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SC: सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी- आधी क्षमता पर काम कर रहे हाईकोर्ट से तेज निपटारे की नहीं की जा सकती उम्मीद
Tue, 23 Sep 2025 03:24 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Tue, 23 Sep 2025 03:24 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी देश की न्यायिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़ा करता है। जब हाईकोर्ट अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे हैं, तब पुराने मामलों के तेजी से निपटारे की उम्मीद करना बेमानी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे हालात में याचिकाकर्ताओं को बार-बार आवेदन देकर हाईकोर्ट का ध्यान आकर्षित करना होगा, क्योंकि वो सीधे तौर पर हाईकोर्ट को आदेश नहीं दे सकता।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल)
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि देश के हाईकोर्ट उसके प्रत्यक्ष नियंत्रण में नहीं आते, और जब वे अपनी आधी क्षमता के साथ काम कर रहे हों तो उनसे यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे हर मामले को तेजी से निपटाएं। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी उस समय की जब एक याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को 13 साल पुराने मामले का जल्द निपटारा करने का निर्देश देने की मांग की।
यह भी पढ़ें - Supreme Court: क्या बार कोटे से जिला जज बन सकते हैं न्यायिक अधिकारी? सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू
याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि उनका मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में 13 साल से लंबित है। इस पर न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने स्पष्ट कहा, 'हाईकोर्ट इस अदालत (सुप्रीम कोर्ट) के अधीन नहीं है।' वकील ने बताया कि उनके मुवक्किल ने पहले ही दो बार हाईकोर्ट में आवेदन देकर मामले के जल्दी निपटारे की गुहार लगाई है। इस पर पीठ ने कहा, 'आवेदन करना जारी रखें। अगर हाईकोर्ट आधी क्षमता के साथ काम कर रहा है तो आप उनसे कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि वे हर मामले को तुरंत निपटाएं? उनसे पहले के कई पुराने मामले लंबित हैं। आप वहां जाकर निवेदन करें।'
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सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर कोई आदेश देने से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी कि वह हाईकोर्ट में जाकर मामले की जल्द सुनवाई और निपटारे के लिए औपचारिक आवेदन करे। अदालत ने कहा कि ऐसे आवेदन पर हाईकोर्ट उचित तरीके से विचार करेगा। इस मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने अपने वकील जीवन का अनुभव साझा करते हुए कहा कि वह लंबे समय तक इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रैक्टिस कर चुके हैं और वहां मामलों को सूचीबद्ध कराने के लिए कितनी मेहनत करनी पड़ती है, यह भली-भांति जानते हैं। उन्होंने कहा, 'सिर्फ दो आवेदन काफी नहीं हैं। कई बार आपको सैकड़ों आवेदन करने पड़ सकते हैं ताकि आपका मामला सूची में आ सके।'
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देशभर में हाईकोर्ट में जजों की भारी कमी
कानून मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, देशभर के 25 हाईकोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या 1,122 है। लेकिन 1 सितंबर 2025 तक इनमें केवल 792 जज ही काम कर रहे हैं, यानी 330 पद खाली हैं। यह करीब 30% से अधिक की कमी को दर्शाता है।
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याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि उनका मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में 13 साल से लंबित है। इस पर न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने स्पष्ट कहा, 'हाईकोर्ट इस अदालत (सुप्रीम कोर्ट) के अधीन नहीं है।' वकील ने बताया कि उनके मुवक्किल ने पहले ही दो बार हाईकोर्ट में आवेदन देकर मामले के जल्दी निपटारे की गुहार लगाई है। इस पर पीठ ने कहा, 'आवेदन करना जारी रखें। अगर हाईकोर्ट आधी क्षमता के साथ काम कर रहा है तो आप उनसे कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि वे हर मामले को तुरंत निपटाएं? उनसे पहले के कई पुराने मामले लंबित हैं। आप वहां जाकर निवेदन करें।'
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सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर कोई आदेश देने से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी कि वह हाईकोर्ट में जाकर मामले की जल्द सुनवाई और निपटारे के लिए औपचारिक आवेदन करे। अदालत ने कहा कि ऐसे आवेदन पर हाईकोर्ट उचित तरीके से विचार करेगा। इस मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने अपने वकील जीवन का अनुभव साझा करते हुए कहा कि वह लंबे समय तक इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रैक्टिस कर चुके हैं और वहां मामलों को सूचीबद्ध कराने के लिए कितनी मेहनत करनी पड़ती है, यह भली-भांति जानते हैं। उन्होंने कहा, 'सिर्फ दो आवेदन काफी नहीं हैं। कई बार आपको सैकड़ों आवेदन करने पड़ सकते हैं ताकि आपका मामला सूची में आ सके।'
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देशभर में हाईकोर्ट में जजों की भारी कमी
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