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Jan Vishwas Bill: कैबिनेट से जन विश्वास विधेयक में संशोधन को मंजूरी! संसदीय समिति ने केंद्र को दिए थे ये सुझाव

Wed, 12 Jul 2023 05:05 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 12 Jul 2023 05:05 PM IST
सार

Jan Vishwas Bill: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2023 को संभवत: मंजूरी दे दी। इसमें कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 42 अधिनियमों में 183 प्रावधानों में संशोधन कर छोटी-मोटी गड़बड़ियों को अपराध की श्रेणी से हटाने का प्रस्ताव किया गया है।

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Cabinet said to have approved amendments to Jan Vishwas Bill to decriminalise minor offences
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2023 को संभवत: मंजूरी दे दी। इसमें कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 42 अधिनियमों में 183 प्रावधानों में संशोधन कर छोटी-मोटी गड़बड़ियों को अपराध की श्रेणी से हटाने का प्रस्ताव किया गया है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

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इसमें 19 मंत्रालयों से जुड़े 42 अधिनियमों के 183 प्रावधानों में संशोधन करने का प्रस्ताव है। सूत्रों ने कहा कि यह विधेयक बुधवार को मंत्रिमंडल की बैठक में चर्चा के लिए आया।

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पीयूष गोयल ने पेश किया था विधेयक
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले साल 22 दिसंबर को लोकसभा में जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक पेश किया था। इसके बाद विधेयक को विचार के लिये संसद की संयुक्त समिति के पास भेज दिया गया।

रिपोर्ट को मार्च में दिया गया अंतिम रूप
समिति ने विधायी और विधि मामलों के विभागों के साथ-साथ सभी 19 मंत्रालयों के साथ विस्तृत चर्चा की है। रिपोर्ट को इस साल मार्च में अंतिम रूप दिया गया। उसी महीने उसे राज्यसभा और लोकसभा में पेश किया गया।

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समिति ने दिए थे ये सुझाव
संसदीय समिति ने केंद्र को कारोबार तथा जीवनयापन को सरल बनाने को बढ़ावा देने के लिये जन विश्वास विधेयक की तर्ज पर छोटे मामलों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के लिये राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रोत्साहित करने का सुझाव दिया था। समिति ने कहा था कि सरकार को पिछली तिथि से प्रावधानों में संशोधन करना चाहिए। इससे अदालतों में लंबित मामलों को निपटान में मदद मिलेगी। समिति ने यह भी सिफारिश की थी कि मुकदमों में वृद्धि से बचने के लिये जहां भी संभव हो कारावास के साथ जुर्माने को हटाकर नियम का उल्लंघन करने पर मौद्रिक दंड लगाया जाए।

छोटे-मोटे अपराधों को अपराधमुक्त करने का प्रस्ताव
विधेयक में छोटे-मोटे अपराधों को अपराधमुक्त करने के प्रस्ताव के अलावा अपराध की गंभीरता के आधार पर मौद्रिक दंड को तर्कसंगत बनाने, भरोसे पर आधारित राजकाज को बढ़ावा देने का भी प्रस्ताव किया गया है।

इन अधिनियमों में संसोधन का प्रस्ताव
जिन अधिनियमों में संशोधन किये जाने का प्रस्ताव है, उनमें औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940, सार्वजनिक ऋण अधिनियम, 1944, फार्मेसी अधिनियम, 1948, सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952, कॉपीराइट अधिनियम, 1957; पेटेंट अधिनियम, 1970, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 , मोटर वाहन अधिनियम, 1988, ट्रेड मार्क्स अधिनियम, 1999, रेलवे अधिनियम, 1989, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, मनी लांड्रिंग निरोधक अधिनियम, 2002, खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 आदि शामिल हैं।

ये 42 कानून विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों से संबद्ध हैं। इन मंत्रालयों में वित्त, वित्तीय सेवाएं, कृषि, वाणिज्य, पर्यावरण, सड़क परिवहन और राजमार्ग, डाक, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी शामिल हैं।

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