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सांसदों के लिए भी शुरू हुई कॉल सेंटर सेवा, 24 घंटे मिलेगी निर्वाचन क्षेत्र सहित हर जानकारी
Sat, 28 Dec 2019 09:42 AM IST
अनवर अंसारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Sat, 28 Dec 2019 09:42 AM IST
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संसद
- फोटो : PTI
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अभी तक देखा जाता था कि कॉल सेंटरों केवल उपभोक्ताओं को उनके प्रयोग की जा रही वस्तुओं और सेवाओं की जानकारी के लिए होते थे। लेकिन, अब देश के लिए कानून बनाने वाले सांसदों के लिए भी कॉल सेंटर होंगे। जहां वे अपने संसदीय क्षेत्र से जुड़ी हर तरह की जानकारियां प्राप्त कर सकेंगे।
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हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह पहल लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने की है, जिनका मानना है कि इस कॉल सेंटर से मिली जानकारी से अपने निर्वाचन क्षेत्र के प्रबंधन के साथ-साथ अपनी संसदीय जिम्मेदारियां भी निभाने सांसदों की दक्षता में सुधार होगा।
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सूचना और संचार केंद्र के नाम से यह कॉल सेंटर 24 घंटे और सातों दिन सांसदों की मदद के लिए उपलब्ध होंगे। यह कॉल सेंटर सभी पहलुओं पर सांसदों की मदद करेगा, फिर वो चाहे प्रशासनिक हो या कार्यात्मक।
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लोकसभा सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि कॉल सेंटर को पिछले महीने एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया। इस कॉल सेंटर को संचालित करने के लिए संसद भवन के एनेक्स में कमरा नम्बर 13 आवंटित किया गया और इसके संचालन के लिए कम से कम तीन अधिकारियों को तैनात किया गया है।
सदस्य सेवा शाखा के संयुक्त सचिव आभा सिंह यदुवंशी द्वारा लिखे गए एक पत्र में समझाया गया है कि मुख्य समन्वयक और कुछ समन्वयकों के अलावा, कॉल सेंटर में अस्थायी नोडल अधिकारी भी है।
कॉल सेंटर से जुड़े पदाधिकारियों के अनुसार, अभी तक सांसदों द्वारा कुछ साधारण प्रश्न ही पूछे गए हैं। उन्होंने बताया कि शीतकालीन सत्र के अंतिम दो हफ्तों के दौरान, उन्हें केवल यात्रा बिल, विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर और चर्चा के लिए विभिन्न विषयों पर शोध पत्रों के बारे में पूछने के लिए कॉल आए।
पिछले सप्ताह एक अनौपचारिक बातचीत के दौरान, लोकसभा अध्यक्ष ने कहा था कि ऐसे शोध पत्र और अन्य सुविधाएं सांसदों के लिए मददगार होती हैं क्योंकि सांसदों के पास अपने निर्वाचन क्षेत्रों में बहुत तंग कार्यक्रम होता है और अपनी बहस को तैयार करने के लिए सीमित समय मिलता था।
उन्होंने कहा कि एक निर्वाचन क्षेत्र के लोगों को एक सांसद से बहुत अधिक उम्मीदें हैं। उन्हें समारोहों, सामाजिक आयोजनों और राजनीतिक बैठकों में भाग लेना होता है और साथ ही सांसदों को सदन में निर्वाचन क्षेत्रों और राष्ट्रहित के मुद्दों को उठाना पड़ता है। इसलिए, विशेषज्ञों द्वारा इस तरह के शोध पत्र और व्याख्यान श्रृंखला सांसदों को बहुत मदद करते हैं।