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VHP: हिंदू मंदिरों को सरकार के कब्जे से मुक्त कराने के लिए चलेगा अभियान, पांच जनवरी को होगा आगाज

Wed, 25 Dec 2024 06:51 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Wed, 25 Dec 2024 06:51 PM IST
सार

विहिप का कहना है कि मुस्लिम समाज के मस्जिद हों या इसाइयों के गिरिजाघर, किसी भी धर्मस्थल पर किसी सरकार का नियंत्रण नहीां होता। इन पूजा स्थलों की देखरेख इसी समाज के लोग करते हैं।

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Campaign will be launched to free Hindu temples from government occupation news in hindi
विहिप - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) लगातार यह मांग करती रही है कि हिंदू मंदिरों को सरकारों के नियंत्रण से मुक्त होना चाहिए। लेकिन अब एक राष्ट्रव्यापी अभियान के जरिए वह मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण को समाप्त करने के लिए अभियान चलाएगी। इसके लिए दक्षिण भारत का चयन किया गया है। आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा से आगामी पांच जनवरी से एक बड़े अभियान की शुरुआत की जा सकती है जिसे पूरे देश में ले जाया जाएगा और पूरे देश की सरकारों से मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने का अनुरोध किया जाएगा। इसके बाबत संगठन की तरफ से जल्द ही विस्तृत योजना की घोषणा की जा सकती है।
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दरअसल, आंध्र प्रदेश के तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसादम में पशुओं की चर्बी पाए जाने का मामला सामने आया था जिस पर पूरे देश में कड़ी प्रतिक्रिया हुई थी। इसके बाद कुछ अन्य मंदिरों के प्रसादों के भी अशुद्ध किए जाने का मामला सामने आया था। इसके बाद से ही हिंदू मंदिरों पर से सरकारों के नियंत्रण को समाप्त करने की मांग उठने लगी।  
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विहिप का कहना है कि मुस्लिम समाज के मस्जिद हों या इसाइयों के गिरिजाघर, किसी भी धर्मस्थल पर किसी सरकार का नियंत्रण नहीां होता। इन पूजा स्थलों की देखरेख इसी समाज के लोग करते हैं। लेकिन हिंदुओं के मंदिरों पर सरकारों का नियंत्रण होता है। विहिप की मांग रही है कि हिंदू समाज के मंदिरों से प्राप्त आय को सरकार दूसरे धर्मों के लोगों के ऊपर खर्च करती रही है, जबकि यह पैसा हिंदू समाज का है और इसे हिंदू समाज की भलाई के लिए ही खर्च किया जाना चाहिए। 
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राज्यपालों से मुलाकात
राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाने के पहले विहिप ने इसके लिए देश के सभी राज्यपालों से मिलकर भी इस पर एक ज्ञापन सौंपा था। इस ज्ञापन में राज्यपालों को अपनी सरकारों से मंदिरों पर से कब्जा समाप्त किए जाने का निर्देश दिए जाने का अनुरोध किया गया था। दूसरे चरण में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्राबाबू नायडू से मिलकर मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने का अनुरोध किया गया था। 

संविधान का उल्लंघन
विहिप का मानना है कि मंदिरों पर सरकार का नियंत्रण सीधे-सीधे संविधान का उल्लंघन है। संविधान में किसी भी धर्म को अपने तरीके से मनाने, इसके प्रचार-प्रसार करने की अनुमति दी गई है। लेकिन इसके बाद भी विभिन्न राज्य सरकारों ने मंदिरों पर कब्जा कर लिया है। संविधान में सबके साथ बराबरी का व्यवहार करने की बात भी कही गई है, लेकिन इसके उलट राज्य सरकारें मुस्लिम और ईसाई धर्म के पूजा स्थलों के साथ अलग व्यवहार कर रही हैं, जबकि हिंदू धर्म के मंदिरों पर कब्जा जमाए बैठी हैं। विहिप का मानना है कि यह संविधान की बराबरी के नियम का उल्लंघन है।   


सरकारों मंदिर छोड़ो- विहिप
विश्व हिंदू परिषद नेता विनोद बंसल ने कहा कि वे सरकारों मंदिर छोड़ो का नारा लगा रहे हैं। इसका यही आशय है कि सरकारों को मंदिरों पर से अपना नियंत्रण छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारें दूसरे मंदिरों के धर्म स्थलों को अपने कब्जे में नहीं लेती हैं तो हिंदू समाज के मंदिरों को उन्हें अपने अधिकार में क्यों लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंदिरों का पैसा हिंदू समाज के हित में खर्च किया जाना चाहिए।
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