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हाईकोर्ट: 'रैली-सभाएं बंगाली संस्कृति का अटूट हिस्सा'; चीफ जस्टिस ने मिस्टी दोई-लूची-अलु पोस्तो का नाम भी लिया

Thu, 14 Mar 2024 05:05 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Thu, 14 Mar 2024 05:05 PM IST
सार

कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने एक मुकदमे पर सुनवाई के दौरान रैलियों और जनसभाओं को पश्चिम बंगाल की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा करार दिया। उन्होंने मिस्टी दोई (मीठी दही) और बंगाल में खास तौर पर लोकप्रिय लूची (एक तरह की पूरी) का भी जिक्र किया।

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Calcutta High Court Chief Justice Rallies Meeting Bengal Culture Inseparable like luchi mishti doi
चीफ जस्टिस शिवगणनम और कलकत्ता हाईकोर्ट (फाइल) - फोटो : amar ujala graphics

विस्तार

अदालतों में मुकदमों की सुनवाई के दौरान कई बार न्यायाधीश दिलचस्प और अहम मौखिक टिप्पणियां करते हैं। ताजा घटनाक्रम कलकत्ता हाईकोर्ट से सामने आया है। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम की अध्यक्षता वाली पीठ ने बंगाल की संस्कृति पर जोर देते हुए एक मार्च की अनुमति दी। हावड़ा के भीड़भाड़ वाले इलाके में यातायात संबंधी चिंताओं के बावजूद सरकारी कर्मचारियों ने राज्य समन्वय समिति की रैली को शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित किया। यह घटनाक्रम इसलिए चर्चा में है क्योंकि चीफ जस्टिस ने रैलियों और जनसभाओं को बंगाल की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बताते हुए इनकी तुलना मिष्टी दोई, लूची और अलु पोस्तो जैसे व्यंजनों से की।
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चीफ जस्टिस ने बंगाल के लजीज व्यंजनों का जिक्र क्यों किया
बता दें कि लूची मैदे से बनी डीप फ्राइड पूरी जैसा पकवान है। अलु पोस्तो खसखस के पेस्ट में पकाए गए आलू के लजीज व्यंजन हैं। बता दें कि बंगाल के व्यंजनों का जिक्र उस मुकदमे में हुआ जिसमें एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी गई थी। हालांकि, चीफ जस्टिस ने आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और कहा कि यातायात को प्रभावित किए बिना रैली आयोजित की जाएगी। पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों के एक वर्ग का समर्थन करने वाले समूह- राज्य समन्वय समिति ने गुरुवार को राज्य सचिवालय नबन्ना तक रैली आयोजित की।
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हर बंगाली जन्मजात वक्ता, पश्चिम बंगाल संस्कृति और विरासत से भरा राज्य
चीफ जस्टिस टीएस शिवगणनम ने कहा कि लूची, अलु पोस्तो और मिस्टी दोई की तरह लगता है कि सार्वजनिक रूप से जनसभा और रैली बंगाली संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि हर बंगाली जन्मजात वक्ता होता है। पश्चिम बंगाल संस्कृति और विरासत से भरा राज्य है।
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राजनीतिक कार्यक्रमों के कारण जनता को भारी असुविधा
सरकारी कर्मचारियों के समूह को मार्च की अनुमति देते हुए अदालत ने कहा, अब समय आ गया है कि रैली और जनसभा के आयोजक सड़कों पर उतरने के बजाय अपनी शिकायतें दर्ज कराने के वैकल्पिक तरीके और साधनों की तलाश करें। हाईकोर्ट ने इस बात को रेखांकित किया कि कोलकाता या पड़ोसी जिलों की मुख्य सड़कों से गुजरने वाली रैलियों और विरोध प्रदर्शनों के कारण जनता को भारी असुविधा झेलनी पड़ी है। इनमें राजनीतिक दलों की तरफ से आयोजित रैलियां और विरोध प्रदर्शन भी शामिल हैं।
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