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हरी झंडी:.. अब 18 में नहीं 21 साल में दुल्हन बनेंगी बेटियां, प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी
Thu, 16 Dec 2021 12:38 PM IST
प्रशांत कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रशांत कुमार झा
Updated Thu, 16 Dec 2021 12:38 PM IST
सार
लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ाने के लिए जून 2020 में टास्क फोर्स का गठन किया गया था। टास्क फोर्स ने उसी साल दिसंबर में अपनी रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में बताया कि महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए शादी की उम्र बढ़ाने की आवश्यकता है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बेटियों की शादी की उम्र 18 से बढ़ाकर 21 साल करने करने के प्रस्ताव पर केंद्रीय कैबिनेट ने मुहर लगा दी है। बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को पास किया गया। केंद्र सरकार मौजूदा कानूनों में संशोधन के लिए संसद में प्रस्ताव पेश करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2020 को लाल किले से अपने संबोधन में लड़कियों की शादी की उम्र 21 साल करने का उल्लेख किया था। उन्होंने कहा था कि बेटियों को कुपोषण से बचाने के लिए जरूरी है कि उनकी शादी उचित समय पर हो।
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मौजूदा कानून के मुताबिक, देश में पुरुषों की विवाह की न्यूनतम उम्र 21 और महिलाओं की 18 साल है, लेकिन सरकार अब महिलाओं को सशक्त करने के लिए उनकी शादी की उम्र बढ़ाने पर विचार कर रही है। सरकार बाल विवाह निषेध कानून, स्पेशल मैरिज एक्ट और हिंदू मैरिज एक्ट में संशोधन करेगी।
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महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए उठाया गया कदम- जया जेटली
सरकार ने साल 2020 के जून माह में इसको लेकर टास्क फोर्स का गठन भी किया था। टास्क फोर्स ने उसी साल विवाह की आयु बढ़ाने के प्रस्ताव पर अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। समता पार्टी की पूर्व सदस्य और टास्क फोर्स की प्रमुख जया जेटली ने इसकी सिफारिश की थी। यह कदम महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए था न कि जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए।
टास्क फोर्स का कहना था कि पहले बच्चे को जन्म देते समय बेटियों की उम्र 21 साल से होनी चाहिए। विवाह में देरी का परिवारों, महिलाओं, बच्चों और समाज के आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।