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बंगाल: कोलकाता नगर निगम चुनाव पर हाईकोर्ट की रोक, परिसीमन विवाद सुलझने तक जारी नहीं होगी अधिसूचना
Fri, 06 Nov 2026 01:33 PM IST
राहुल कुमार
पीटीआई, कोलकाता।
पीटीआई, कोलकाता।
Published by: राहुल कुमार
Updated Fri, 06 Nov 2026 01:33 PM IST
सार
कोलकाता नगर निगम चुनाव पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने परिसीमन से जुड़ी याचिका का निपटारा होने तक चुनाव की अधिसूचना जारी नहीं करने का आदेश दिया है। वार्डों की संख्या 144 से बढ़ाकर 209 करने की योजना पर सवाल उठे हैं। आखिर परिसीमन में क्या गड़बड़ी का आरोप है? क्या वास्तविक आबादी के बजाय मतदाता सूची को आधार बनाया गया? अब चुनाव कब होंगे? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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हाईकोर्ट ने चुनाव की अधिसूचना जारी करने पर रोक क्यों लगाई?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में नगर निगम चुनाव की तैयारी को बड़ा झटका लगा है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया है कि वार्डों के परिसीमन से जुड़ी याचिका का निपटारा होने तक चुनाव की अधिसूचना जारी न की जाए। अदालत के इस आदेश के बाद कोलकाता नगर निगम चुनाव की प्रक्रिया फिलहाल आगे नहीं बढ़ सकेगी। विवाद नगर निगम के वार्डों की संख्या और उनकी सीमाएं तय करने को लेकर है। नगर निगम ने आगामी चुनाव से पहले वार्डों का नए सिरे से परिसीमन करने की प्रक्रिया शुरू की है। इसके तहत वार्डों की संख्या 144 से बढ़ाकर 209 किए जाने की योजना है।
हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने शुक्रवार को यह आदेश दिया। पीठ में जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य और जस्टिस अर्जुन रे मुखर्जी शामिल थे। अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग को साफ निर्देश दिया कि एकल पीठ में लंबित परिसीमन से जुड़ी याचिका का निपटारा होने तक कोलकाता नगर निगम चुनाव कराने की अधिसूचना जारी न की जाए। यह याचिका पूर्व माकपा पार्षद दीपू दास ने दाखिल की है। उन्होंने वार्डों की संख्या तय करने और परिसीमन की पूरी प्रक्रिया को अवैध बताते हुए 11 सितंबर को जारी अधिसूचना रद्द करने की मांग की है। उनका आरोप है कि परिसीमन वास्तविक आबादी के बजाय मतदाता सूची के आधार पर किया गया है। इससे बड़ी संख्या में निवासियों को प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया।
हाईकोर्ट ने चुनाव की अधिसूचना जारी करने पर रोक क्यों लगाई?
दीपू दास ने अदालत से मांग की थी कि परिसीमन की अधिसूचना पर रोक लगाई जाए और राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव की अधिसूचना जारी करने से रोका जाए। उनका कहना है कि वार्डों की संख्या तय करने की पूरी प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है। याचिकाकर्ता ने परिसीमन को शून्य घोषित करने और 11 सितंबर की अधिसूचना रद्द करने की मांग भी की है। उनका आरोप है कि वार्डों का निर्धारण करते समय वास्तविक आबादी को आधार नहीं बनाया गया। इसके बजाय मतदाता सूची के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया। इस वजह से कई निवासियों को परिसीमन की प्रक्रिया में उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया। अदालत ने फिलहाल चुनाव की अधिसूचना जारी करने पर रोक लगाई है, लेकिन परिसीमन से जुड़ी मूल याचिका पर अंतिम फैसला अभी नहीं आया है।
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वार्डों की संख्या 144 से बढ़ाकर 209 करने की क्या है योजना?
कोलकाता नगर निगम ने आगामी निकाय चुनाव से पहले वार्डों की सीमाओं में बदलाव की प्रक्रिया शुरू की है। इस योजना के तहत मौजूदा 144 वार्डों की संख्या बढ़ाकर 209 करने की बात है। इसी प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता का कहना है कि वार्डों का निर्धारण वास्तविक जनसंख्या के आधार पर होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के आधार पर परिसीमन करने से बड़ी संख्या में स्थानीय निवासियों को नजरअंदाज किया गया। इसी आधार पर उन्होंने पूरी प्रक्रिया को चुनौती दी है। हालांकि, परिसीमन को लेकर उठाए गए ये आरोप याचिकाकर्ता के हैं। अदालत में इन पर अंतिम फैसला होना बाकी है।
एकल पीठ ने पहले क्या फैसला दिया था?
इस मामले में दीपू दास ने पहले हाईकोर्ट की एकल पीठ के सामने अंतरिम रोक लगाने की मांग की थी। 29 अक्टूबर को एकल पीठ ने उनकी मांग स्वीकार नहीं की थी। हालांकि, अदालत ने मामले से जुड़े पक्षों से जवाबी हलफनामे मांगे थे। अंतरिम राहत नहीं मिलने से नाराज होकर याचिकाकर्ता ने दो सदस्यीय पीठ के सामने अपील की। इसके बाद शुक्रवार को दो सदस्यीय पीठ ने राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि एकल पीठ में याचिका का निपटारा होने तक चुनाव की अधिसूचना जारी न की जाए। इस आदेश से फिलहाल चुनाव कार्यक्रम घोषित करने पर रोक लग गई है।
कोलकाता नगर निगम में फिलहाल कौन संभाल रहा है जिम्मेदारी?
याचिकाकर्ता दीपू दास ने अदालत में यह भी कहा कि कोलकाता नगर निगम में फिलहाल कोई निर्वाचित परिषद नहीं है। उनका दावा है कि नगर निगम का सदन 8 जून को भंग होने के बाद पूर्व अध्यक्ष स्मिता पांडे को प्रशासक नियुक्त किया गया था। इसी स्थिति को देखते हुए उन्होंने परिसीमन और चुनाव की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। अब एकल पीठ में लंबित याचिका पर सुनवाई और उसके फैसले के बाद ही चुनाव की अधिसूचना जारी करने का रास्ता साफ हो सकेगा। फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के कारण राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव की अधिसूचना जारी नहीं कर सकता।
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हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने शुक्रवार को यह आदेश दिया। पीठ में जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य और जस्टिस अर्जुन रे मुखर्जी शामिल थे। अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग को साफ निर्देश दिया कि एकल पीठ में लंबित परिसीमन से जुड़ी याचिका का निपटारा होने तक कोलकाता नगर निगम चुनाव कराने की अधिसूचना जारी न की जाए। यह याचिका पूर्व माकपा पार्षद दीपू दास ने दाखिल की है। उन्होंने वार्डों की संख्या तय करने और परिसीमन की पूरी प्रक्रिया को अवैध बताते हुए 11 सितंबर को जारी अधिसूचना रद्द करने की मांग की है। उनका आरोप है कि परिसीमन वास्तविक आबादी के बजाय मतदाता सूची के आधार पर किया गया है। इससे बड़ी संख्या में निवासियों को प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया।
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हाईकोर्ट ने चुनाव की अधिसूचना जारी करने पर रोक क्यों लगाई?
दीपू दास ने अदालत से मांग की थी कि परिसीमन की अधिसूचना पर रोक लगाई जाए और राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव की अधिसूचना जारी करने से रोका जाए। उनका कहना है कि वार्डों की संख्या तय करने की पूरी प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है। याचिकाकर्ता ने परिसीमन को शून्य घोषित करने और 11 सितंबर की अधिसूचना रद्द करने की मांग भी की है। उनका आरोप है कि वार्डों का निर्धारण करते समय वास्तविक आबादी को आधार नहीं बनाया गया। इसके बजाय मतदाता सूची के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया। इस वजह से कई निवासियों को परिसीमन की प्रक्रिया में उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया। अदालत ने फिलहाल चुनाव की अधिसूचना जारी करने पर रोक लगाई है, लेकिन परिसीमन से जुड़ी मूल याचिका पर अंतिम फैसला अभी नहीं आया है।
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वार्डों की संख्या 144 से बढ़ाकर 209 करने की क्या है योजना?
कोलकाता नगर निगम ने आगामी निकाय चुनाव से पहले वार्डों की सीमाओं में बदलाव की प्रक्रिया शुरू की है। इस योजना के तहत मौजूदा 144 वार्डों की संख्या बढ़ाकर 209 करने की बात है। इसी प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता का कहना है कि वार्डों का निर्धारण वास्तविक जनसंख्या के आधार पर होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के आधार पर परिसीमन करने से बड़ी संख्या में स्थानीय निवासियों को नजरअंदाज किया गया। इसी आधार पर उन्होंने पूरी प्रक्रिया को चुनौती दी है। हालांकि, परिसीमन को लेकर उठाए गए ये आरोप याचिकाकर्ता के हैं। अदालत में इन पर अंतिम फैसला होना बाकी है।
एकल पीठ ने पहले क्या फैसला दिया था?
इस मामले में दीपू दास ने पहले हाईकोर्ट की एकल पीठ के सामने अंतरिम रोक लगाने की मांग की थी। 29 अक्टूबर को एकल पीठ ने उनकी मांग स्वीकार नहीं की थी। हालांकि, अदालत ने मामले से जुड़े पक्षों से जवाबी हलफनामे मांगे थे। अंतरिम राहत नहीं मिलने से नाराज होकर याचिकाकर्ता ने दो सदस्यीय पीठ के सामने अपील की। इसके बाद शुक्रवार को दो सदस्यीय पीठ ने राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि एकल पीठ में याचिका का निपटारा होने तक चुनाव की अधिसूचना जारी न की जाए। इस आदेश से फिलहाल चुनाव कार्यक्रम घोषित करने पर रोक लग गई है।
कोलकाता नगर निगम में फिलहाल कौन संभाल रहा है जिम्मेदारी?
याचिकाकर्ता दीपू दास ने अदालत में यह भी कहा कि कोलकाता नगर निगम में फिलहाल कोई निर्वाचित परिषद नहीं है। उनका दावा है कि नगर निगम का सदन 8 जून को भंग होने के बाद पूर्व अध्यक्ष स्मिता पांडे को प्रशासक नियुक्त किया गया था। इसी स्थिति को देखते हुए उन्होंने परिसीमन और चुनाव की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। अब एकल पीठ में लंबित याचिका पर सुनवाई और उसके फैसले के बाद ही चुनाव की अधिसूचना जारी करने का रास्ता साफ हो सकेगा। फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के कारण राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव की अधिसूचना जारी नहीं कर सकता।