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30 के बाद 10,000 के पुराने नोट मिले तो होगी जेल

Thu, 29 Dec 2016 03:25 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 29 Dec 2016 03:25 AM IST
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cabinet clears ordinance to impose penalty for holding old notes
कैश में तनखवाह नहीं - फोटो : self

चलन से बाहर किए गए 500 और 1000 रुपये के नोट जमा करने की मियाद खत्म होने से पहले ही सरकार ने इन्हें रखने वालों पर एक नए अध्यादेश का चाबुक चला दिया है। कैबिनेट से मंजूर इस अध्यादेश में 10 से अधिक संख्या में पुराने नोट रखने वालों को जेल की सजा और जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। 

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विशेष बैंक नोट दायित्व निवारण अध्यादेश के मुताबिक, 31 मार्च के बाद निर्धारित सीमा से अधिक इन नोटों को रखना अपराध माना जाएगा और यह अपराध करने वालों पर 10 हजार रुपये या रखे गए नोट का पांच गुना जुर्माना, जो भी अधिक होगा, लगाया जाएगा।
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इसके अलावा 1 जनवरी से 31 मार्च के बीच पुराने नोट जमा करने के दौरान गलत जानकारी देने पर भी 5000 रुपये या जमा की जा रही रकम का पांच गुना जुर्माना लगाया जा सकता है। अध्यादेश के प्रावधानों के अनुसार दस से अधिक अमान्य नोट रखने वालों पर वित्तीय जुर्माना लग सकता है और कुछ मामलों में चार साल तक जेल की सजा भी हो सकती है। 
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सरकारी सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने इस अध्यादेश को मंजूरी दी है। अब यह अध्यादेश राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा और उनकी मंजूरी के बाद यह कानून प्रभावी हो जाएगा। गौरतलब है कि सरकार ने 30 दिसंबर के बाद 31 मार्च तक रिजर्व बैंक की कुछ खास शाखाओं में हलफनामे के साथ पुराने नोट जमा कराने की व्यवस्था की है। इस अध्यादेश के जरिये आरबीआई अधिनियम में भी संशोधन किया गया है जिसके तहत चलन से बाहर किए गए नोटों को नष्ट करने में कानूनी मदद मिल सके। 

आठ नवंबर, 2016 की मध्य रात्रि को 500 और 1000 रुपये के नोट चलन से बाहर करने की घोषणा तो कर दी गई लेकिन समझा जाता है कि महज अधिसूचना जारी कर केंद्रीय बैंक का दायित्व खत्म नहीं हो जाता और भविष्य में सरकार को मुकदमे भी झेलने पड़ सकते हैं इसलिए यह अध्यादेश लाना जरूरी था। करेंसी नोट पर आरबीआई धारक को उतने मूल्य की राशि अदा करने का वचन देता है और यह वादा हर किसी को पुराने नोट जमा करने का पर्याप्त मौका देने के बाद सिर्फ कानून बनाकर ही बेअसर किया सकता है। 

अध्यादेश को कानून की शक्ल देने के लिए छह महीने के अंदर संसद में कानून पारित कराना होगा। अध्यादेश में साफ कहा गया है कि 10 हजार रुपये से अधिक मूल्य वाले 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट रखना, हस्तांतरित करना या प्राप्त करना दंडनीय अपराध माना जाएगा। कोई भी व्यक्ति अधिकतम 10 नोट रख सकता है।

बैंक या डाकघर में पुराने नोट रखने की मियाद 30 दिसंबर को खत्म हो रही है लेकिन इसके बाद 31 मार्च तक वैसे लोग ही आरबीआई की खास शाखाओं में ये नोट जमा करा सकते हैं जो विदेशों में हैं, दूरदराज क्षेत्रों में तैनात सशस्त्र बल के जवान हैं या जो जायज वजह बता पाएंगे कि अब तक वे नोट क्यों नहीं जमा करा पाए। बैंकों में अब तक 14 लाख करोड़ रुपये के पुराने नोट जमा कराए या बदले जा चुके हैं जबकि 500 और 1000 रुपये के नोटों का मूल्य 15.4 लाख करोड़ रुपये है। 


सजा और समय को लेकर अध्यादेश अस्पष्ट
सूत्रों का कहना है कि कैबिनेट के समक्ष प्रस्ताव रखा गया कि 31 मार्च 2017 के बाद निश्चित संख्या से अधिक पुराने नोट रखने वाले को चार साल की सजा दी जाए, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इसे मंजूरी मिली या नहीं। इसी तरह अध्यादेश में यह भी नहीं बताया गया है कि जुर्माने का प्रावधान 30 दिसंबर को समाप्त हो रही 50 दिनों की अवधि के बाद लागू होगा या 31 मार्च के बाद।

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