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जामिया मिल्लिया कैंपस में हिंसा को तूल नहीं, एएमयू को लेकर केंद्र आशंकित

Thu, 19 Dec 2019 02:49 AM IST
गौरव पाण्डेय गुंजन कुमार, नई दिल्ली
गुंजन कुमार, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 19 Dec 2019 02:49 AM IST
सार

  • केंद्रीय विश्वविद्यालयों में फैली हिंसा के असर पर केंद्र सरकार पूरी तरह सतर्क
  • एएमयू में फिर हिंसा भड़कने की आशंका, केंद्र सरकार मंगवा रही रोजवार रिपोर्ट  
  • जामिया मिल्लिया इस्लामिया कैंपस के अंदर हुई हिंसा जांच के दायरे में नहीं

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CAA Protest : Government is apprehensive about Aligarh Muslim University, Jamia issue is neglected
एएमयू में प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नागरिकता कानून के विरोध में केंद्रीय विश्वविद्यालयों में फैली हिंसा के असर को लेकर केंद्र सरकार पूरी तरह सतर्क है। सरकार दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया की हिंसा को तूल नहीं देना चाहती। यही वजह है कि विश्वविद्यालय कैंपस के भीतर हुई हिंसा की न तो पुलिस चर्चा कर रही है और ना ही गृह मंत्रालय। छात्रों और कर्मचारियों को क्लीन चिट दे दी गई है।

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दूसरी तरफ केंद्र को अंदेशा है कि अलीगढ़ मुसलिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में हिंसा फिर भड़केगी। एएमयू पर पैनी नजर रखी जा रही है और प्रशासन से रोजवार रिपोर्ट देने  को कहा गया है। सरकार का कहना है कि बाकी चालीस केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रदर्शन शांतिपूर्ण है।
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सूत्रों ने बताया कि जामिया मिल्लिया कैंपस के भीतर मौजूद लगे करीब दर्जन सीसीटीवी कैमरे और उसके हार्ड डिस्क जांच के दायरे में नहीं हैं। कॉलेज प्रशासन ने पुलिस और सरकार को बताया है कि कैमरे टूट गए और हार्ड डिस्क भी नष्ट हो गईं। लेकिन ऐसा किसने किया इसकी जांच को लेकर टालमटोल हो रहा है। 
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सरकार ने जामिया प्रशासन से हिंसा में हुए नुकसान की भरपाई का वादा किया है। पुलिस का सारा फोकस कैंपस के बाहर सड़कों पर रविवार को हुई हिंसा पर है। इस मामले में 10 बाहरी लोगों की गिरफ्तारी हुई है। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक जामिया हिंसा असामाजिक तत्वों द्वारा सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई। सूत्रों के मुताबिक कैंपस के भीतर तोड़फोड़ छात्रों या जामिया स्टाफ ने की या पुलिस ने यह साफ नहीं है।

उधर अलीगढ़ से आ रही अंदरूनी रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस के टीयर गैस सेल की फायरिंग की वजह से एक पीएचडी छात्र के हाथ कटने और दूसरे की उंगलियां कटने की वजह से छात्रों में तनाव है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि वहां हिंसा फिर भड़क सकती है।

सूत्रों ने मुताबिक जामिया प्रशासन ने केंद्र सरकार को अब तक तीन रिपोर्ट भेजी हैं। पहली रिपोर्ट 13 दिसंबर को भेजी गई जब कैंपस के भीतर हिंसा और तोड़फोड़ हुई। दूसरी रिपोर्ट 16 दिसंबर को और तीसरी 17 दिसंबर को भेजी गई। इस रिपोर्ट में क्या है इसकी चर्चा अफसरों के बीच नहीं।


सूत्रों ने बताया कि जामिया हॉस्टल के छात्रों को अपने घर जाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। लेकिन प्रशासन ने हॉस्टल छोड़ कर नहीं जाने वाले छात्रों के लिए खास इंतजाम किया है। छात्रों के चार-पांच के ग्रुप पर एक प्रोफेसर को लगाया गया है जो इनपर नजर रखें।

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