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पूर्व सांसदों को तीन दिन में खाली करना होगा सरकारी बंगला
amarujala.com- Presented by: संदीप भट्ट
Updated Thu, 18 May 2017 05:08 AM IST
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कानून की खामियों का नाजायज फायदा उठाते हुए सरकारी बंगलों में वर्षों से जमे हुए सांसदों और बाबुओं को अब हटना पड़ेगा। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को इससे संबंधित कानून में संशोधन को मंजूरी दे दी है।
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कैबिनेट ने सरकारी आवास (अनधिकृत कब्जा विरोधी) अधिनियम, 1971 में बदलाव को मंजूरी देते हुए अधिकारियों को यह अधिकार दे दिया है कि यदि वे किसी सांसद या बाबू के निर्धारित अवधि से अधिक समय तक रहने के तर्क से सहमत नहीं होते हैं तो वे ऐसे लोगों से तीन दिन के अंदर बंगला या आवास खाली करा सकते हैं। इस संशोधन अधिनियम से ऐसे कब्जाधारकों को हाईकोर्ट से नीचे किसी अदालत में अपील करने का अधिकार भी नहीं रह जाएगा।
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वर्तमान में ऐसे कब्जाधारकों को नोटिस जारी करने और उनका पक्ष सुनने के बाद मकान खाली करने के लिए लगभग एक महीने का समय दिया जाता है। इस दौरान कब्जाधारक किसी निचली अदालत में अपील कर स्थगन आदेश ले आता है।
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लेकिन नए संशोधन अधिनियम के तहत उन्हें नोटिस मिलने के तीन दिन के अंदर मकान खाली करना होगा। कब्जाधारक यदि आदेश का पालन नहीं करता है तो अधिकारी जबरन उनका मकान खाली करा सकते हैं।
फिलहाल लगभग 70 ऐसे अधिकारी हैं जिन्होंने अदालत से स्थगन आदेश लेकर खाली करने की निर्धारित तारीख के बाद दो वर्षों से अधिक समय से सरकारी आवास पर कब्जा जमाया हुआ है। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने भी आदेश से स्थगन आदेश लेकर इसी तरह दो वर्षों से बंगले में जमे हुए हैं।