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Bengal: पूर्व राज्यसभा सांसद शांतनु सेन को राहत, हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल चिकित्सा परिषद के आदेश को किया रद्द

Mon, 07 Jul 2025 09:46 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता। Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 07 Jul 2025 09:46 PM IST
सार

Bengal: कलकत्ता हाईकोर्ट ने पूर्व सांसद शांतनु सेन का चिकित्सा पंजीकरण रद्द करने वाले पश्चिम बंगाल चिकित्सा परिषद के आदेश को रद्द कर दिया।  सेन पर आरोप था कि उन्होंने अपने लेटरहेड पर एक मानद उपाधि 'एफसीआरपी (ग्लासगो)' को डिग्री के रूप में इस्तेमाल किया। कोर्ट ने कहा कि परिषद का आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ था, इसलिए उसे रद्द किया गया।

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Cal HC sets aside cancellation of ex-MP Santanu Sen's medical registration
शांतनु सेन - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को तृणमूल कांग्रेस के निलंबित नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद शांतनु सेन को राहत देते हुए पश्चिम बंगाल चिकित्सा परिषद (डब्ल्यूबीएमसी) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उनके मेडिकल रजिस्ट्रेशन को दो साल के लिए रदद्द कर दिया गया था। डब्ल्यूबीएमसी ने चार जुलाई को एक आदेश जारी कर सेन को 'पेशे में खराब आचरण' और 'नैतिकता का उल्लंघन' बताकर उनके पंजीकरण को रद्द कर दिया था। 

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सेन पर आरोप था कि उन्होंने अपने आधिकारिक लेटरहेड पर 'फेलो ऑफ द रॉयल कॉलेज ऑफ फिजिशियन' (ग्लास्गो) उपाधि का इस्तेमाल किया, जो वास्तव में रॉयल कॉलेज ऑफ फिजिशियंस एंड सर्जन्स (ग्लासगो) से मिला एक मानद डिप्लोमा है, न कि मान्यता प्राप्त डिग्री। 
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जस्टिस अमृता सिन्हा की बेंच ने कहा कि डब्ल्यूबीएमसी का आदेश अस्पष्ट था और उसमें उचित कारणों का जिक्र नहीं किया गया था। ऐसे में याचिकाकर्ता को अपील करने का अधिकार भी नहीं मिल पाया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा कि यह आदेश एकतरफा और अस्पष्ट है, इसलिए इसे रद्द किया जाना उचित है। 

डब्ल्यूबीएमसी और सेन के बीच विवाद की शुरुआत 15 मई से हुई, जब परिषद ने स्वयं संज्ञान लेकर जांच शुरू की। सेन को नौ जून को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, लेकिन उनके वकील ने अदालत में बताया कि सेन को न तो औपचारिक रूप से कोई सूचना दी गई और न ही अंतिम दंड आदेश की जानकारी दी गई। उन्हें केवल काउंसिल की वेबसाइट पर यह जानकारी मिली।


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सेन के वकील ने कोर्ट में कहा कि उनके मुवक्किल को न कोई शिकायत, न सबूत और न ही कोई जांच रिपोर्ट सौंपी गई, जबकि परिषद दावा कर रही है कि उसके पास पुख्ता जानकारी और शिकायत थी। वहीं, राज्य के वकील किशोर दत्ता ने परिषद की ओर से दलील दी कि शिकायत पत्र और आरोपपत्र विस्तार से था और सेन सभी आरोपों से अवगत थे।

कोर्ट ने परिषद की इस दलील को खारिज कर दिया और कहा कि किसी व्यक्ति को पंजीकरण से हटाने के कारणों की जानकारी देना जरूरी है। कोर्ट ने डब्ल्यूबीएमसी को निर्देश दिया कि वह सेन को उस शिकायत, सबूत या जांच रिपोर्ट की प्रतियां दें, जिनके आधार पर कारण बताओ नोटिस और दंड आदेश जारी किया गया। साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया कि जब तक अगला निर्देश न आ जाए, तब तक सेन अपने लेटरहेड पर 'एफआरसीपी (ग्लासगो)' का प्रयोग न करें और इसकी जगह अपने ग्लासगो सर्टिफिकेट में दर्ज 'डिप्लोमा ऑफ फेलोशिप' शब्द का ही उपयोग करें।

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