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यूपीए के मुकाबले 2.86 फीसदी सस्ता हुआ सौदा, बचाया 17.08 फीसदी धन, पढ़ें राफेल पर कैग की पूरी रिपोर्ट

Thu, 14 Feb 2019 03:27 AM IST
संदीप भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: संदीप भट्ट Updated Thu, 14 Feb 2019 03:27 AM IST
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CAG report tabled before Rajya Sabha, says India saves 17.08% money in Rafale deal
प्रतीकात्मक तस्वीर

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की वायुसेना खरीद से जुड़ी रिपोर्ट बुधवार को राज्यसभा में पेश कर दी गई। इस रिपोर्ट में फ्रांस से हुए राफेल सौदे से जुड़े विवरण भी शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार के दौरान हुआ राफेल सौदा पूर्ववर्ती यूपीए सरकार द्वारा की गई डील की तुलना में 2.86 फीसदी सस्ता सस्ता पड़ा।


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इसके मुताबिक 126 विमानों की पुरानी डील की अपेक्षा 36 राफेल विमानों के नए सौदे में भारत ने 17.08 फीसदी पैसा बचाया है। वहीं, पुराने सौदे की अपेक्षा नई डील में 18 विमानों की डिलीवरी भी कम समय में हो रही है। इस रिपोर्ट से राजनीतिक तौर पर उलझी सरकार को राहत जरूर मिली है, लेकिन इसमें उन सवालों का जवाब नहीं है जिसे विपक्षी दल उठाते रहे हैं।

विपक्ष के हंगामे के बीच पेश 157 पेश की कैग रिपोर्ट में कहा है कि गया है कि यह सौदा न केवल यूपीए सरकार के समय हुई डील से सस्ते में हुआ बल्कि विमानों की आपूर्ति भी उससे जल्दी होगी। रिपोर्ट में तैयार विमानों की कीमत का खुलासा नहीं है।

रक्षा मंत्रालय कहता रहा है कि सौदा 59000 करोड़ का है, लेकिन रिपोर्ट में इसे शामिल नहीं किया गया है। सूत्रों के मुताबिक रक्षा मंत्रालय के अनुरोध पर ही कीमत को रिपोर्ट में जगह नहीं दी गई।

इसके साथ ही रक्षा मंत्रालय का वह दावा भी खारिज हो गया जिसमें कहा गया था कि एनडीए सरकार यूपीए से 9 फीसदी सस्ते में विमान खरीद रही है। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने राफेल बनाने वाली कंपनी दसॉल्ट एविएशन को बैंक गारंटी की छूट देकर सस्ते सौदे की जमीन तैयार की।

सौदे में अच्छा

  • यूपीए सरकार की तुलना में कीमत 2.86 फीसदी कम।
  • 72 की जगह 71 महीने में ही मिल जाएंगे सारे विमान।
  • 18 विमानों की डिलीवरी 126 विमानों की तुलना में बेहतर। शुरुआती 18 विमान 5 महीने पहले आ जाएंगे।

 

सौदे पर सवाल

  • यूपीए के समय विमानों के प्रदर्शन और वित्तीय गारंटी की बात, जो अनुबंध की 15 फीसदी राशि थी।
  • कानून मंत्रालय के सलाह पर रक्षा मंत्रालय ने संप्रभु गारंटी मांगी, फ्रांस सरकार ने लेटर ऑफ कम्फर्ट दिया।

 

सौदे में देरी क्यों

वायुसेना ने एयर स्टाफ क्वांटेटिव रिक्वायरमेंट (एएसक्यूआरएस) को सही तरीके से नहीं बताया। खरीद प्रक्रिया के दौरान इसे बदला गया। इससे तकनीक और मूल्य आकलन में दिक्कत हुई और विमान खरीद में देरी हुई।

दो सवालों का जवाब नहीं

  • कीमत का खुलासा नहीं किया गया है। रिपोर्ट में कीमत की बात करने के लिए ‘यू’ (अननोन मिलियन यूरो) कोडवर्ड का इस्तेमाल किया गया है।
  • ऑफसेट पार्टनर पर भी कुछ नहीं। कांग्रेस अनिल अंबानी की कंपनी को ऑफसेट पार्टनर बनाने को लेकर ही भ्रष्टाचार के आरोप लगा रही है।

सत्यमेव जयते

सत्यमेव जयते, महाझूठबंधन का झूठ बेनकाब हो गया। यह नहीं कहा जा सकता कि सुप्रीम कोर्ट गलत है, कैग गलत है और केवल ‘परिवार’ सही है। -अरुण जेटली, केंद्रीय मंत्री

जेपीसी क्यों नहीं

प्रधानमंत्री घबराए हैं। अफसर, वायुसेना और रक्षा मंत्रालय जानते हैं कि सौदे में चोरी हुई है। अगर भ्रष्टाचार नहीं है तो बीजेपी जेपीसी से क्यों डर रही है? -राहुल गांधी, अध्यक्ष कांग्रेस



यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट-

संसद में पेश सीएजी की पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ भी सकते हैं और डाउनलोड भी कर सकते हैं।


मार्च 2015 में रक्षा मंत्रालय की एक टीम ने 126 राफेल विमानों की खरीद का सौदा रद्द करने की सिफारिश की थी। टीम ने कहा था कि डसाल्ट एविएशन की बोली महंगी थी और ईएडीएस (यूरोपियन एरोनॉटिक्स डिफेंस एंड स्पेस कंपनी) पूरी तरह से आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं थी।

टीम ने 2015 के प्रस्ताव में कहा कि डसाल्ट एविएशन राफेल तकनीकी मूल्यांकन चरण में ही अस्वीकार कर दिया जाना चाहिए था क्योंकि यह आरएफपी की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं था।

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