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HC: 'मुंबई में साल 2005 में आई बाढ़ को नहीं भूल सकते', मीठी नदी सुधार परियोजना के खिलाफ याचिका पर हाईकोर्ट

Sun, 03 Mar 2024 01:01 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: काव्या मिश्रा Updated Sun, 03 Mar 2024 01:01 PM IST
सार

पीठ ने 29 फरवरी को आशियाना वेलफेयर सोसाइटी और समीर अहमद चौधरी द्वारा दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई की थी, जिन्होंने मीठी नदी के सुधार के लिए प्रस्तावित बुनियादी ढांचा परियोजना से प्रभावित होने का दावा किया था

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Can't forget July 2005 deluge in Mumbai: High Court on plea against Mithi river improvement project
bombay high court - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि वह जुलाई 2005 की बाढ़ को नहीं भूल सकता, जब मुंबई शहर लगभग पूरी पानी में डूबा हुआ था। अदालत ने कहा कि मीठी नदी के किनारे हुए अवैध निर्माण के कारण भारी नुकसान हुआ था।

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न्यायमूर्ति गौतम पटेल और न्यायमूर्ति कमल खाता की खंडपीठ ने कहा कि जनहित उस कल्याणकारी सोसाइटी को कोई राहत देने की अनुमति नहीं देगा, जिसने प्रस्तावित मीठी नदी सुधार परियोजना के खिलाफ याचिका दायर की है।
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29 फरवरी को हुई थी सुनवाई
पीठ ने 29 फरवरी को आशियाना वेलफेयर सोसाइटी और समीर अहमद चौधरी द्वारा दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई की थी, जिन्होंने मीठी नदी के सुधार के लिए प्रस्तावित बुनियादी ढांचा परियोजना से प्रभावित होने का दावा किया था। याचिकाओं में सोसाइटी के ढांचे को गिराने पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
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पानी में डूबा हुआ था मुंबई शहर
हाईकोर्ट ने कहा, 'लोगों की याददाश्त छोटी हो सकती है, लेकिन यह इतनी छोटी नहीं हो सकती है कि कुछ साल पहले यानी साल 2005 के समय को पूरी तरह से भूल जाए। जब मुंबई लगभग पूरी तरह से पानी में डूबा हुआ था और सबसे बुरी तरह प्रभावित हिस्सों में से एक मीठी नदी थी।'

अदालत ने कहा, 'मीठी नदी के किनारे हुए अवैध निर्माण के कारण भारी नुकसान हुआ था।' पीठ ने कहा कि जनहित याचिकाकर्ताओं को ज्यादा राहत देने की अनुमति नहीं देगा, खासकर जब एक पुनर्वास नीति है जिसके लिए हाईकोर्ट वर्तमान में विज्ञापन देगा।

हाईकोर्ट ने कहा, 'पूरे मुंबई में जहां सार्वजनिक परियोजनाएं चल रही हैं। सामाजिक, मानवीय और शहरी नियोजन के मुद्दे के रूप में मान्यता देते हुए, सरकार ने विभिन्न स्तरों पर नीतियां तैयार की हैं जो इन सार्वजनिक कार्यों के निष्पादन की अनुमति देती हैं, लेकिन साथ ही साथ मुआवजे और पुनर्वास के लिए भी प्रावधान करती हैं।'

500 ढांचों में से अब तक 179 का सर्वेक्षण पूरा
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल सखारे ने अदालत को बताया कि 500 ढांचों में से अब तक 179 का सर्वेक्षण किया जा चुका है। बाकी का सर्वेक्षण किया जाएगा और पात्रता आकलन का काम चार हफ्ते में पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पात्र परियोजना प्रभावित व्यक्तियों को वैकल्पिक मकान या मुआवजा दिया जाएगा। 

इसके बाद पीठ ने बीएमसी को पुनर्वास नीति के विवरण सहित एक हलफनामे पर यह जानकारी देने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा, 'एक बार जब यह हो जाए और हमें पात्र लोगों के नाम मिल जाएं तो अदालत इस परियोजना से प्रभावित लोगों के पुनर्वास और स्थानांतरण की प्रक्रिया की निगरानी कर सकती है।'


13 मार्च को होगी सुनवाई
हाईकोर्ट ने कहा कि वह 13 मार्च को याचिकाओं पर सुनवाई करेगा, तब तक पहले के आदेश जारी रहेंगे। बीएमसी के अनुसार, इस परियोजना में मीठी नदी के किनारे चौड़ीकरण, गहरीकरण और एक रिटेनिंग वॉल और 12 मीटर चौड़ी सड़क का निर्माण शामिल है।

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