिव्यू नहीं हो सका। नतीजा, अब अन्य 400 कैडर अफसर, सेवानिवृत्ति की दहलीज पर पहुंच चुके हैं। कैडर अफसरों के अधिवक्ता ने यह बात उठाई कि 23 मई 2025 का सुप्रीम कोर्ट का वह फैसला, जिसमें कैडर अफसरों के हितों को लेकर कई अहम बातें शामिल थीं, उसे लागू करने में 'अधिनियम एक ढाल कैसे बन सकता है'। यहां 'सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) अधिनियम 2026' की बात हो रही है, जिसे सरकार ने पिछले सप्ताह ही अधिसूचित किया है। सरकार को सुप्रीम कोर्ट का वह फैसला तय अवधि में लागू करना चाहिए था। 
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स्वाभाविक पदोन्नति का अवसर मिल सके 
सर्वोच्च न्यायालय ने 23 मई 2025 को संजय प्रकाश एवं अन्य बनाम भारत सरकार मामले में एक ऐतिहासिक निर्णय दिया गया था। न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने सीएपीएफ के ग्रुप 'ए' कार्यपालक संवर्ग को संगठित ग्रुप 'ए' सेवा (ओजीएएस) घोषित करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे। उनमें आईजी लेवल तक आईपीएस प्रतिनियुक्ति में चरणबद्ध तरीके से कमी लाना, ताकि संवर्ग अधिकारियों को स्वाभाविक पदोन्नति का अवसर मिल सके, शामिल था। इसके अलावा नियमित कैडर समीक्षा हो, नए सेवा नियम तथा नॉन-फंक्शनल फाइनेंशियल अपग्रेडेशन (एनएफएफयू) लागू कर दीर्घकालीन पदोन्नति ठहराव को दूर करना, ये प्रावधान भी सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसले का हिस्सा थे। शीर्ष अदालत ने छह माह में कैडर रिव्यू और भर्ती नियमों की समीक्षा करने का आदेश दिया था। 
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सीएपीएफ में बढ़ती जा रही आईपीएस प्रतिनियुक्ति 
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने गत वर्ष सीएपीएफ में 'एसएजी' यानी आईजी स्तर के पदों तक आईपीएस की प्रतिनियुक्ति को दो वर्ष में कम करने का आदेश दिया था। इसके बाद सीएपीएफ में आईपीएस के आने की संख्या कम होने की बजाए बढ़ती चली गई। अभी तक लगभग 61 आईपीएस बतौर प्रतिनियुक्ति, सीएपीएफ में ज्वाइन कर चुके हैं। जस्टिस मनोज मिश्रा ने पूछा कि क्या ये प्रतिनियुक्तियां, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले की थीं। आठ अक्तूबर तक सरकार के पास नया कानून नहीं था। इस एक्ट का 23 मई 2025 के फैसले पर कोई असर नहीं पड़ता है, जिस तरह से सरकारी पक्ष की ओर से लगातार संघीय ढांचे को लेकर दलीलें दी जा रही हैं। कैडर अफसरों का पक्ष रख रहे अधिवक्ता ने कहा, अदालत कैडर समीक्षा पर स्पष्ट निर्देश जारी करे। चाहे अवमानना हुई हो या नहीं, यह प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए। सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट का आदेश न मानने का यह एकदम साफ मामला है। विधायी तरीके से अदालत के फैसले को पलटा जा रहा है। 
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'ओजीएएस' मान कर किया जाए कैडर रिव्यू 
2016 के बाद से इन बलों में कैडर रिव्यू नहीं हुआ है। यह पदोन्नति में ठहराव का मुख्य मुद्दा है। दस साल पहले जो कैडर रिव्यू हुआ, उसका  लाभ अफसरों को इसलिए नहीं मिल सका, क्योंकि उसे 'ओजीएएस' के बिना ही लागू कर दिया गया था। डीओपीटी का नियम है कि अन्य सभी विभागों में हर पांच वर्ष में कैडर रिव्यू होने का प्रावधान है। केंद्रीय बल, इनसे बाहर नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि 2021 में कैडर रिव्यू ओजीएएस मान कर किया जाए। उस फैसले पर  
स्टे हो गया। 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि छह माह में इन बलों में कैडर रिव्यू हो। इस पर भी सरकार ने समय मांग लिया। इस दौरान 400 कैडर अफसर रिटायर हो गए। साठ साल की सेवा के बाद बाकी 400 कैडर अफसर, सेवानिवृत्त होने के लिए तैयार हैं। 

सीएपीएफ एक्ट से कैडर रिव्यू का मतलब नहीं 
यह एक गुमराह करने वाली दलील है कि सीएपीएफ एक्ट के चलते कैडर रिव्यू में दिक्कतें आ रही हैं। सीएपीएफ एक्ट से कैडर रिव्यू का कोई मतलब ही नहीं है। सुनवाई में ये बात सामने आई कि आईपीएस प्रतिनियुक्ति में तो आज भी कमी नहीं आई है। सीएपीएफ में आईपीएस विरोध में खड़े हैं तो दिक्कतें आ रही हैं। अभी तक इन बलों में अपने एक्ट के अनुसार पदोन्नति और 
ट्रांसफर के नियम तय होते हैं। अब नए एक्ट में लिखा है कि अगर सरकार चाहेगी तो कैडर अफसरों की पदोन्नति व ट्रांसफर के नियम, नए एक्ट के अनुसार बनेंगे। सीएपीएफ को लेकर जब सरकार चाहेगी, वैसा ही नया नियम बना सकती है। अभी तक पुराने आधार पर ही कैडर रिव्यू हो रहा है। कैडर अफसरों के वकील द्वारा आईपीएस प्रतिनियुक्ति पर रोक लगाने की मांग की गई। इस बाबत कोर्ट ने कहा कि हमारे पास पर्याप्त डेटा नहीं है। वकील द्वारा कहा गया कि अवमानना का केस चल रहा है, लेकिन प्रतिनियुक्ति पर आईपीएस अधिकारी लगातार आ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल, आईपीएस प्रतिनियुक्ति पर रोक लगाने से मना कर दिया। 

कैडर समीक्षा को लेकर मांगा स्पष्टीकरण 
सर्वोच्च अदालत ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी के जरिए केंद्र सरकार से पूछा कि 2025 के निर्देशों, खासकर कैडर समीक्षा का पालन न करने के पीछे उनका क्या स्पष्टीकरण है। ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि उन्होंने प्रक्रिया शुरू कर दी है। जस्टिस मिश्रा ने पूछा कि क्या सीएपीएफ को यह बताया गया था कि वे कोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं, क्योंकि छह महीने की समय-सीमा पूरी हो चुकी है। जस्टिस मिश्रा ने कहा, जब आपने कैडर समीक्षा का प्रस्ताव मांगा, तो क्या आपने उन्हें कोर्ट के आदेश के बारे में बताया और यह भी कि वे आदेशों का उल्लंघन कर रहे हैं। अगर उन्होंने प्रस्ताव भेजने में देरी की है, तो उल्लंघन सिर्फ आपकी तरफ से ही नहीं, बल्कि उनकी तरफ से भी हो सकता है। यह मामला काफी गंभीर है। 


सभी फाइलें पेश करने का निर्देश  
सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार को 23 मई, 2025 के आदेश के तहत की गई कार्रवाई का विवरण देने वाली सभी फाइलें पेश करने का निर्देश दिया है। जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस भुइयां (फैसला लिखने वाले जज) की बेंच ने सभी सीएपीएफ में कैडर समीक्षा करने और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा 12 जुलाई, 2019 को जारी ऑफिस मेमोरेंडम के अनुरूप प्रत्येक सीएपीएफ के भर्ती नियमों में संशोधन करने का निर्देश दिया था। इस ओएम के तहत सीएपीएफ को 'ऑर्गनाइज्ड ग्रुप-ए सर्विसेज' (ओजीएएस) के रूप में मान्यता दी गई थी। यह प्रक्रिया छह महीने के भीतर पूरी होनी थी। कैडर अफसरों का पक्ष रखने वाले वकीलों ने कहा, अदालत कैडर समीक्षा पर स्पष्ट निर्देश जारी करे। चाहे अवमानना हुई हो या नहीं, यह प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए। एक बार यह पूरी हो जाए, तो हम आगे बढ़ सकते हैं। मामले की अगली सुनवाई 27 अक्तूबर को होगी।

 
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