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नंदीग्राम उपचुनाव: मिलन प्रधान को हाईकोर्ट से राहत की उम्मीद, कहा- जमानत मिलने पर ठीक से लड़ने दें चुनाव
Tue, 22 Sep 2026 04:04 PM IST
देवेश त्रिपाठी
पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Tue, 22 Sep 2026 04:04 PM IST
सार
दीग्राम उपचुनाव के कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की चुनावी भागीदारी का मामला कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचा है। प्रधान कई पुराने आपराधिक मामलों में न्यायिक हिरासत में हैं। मंगलवार की सुनवाई में अदालत ने राज्य सरकार के वकील से कहा कि यदि उन्हें जमानत मिलती है तो उन्हें चुनाव प्रक्रिया में ठीक से हिस्सा लेने दिया जाए।
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कलकत्ता हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
विस्तार
कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल सरकार के वकील से कहा कि अगर नंदीग्राम उपचुनाव के कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को पांच आपराधिक मामलों में जमानत मिल जाती है तो उन्हें चुनाव ठीक से लड़ने दिया जाए।
मिलन प्रधान को शनिवार को हल्दिया सब डिविजनल कोर्ट ने नंदीग्राम से जुड़े 2007 के चार लंबित गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट के मामलों में तीन अक्तूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा था। सोमवार को कंटाई अदालत ने भी करीब दो दशक पुराने आर्म्स एक्ट के एक मामले में कांग्रेस उम्मीदवार को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। यह हिरासत 5 अक्तूबर तक है।
नंदीग्राम में कब होना है उपचुनाव?
नंदीग्राम में उपचुनाव छह अक्तूबर को होना है। चुनाव प्रचार चार अक्तूबर को समाप्त होगा, जबकि मतगणना नौ अक्तूबर को होगी। कांग्रेस उम्मीदवार के वकील अयान भट्टाचार्य ने कहा था कि वह कंटाई अदालत के आदेश को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती देंगे।
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सोमवार को प्रधान की ओर से छह मामलों में कठोर कार्रवाई से सुरक्षा की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि इनमें से पांच मामले पिछली सरकार ने वापस ले लिए थे और एक अन्य मामले में प्रधान वांछित आरोपी नहीं हैं।
मिलन प्रधान के वकील ने हाईकोर्ट में दी क्या दलील?
प्रधान के वकील ने अदालत को बताया कि उन्हें 18 सितंबर को नंदीग्राम में 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों में गिरफ्तार किया गया था। वकील के मुताबिक, यह गिरफ्तारी तब हुई जब कांग्रेस उम्मीदवार को उपचुनाव में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी धड़े का समर्थन मिला था।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार से मौखिक रूप से कहा कि अगर प्रधान को जमानत मिल जाती है तो उन्हें चुनाव ठीक से लड़ने दिया जाए। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की अदालत में स्पष्ट किया कि प्रधान के खिलाफ कुल 11 आपराधिक मामले हैं। उन्होंने कहा कि प्रधान उन छह मामलों में वांछित नहीं हैं, जिनका जिक्र उनके वकील ने किया था और जिनमें पुलिस की कठोर कार्रवाई से सुरक्षा मांगी गई है।
हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार से क्या कहा?
मजूमदार ने यह भी कहा कि इन छह मामलों में से पांच को पिछली सरकार ने वापस ले लिया था। वहीं, नंदीग्राम थाने में दर्ज एक अन्य मामले में प्रधान आरोपी नहीं हैं। न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा कि ऐसी स्थिति में उन छह मामलों में कोई आदेश पारित करने की जरूरत नहीं है, जिनमें सुरक्षा मांगी गई है। अदालत ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए 12 अक्तूबर को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
प्रधान के वकील ने दलील देते हुए कहा कि वह उन पांच मामलों में राहत नहीं मांग रहे हैं, जिनमें उन्हें पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। दूसरी ओर, अतिरिक्त महाधिवक्ता मजूमदार ने कहा कि प्रधान की गिरफ्तारी निचली अदालत की ओर से 2007 के एक आपराधिक मामले में जारी वारंट के आधार पर हुई है और ये वारंट 2021 से लंबित थे।
मिलन प्रधान की गिरफ्तारी पर क्या बोली बंगाल सरकार?
उन्होंने कहा कि जब किसी इलाके में चुनाव होता है तो चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार संबंधित पुलिस प्राधिकरण की जिम्मेदारी होती है कि चुनाव से पहले सभी गिरफ्तारी वारंटों को तामील कराया जाए। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने यह भी कहा कि इस मामले में लंबित वारंट वाले प्रधान के अलावा अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया है।
प्रधान के वकील ने पुलिस से यह जानकारी देने की भी मांग की कि 11 मामलों के अलावा उनके खिलाफ कोई अन्य आपराधिक मामला दर्ज है या नहीं। निचली अदालतों के दोनों आदेशों के कारण प्रधान के लिए खुद चुनाव प्रचार करने का अवसर फिलहाल खत्म हो गया है। उन्हें चुनाव प्रचार में हिस्सा लेने के लिए जमानत हासिल करनी होगी।
नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव क्यों खास?
नंदीग्राम सीट का पश्चिम बंगाल की राजनीति में विशेष महत्व रहा है। 2007 में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन में शुभेंदु अधिकारी की भी भूमिका रही थी। इस आंदोलन का 2011 में वाम मोर्चा सरकार के सत्ता से बाहर होने में महत्वपूर्ण प्रभाव माना गया था।
2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट जीती थी। उन्होंने कोलकाता की भवानीपुर सीट से भी जीत दर्ज की थी। इसके बाद उन्होंने नंदीग्राम सीट खाली कर दी, जिसके बाद चुनाव आयोग ने यहां उपचुनाव की घोषणा की।
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मिलन प्रधान को शनिवार को हल्दिया सब डिविजनल कोर्ट ने नंदीग्राम से जुड़े 2007 के चार लंबित गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट के मामलों में तीन अक्तूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा था। सोमवार को कंटाई अदालत ने भी करीब दो दशक पुराने आर्म्स एक्ट के एक मामले में कांग्रेस उम्मीदवार को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। यह हिरासत 5 अक्तूबर तक है।
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नंदीग्राम में कब होना है उपचुनाव?
नंदीग्राम में उपचुनाव छह अक्तूबर को होना है। चुनाव प्रचार चार अक्तूबर को समाप्त होगा, जबकि मतगणना नौ अक्तूबर को होगी। कांग्रेस उम्मीदवार के वकील अयान भट्टाचार्य ने कहा था कि वह कंटाई अदालत के आदेश को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती देंगे।
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सोमवार को प्रधान की ओर से छह मामलों में कठोर कार्रवाई से सुरक्षा की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि इनमें से पांच मामले पिछली सरकार ने वापस ले लिए थे और एक अन्य मामले में प्रधान वांछित आरोपी नहीं हैं।
मिलन प्रधान के वकील ने हाईकोर्ट में दी क्या दलील?
प्रधान के वकील ने अदालत को बताया कि उन्हें 18 सितंबर को नंदीग्राम में 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों में गिरफ्तार किया गया था। वकील के मुताबिक, यह गिरफ्तारी तब हुई जब कांग्रेस उम्मीदवार को उपचुनाव में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी धड़े का समर्थन मिला था।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार से मौखिक रूप से कहा कि अगर प्रधान को जमानत मिल जाती है तो उन्हें चुनाव ठीक से लड़ने दिया जाए। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की अदालत में स्पष्ट किया कि प्रधान के खिलाफ कुल 11 आपराधिक मामले हैं। उन्होंने कहा कि प्रधान उन छह मामलों में वांछित नहीं हैं, जिनका जिक्र उनके वकील ने किया था और जिनमें पुलिस की कठोर कार्रवाई से सुरक्षा मांगी गई है।
हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार से क्या कहा?
मजूमदार ने यह भी कहा कि इन छह मामलों में से पांच को पिछली सरकार ने वापस ले लिया था। वहीं, नंदीग्राम थाने में दर्ज एक अन्य मामले में प्रधान आरोपी नहीं हैं। न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा कि ऐसी स्थिति में उन छह मामलों में कोई आदेश पारित करने की जरूरत नहीं है, जिनमें सुरक्षा मांगी गई है। अदालत ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए 12 अक्तूबर को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
प्रधान के वकील ने दलील देते हुए कहा कि वह उन पांच मामलों में राहत नहीं मांग रहे हैं, जिनमें उन्हें पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। दूसरी ओर, अतिरिक्त महाधिवक्ता मजूमदार ने कहा कि प्रधान की गिरफ्तारी निचली अदालत की ओर से 2007 के एक आपराधिक मामले में जारी वारंट के आधार पर हुई है और ये वारंट 2021 से लंबित थे।
मिलन प्रधान की गिरफ्तारी पर क्या बोली बंगाल सरकार?
उन्होंने कहा कि जब किसी इलाके में चुनाव होता है तो चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार संबंधित पुलिस प्राधिकरण की जिम्मेदारी होती है कि चुनाव से पहले सभी गिरफ्तारी वारंटों को तामील कराया जाए। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने यह भी कहा कि इस मामले में लंबित वारंट वाले प्रधान के अलावा अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया है।
प्रधान के वकील ने पुलिस से यह जानकारी देने की भी मांग की कि 11 मामलों के अलावा उनके खिलाफ कोई अन्य आपराधिक मामला दर्ज है या नहीं। निचली अदालतों के दोनों आदेशों के कारण प्रधान के लिए खुद चुनाव प्रचार करने का अवसर फिलहाल खत्म हो गया है। उन्हें चुनाव प्रचार में हिस्सा लेने के लिए जमानत हासिल करनी होगी।
नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव क्यों खास?
नंदीग्राम सीट का पश्चिम बंगाल की राजनीति में विशेष महत्व रहा है। 2007 में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन में शुभेंदु अधिकारी की भी भूमिका रही थी। इस आंदोलन का 2011 में वाम मोर्चा सरकार के सत्ता से बाहर होने में महत्वपूर्ण प्रभाव माना गया था।
2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट जीती थी। उन्होंने कोलकाता की भवानीपुर सीट से भी जीत दर्ज की थी। इसके बाद उन्होंने नंदीग्राम सीट खाली कर दी, जिसके बाद चुनाव आयोग ने यहां उपचुनाव की घोषणा की।