फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Cancer Drug Prices May Fall by 70%, Centre Expects ₹2,500 Crore Annual Savings for Patients

कैंसर की दवाएं 70% तक होंगी सस्ती?: मरीजों को हर साल 2500 करोड़ रुपये की बचत की उम्मीद, केंद्र की क्या तैयारी?

Fri, 23 Oct 2026 04:26 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Fri, 23 Oct 2026 04:26 PM IST
सार

केंद्र सरकार कैंसर की दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन को एमआरपी के 30 फीसदी तक सीमित करने की तैयारी कर रही है। सरकार को उम्मीद है कि इससे दवाओं की कीमतें 20 से 70 फीसदी तक घटेंगी और मरीजों को हर साल 2,500 करोड़ रुपये की बचत होगी। लेकिन क्या यह प्रस्ताव जल्द लागू होगा? किन दवाओं को इसमें शामिल किया जाएगा? और क्या दवाएं सस्ती होने के बाद भी आसानी से उपलब्ध रहेंगी? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

विज्ञापन
Cancer Drug Prices May Fall by 70%, Centre Expects ₹2,500 Crore Annual Savings for Patients
कैंसर की दवाओं की कीमतें कैसे कम होंगी? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

कैंसर का इलाज पहले से ही मरीजों और उनके परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ डालता है। महंगी दवाओं के कारण कई परिवारों को अपनी जमा पूंजी खर्च करनी पड़ती है। ऐसे में केंद्र सरकार ने कैंसर की दवाओं की कीमतों को कम करने की दिशा में एक प्रस्ताव पेश किया है। सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से कुछ कैंसर की दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य यानी एमआरपी में 20 से 70 फीसदी तक की कमी आ सकती है। इससे मरीजों को हर साल करीब 2,500 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है।

विज्ञापन


कैंसर की दवाओं की कीमतें कैसे कम होंगी?
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में बताया है कि वह कैंसर की दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन को उनकी अधिकतम खुदरा कीमत यानी एमआरपी के 30 फीसदी तक सीमित करने की योजना बना रही है। व्यापारिक मार्जिन वह रकम होती है, जो दवा बनाने वाली कंपनी से लेकर वितरक और खुदरा विक्रेता तक दवा की बिक्री में कमाते हैं। सरकार का मकसद इस कमाई पर सीमा लगाकर दवाओं की कीमतों में होने वाली अत्यधिक बढ़ोतरी को रोकना है। हालांकि, यह प्रस्तावित व्यवस्था है। इसे लागू करने से पहले संबंधित दवाओं की सूची और दूसरे जरूरी पहलुओं पर फैसला होना बाकी है।
विज्ञापन


सरकार को हर साल 2,500 करोड़ रुपये की बचत की उम्मीद क्यों है?
सरकार का अनुमान है कि व्यापारिक मार्जिन की सीमा तय होने से कैंसर की दवाओं की कीमतें 20 से 70 फीसदी तक घट सकती हैं। इससे मरीजों को अपनी जेब से इलाज पर कम पैसा खर्च करना पड़ेगा। केंद्र ने कहा है कि इस कदम का उद्देश्य दवाओं को सस्ता बनाने के साथ उनकी उपलब्धता और कीमतों में पारदर्शिता बढ़ाना भी है। सरकार ने यह प्रस्ताव दवाओं की कीमतों के नियमन से जुड़ी एक जनहित याचिका के जवाब में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में रखा है। यह याचिका डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ ने दायर की है।
विज्ञापन
विज्ञापन


किन कैंसर की दवाओं पर लागू हो सकता है यह नियम?
केंद्र सरकार के मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था के तहत कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं को शामिल किया जाएगा, लेकिन कम कीमत वाली दवाओं को इससे बाहर रखा जा सकता है। दवाओं की अंतिम सूची तैयार करने के लिए विशेषज्ञ समिति बनाई गई है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 9 अक्टूबर को स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक की अध्यक्षता में इस समिति का गठन किया था। समिति से 10 से 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट देने की उम्मीद है। इसके बाद राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण यानी एनपीपीए समिति की सिफारिशों पर विचार करेगा। फिर उचित निर्देश और कीमतों से जुड़ी अधिसूचना जारी की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर बाजार की स्थिति और जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सूची में बदलाव भी किया जा सकेगा।

क्या सरकार पहले भी दवाओं की कीमतें घटा चुकी है?
केंद्र सरकार ने हलफनामे में वर्ष 2019 में उठाए गए कदम का भी जिक्र किया है। उस समय एनपीपीए ने कैंसर की 42 चुनी हुई गैर-अनुसूचित दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन 30 फीसदी तक सीमित किया था। सरकार के मुताबिक, इस फैसले से 526 ब्रांड की दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य में कमी आई थी और कंपनियों से मिली जानकारी के आधार पर मरीजों को हर साल करीब 984 करोड़ रुपये की बचत हुई थी। सरकार अब इसी अनुभव के आधार पर अधिक दवाओं को इस तरह के नियमन के दायरे में लाने पर विचार कर रही है। इसके अलावा, सरकार ने मधुमेह और हृदय संबंधी कुछ दवाओं, कोरोनरी स्टेंट, घुटने के प्रत्यारोपण और कोविड के दौरान ऑक्सीजन कंसंट्रेटर समेत कुछ चिकित्सा उपकरणों की कीमतों पर भी कदम उठाए हैं।


क्या दवाएं सस्ती करने से उनकी उपलब्धता पर असर पड़ सकता है?
सरकार ने माना है कि व्यापारिक मार्जिन की सीमा तय करने से दवा उद्योग के अलग-अलग हिस्सों पर अलग असर पड़ सकता है। कुछ उद्योग संगठनों ने चिंता जताई है कि इससे छोटे और मध्यम दवा निर्माताओं, वितरकों और खुदरा विक्रेताओं के कारोबार तथा रोजगार पर असर पड़ सकता है। दूरदराज के इलाकों में दवाएं पहुंचाने में भी परेशानी हो सकती है। सरकार के मुताबिक, कुछ कम कीमत वाली दवाओं, विशेष रखरखाव वाली दवाओं और कम बिक्री वाली दवाओं को दुकानों तक पहुंचाने के लिए ज्यादा मार्जिन जरूरी हो सकता है। इसलिए सरकार ने कहा है कि दवाओं को सस्ता करने और उनकी उपलब्धता बनाए रखने के बीच संतुलन जरूरी है। सरकार ने प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के तहत करीब 19,000 जन औषधि केंद्रों और एएमआरआईटी फार्मेसियों का भी उल्लेख किया है, जहां सस्ती जेनेरिक और जरूरी दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed