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Pollution: कैग रिपोर्ट में खुलासा- वायु प्रदूषण में दिल्ली फिसड्डी, गैस चैंबर बनने के बाद भी नहीं हुए सुधार

Tue, 01 Apr 2025 09:47 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Tue, 01 Apr 2025 09:47 PM IST
सार

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक अप्रैल को विधानसभा के पटल पर वायु प्रदूषण पर कैग (CAG) की 108 पेज की रिपोर्ट रखी। पोर्ट में वायु प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए उठाए गए कई उपायों को हवा-हवाई बताया गया है।

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CAG On Air Pollution: CAG report reveals why Delhi is the worst in air pollution
वायु प्रदूषण - फोटो : PTI

विस्तार

सर्दियों के सीजन में दिल्ली 'गैस चैंबर' बन जाती है। लोगों के लिए यहां सांस लेना दूभर हो जाता है। अपनी इस नाकामी के कारण दिल्ली वायु प्रदूषण के मामले में दुनिया के सबसे खराब शहरों में गिनी जाती है। लेकिन कैग रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इस गंभीर स्थिति के बाद भी दिल्ली के नीति नियंताओं ने स्थिति को सुधारने के लिए अपेक्षित काम नहीं किया। प्रदूषण को कंट्रोल करने के नाम पर खूब जोर शोर से प्रचार किया गया, लेकिन जमीन पर नीतियों को लागू करने में बड़ी खामी रही जिसके कारण दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। 
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दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक अप्रैल को विधानसभा के पटल पर वायु प्रदूषण पर कैग (CAG) की 108 पेज की रिपोर्ट रखी। इसमें 31 मार्च 2021 तक के आंकड़ों का मूल्यांकन किया गया है। रिपोर्ट में वायु प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए उठाए गए कई उपायों को हवा-हवाई बताया गया है। यहां तक कि कैग ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली की एजेंसियों ((CAAQMS) के पास वे आंकड़े तक उपलब्ध नहीं थे जिनके आधार पर वायु प्रदूषण को कम करने के लिए कदम उठाए जाते। कुछ एजेंसियों द्वारा आंकड़े इकट्ठे करने की बात कही गई थी, लेकिन कैग ने पाया है कि इन एजेंसियों के आंकड़े केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों के अनुरूप नहीं थे। 
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प्रदूषण सर्टिफिकेट जारी करने में धांधली
कई सर्वे में यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि दिल्ली में वायु प्रदूषण का एक सबसे बड़ा कारण स्थानीय वाहनों के द्वारा किया जा रहा उत्सर्जन है। लेकिन कैग रिपोर्ट ने बताया है कि वाहनों को प्रदूषण सर्टिफिकेट देने के मामले में जमकर धांधली की जा रही है। रिपोर्ट जारी करने के पहले वाहनों की उचित तरीके से जांच भी नहीं की जा रही है। यहां तक कि कई बार एक ही प्रदूषण सर्टिफिकेट जारी करने वाले सेंटर से एक-दो मिनट के अंतर में ही कई प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए, जबकि एक वाहन की चेकिंग में ही कई मिनट समय लग जाता है। इससे साफ होता है कि प्रदूषण नियंत्रण सर्टिफिकेट जारी करने के मामले में धांधली हो रही है, लेकिन इस पर कोई रोक नहीं लगाई जा सकी है। 
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पुराने वाहन सड़कों पर दौड़ते रहे
2018 से 2021 के बीच दिल्ली में अधिक उम्र वाले 47.51 लाख वाहनों को सड़कों से हटाया जाना था। इनका रजिस्ट्रेशन नंबर रद्द कर इन वाहनों को सड़कों पर चलने से रोककर भी वाहनों के द्वारा होने वाले प्रदूषण पर रोक लगाने की कोशिश होनी चाहिए थी। लेकिन कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दौरान केवल 2.98 लाख वाहनों को ही सड़कों से हटाया जा सका। इससे दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति गंभीर बनी रही।

सार्वजनिक वाहनों की कमी  
दिल्ली में सार्वजनिक वाहनों की कमी के कारण भारी संख्या में लोग निजी वाहनों का उपयोग करने के लिए बाध्य होते हैं। कैग रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन के लिए बसों की उपलब्धता में भारी कमी है। डीटीसी पर जारी कैग की रिपोर्ट में भी इस बात का खुलासा हुआ था कि दिल्ली में सार्वजनिक क्षेत्र की डीटीसी बसों की संख्या में भारी कमी हुई है। इसके कारण लोगों ने निजी वाहनों का प्रयोग किया और प्रदूषण बढ़ा।

ई वाहनों को बढ़ावा देने की नीति का अप्रभावी होना
पूरी दुनिया में बैटरी से चलने वाले वाहनों को बढ़ावा देकर स्थानीय प्रदूषण में कमी की जाती है। दिल्ली में भी इस योजना का खूब प्रचार-प्रसार किया गया, लेकिन कैग का दावा है कि दिल्ली में ई-वाहनों को पर्याप्त बढ़ावा नहीं दिया जा सका। इसके लिए आधारभूत ढांचे में कमी और पर्याप्त प्रचार-प्रसार न होना एक कारण हो सकता है।

ऑड-इवेन की स्थिति खराब
पूर्ववर्ती दिल्ली सरकार ने ऑड-इवेन योजना लागू कर प्रदूषण में कमी लाने का दावा किया था। लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि यह योजना सही तरीके से लागू नहीं की गई जिसके कारण इसका अपेक्षित असर नहीं हुआ और दिल्ली के प्रदूषण को काबू नहीं किया जा सका। 


कांग्रेस ने किया हमला
दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कहा कि इस रिपोर्ट में पूरी जानकारी नहीं है। दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण पर पूरी रिपोर्ट पेश नहीं की है। इससे पता चलता है कि भाजपा और आम आदमी पार्टी इस मुद्दे पर एक-दूसरे से मिले हुए हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह शीला दीक्षित सरकार के अंदर सीएनजी चालित वाहनों को बढ़ावा देकर वायु प्रदूषण में कमी लाई गई थी, दिल्ली को उसी तरीके के प्रभावी कामकाज की आवश्यकता है। 
 
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