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कनाडा: गुरुद्वारे में खालिस्तानियों और मणिपुर के आतंकियों की सीक्रेट मीटिंग, मिलकर बनाया यह खतरनाक प्लान

Sat, 23 Sep 2023 03:00 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Sat, 23 Sep 2023 03:00 PM IST
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सार
केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ब्रिटिश कोलंबिया के सरे स्थित गुरु नानक गुरुद्वारे में मणिपुर के अलगाववादी नेता लीन गैंगटे की खालिस्तानी आतंकवादियों के साथ बीते दिनों एक अहम गुप्त बैठक हुई है।
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Canada British Colombia Gurudwara secret meeting between Khalistan and Manipur militants
British Colombia Gurudwara - फोटो : Social Media

विस्तार

कनाडा की जमीन पर भारत के खिलाफ बहुत बड़ी साजिशें रची जा रही हैं। खालिस्तान के आतंकी और पंजाब के बड़े-बड़े गैंगस्टर को कनाडा में मिली पनाह के बाद अब इन्हीं खालिस्तानियों के कंधे से कंधा मिलाकर मणिपुर के अलगाववादी भी जुड़ गए हैं।


खुफिया एजेंसियों को मिली जानकारी के मुताबिक मणिपुर के एक अलगाववादी संगठन के प्रमुख नेता ने कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया स्थित सरे के गुरुद्वारे में जाकर न सिर्फ खालिस्तानियों की चलाई जा रही भारत विरोधी मुहिम को सपोर्ट किया बल्कि मणिपुर में अलगाववाद की मांग कर साथ लड़ाई लड़ने की बात कही। फिलहाल इस मुलाकात के बाद यह पूरी तरीके से साफ हो गया है कि कनाडा की जमीन पर भारत के खिलाफ एक साथ कई ग्रुप न सिर्फ हाथ मिला रहे हैं बल्कि ट्रूडो सरकार की शहपरस्ती में ऐसे संगठनों को शरण और हर मदद भी मिल रही है।


ब्रिटिश कोलंबिया के सरे स्थित गुरु नानक गुरुद्वारे में मीटिंग
केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ब्रिटिश कोलंबिया के सरे स्थित गुरु नानक गुरुद्वारे में मणिपुर के अलगाववादी नेता लीन गैंगटे की खालिस्तानी आतंकवादियों के साथ बीते दिनों एक अहम गुप्त बैठक हुई है। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में नॉर्थ अमेरिकन मणिपुर ट्राइबल एसोसिएशन (एनएएमटीए) के चीफ लीन गैंगटे और खालिस्तानी आतंकी निज्जर के समर्थकों के बीच भारत के विरोध में बड़े अभियान चलाने की भी तैयारी की पुख्ता जानकारी मिली है।

मुलाकात के दौरान बाकायदा संगठन के चीफ लीन गैंगटे ने गुरुद्वारे के भीतर मौजूद लोगों को न सिर्फ संबोधित किया बल्कि भारत सरकार के विरोध में खालिस्तानियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर दोनों संगठनों को एकजुट होने की अपील भी की।सूत्रों का कहना है कि इस दौरान एनएएमटीए के मुखिया ने मणिपुर में हुई हिंसा में खालिस्तानियों के समर्थन की भी मांग की। केंद्रीय खुफिया एजेंसियों को मिली जानकारी के मुताबिक इस मुलाकात के दौरान गुरु नानक गुरुद्वारा समिति से जुड़े लोगों ने लीन गैंगटे को उनके अलगाववाद की मुहिम में साथ मिलकर आगे की रणनीति बनाने का पूरा भरोसा और हर स्तर की मदद का आश्वासन भी दिया। 

करीबन तीन घंटे तक चली मीटिंग 
केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक तकरीबन 3 घंटे से ज्यादा चली मणिपुर के अलगाववादी संगठन और खालिस्तानी आतंकियों के बीच अहम बैठक हुई है। इस बैठक के इनपुट को केंद्र सरकार के साथ न सिर्फ साझा किया गया है बल्कि आतंकी और अलगाववादी संगठनों के बीच कनाडा में हो रहे गठजोड़ पर पुरजोर तरीके से कनाडा सरकार के सामने सबूतो के साथ अपनी बात को रखने की तैयारी भी की।

केंद्रीय खुफिया एजेंसी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जिस तरीके से कनाडा में भारत के विरोध में लगातार साजिशें की जा रहीं हैं वह किसी से छुपी हुई नहीं है। सूत्रों का कहना है कि जब मणिपुर के अलगाववादी और खालिस्तानी आतंकियों और समर्थकों के बीच गुरुनानक गुरुद्वारे में गुप्त बैठकें चल रही थीं तो कनाडा सरकार की खुफिया एजेंसियां भी उस पूरे इलाके में मौजूद थी। बावजूद इसके कनाडा सरकार भारत के खिलाफ रची जा रही साजिश में हस्तक्षेप करने की बजाय उनका बढ़ावा देने के लिए पूरी जमीन तैयार करवा रही है।

सूत्रों के मुताबिक तकरीबन तीन घंटे तक चली इस बैठक के दौरान गुरुद्वारे में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए एनएएमटीए के चीफ लीन गैंगटे ने माहौल खराब करते हुए मणिपुर में हुई हिंसा में खालिस्तानियों के समर्थन की मांग की। इस पूरे संबोधन में झूठे पुलिंदे के साथ कनाडा सरकार से भी अपील की कि उनके समुदाय और खालिस्तानियों को न सिर्फ ट्रूडो मदद को आगे आए बल्कि जिस तरह खालिस्तानी समर्थकों को राजनीति में महत्वपूर्ण भागीदारी दी जा रही है इस तरह उनके समुदाय को भी कनाडा में सियासी तौर पर आगे बढ़ाया जाए। इस पूरी मुलाकात के दौरान अगले कुछ दिनों के भीतर कनाडा और अमेरिका में एनएएमटीए आयोजित किए जाने वाले प्रदर्शनों में खालिस्तान समर्थकों से बढ़-चलकर हिस्सेदारी लेने की भी मांग की गई है। 

कनाडा में भारत विरोधी गतिविधियों को मिल रहे बढ़ावे पर रक्षा मामलों के जानकार लेफ्टिनेंट कर्नल देवेंद्र बहल कहते हैं कि अब इसमें किसी भी तरीके की कोई शक की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए कि कनाडा की धरती किस तरीके से भारत के विरोधियों के लिए सबसे बड़ी पनागाह बनती जा रही है। वह कहते हैं कि भारत सरकार लगातार कनाडा सरकार से सबूत के साथ कहती आई है कि खालिस्तान और अन्य भारत विरोधी तत्व वहां पर लगातार सक्रिय है। लेकिन ट्रूडो सरकार इस दिशा में कुछ भी जवाब देने से न सिर्फ बचती रही बल्कि सियासत के लिए वहां रह रहे लाखों हिंदुस्तानियों की जान को भी मुश्किल में डाल दिया है।

विदेशी मामलों के विशेषज्ञ मानते हैं कि मणिपुर में जिस तरीके की वारदात हुई है उसमें पहले से ही इस तरीके की खुफिया रिपोर्ट्स सामने आई थी जिसमें विदेशी ताकतों के शामिल होने की बात कही गई थी। अब जब भारत से अलग होने की मांग करने वाले एनएएमटीए संगठन के लोगों ने खालिस्तानियों से हाथ मिला लिया है तो कनाडा सरकार पूरी तरीके से एक्सपोज हो चुकी है। यह मुलाकात और गुप्त बैठक बताती है कि कनाडा सरकार भारत के विरोधियों को अपने यहां पर जगह देकर देश को तोड़ने की साजिशों में मदद कर रही है। 
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