सीपीटी, सीए फाइनल और फाउंडेशन के नतीजे घोषित, दर्जी के बेटे ने किया ऑल इंडिया टॉप
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इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) ने नवंबर में हुई फाइनल (ओल्ड, न्यू) सीपीटी, फाउंडेशन परीक्षा के नतीजे घोषित कर दिए हैं। फाइनल ओल्ड परीक्षा के नतीजों में कोटा के शादाब हुसैन ने 74.63 फीसदी अंकों के साथ ऑल इंडिया टॉप किया है। उन्हें 800 में से 597 अंक प्राप्त हुए हैं। वहीं दूसरे स्थान पर कोडे (गुजरात) के शाहिद हुसैन शौकत ने 800 में से 584 अंक लेकर 73 फीसदी अंक प्राप्त किए हैं। वहीं फाइनल न्यू परीक्षा में राजस्थान के सिद्धांत भंडारी टॉपर बने हैं। उन्हें 800 में से 555 अंक मिले हैं। जबकि दूसरे स्थान पर 68 फीसदी अंकों के साथ रायपुर के रोहित कुमार सोनी रहे हैं।
फाइनल ओल्ड परीक्षा में पहले ग्रुप में कुल 32,633 परीक्षा बैठे थे, जिसमें से 9934 ने परीक्षा पास की है। वहीं दूसरे ग्रुप में 35655 परीक्षार्थी बैठे थे जिसमें 8348 पास घोषित किए गए हैं। इसी तरह से दोनों ग्रुप की परीक्षा में 3388 परीक्षार्थी पास रहे हैं। फाइनल न्यू की पहले की ग्रुप की परीक्षा में 6181 में से 884 और दूसरे ग्रुप की परीक्षा में 3307 में से 894 पास किए गए हैं। दोनों ग्रुप (दोनों ग्रुप में से किसी एक में पास) की परीक्षा में 670 परीक्षार्थी पास रहे हैं।
फाउंडेशन परीक्षा : गर्वित जैन ने किया टॉप
फाउंडेशन परीक्षा के नतीजों में देवास के गर्वित जैन ने 93.50 फीसदी के साथ ऑल इंडिया टॉप किया है। उन्होंने 400 में से 374 अंक प्राप्त किए हैं, जबकि दूसरे स्थान पर फरीदाबाद के क्षितिज मित्तल रहे हैं। उन्हें 400 में से 370 अंक मिले हैं। फाउंडेशन में कुल 48, 702 परीक्षार्थी बैठे थे, जिसमें से 21, 488 पास घोषित किए गए हैं। फाउंडेशन का पास प्रतिशत 44.12 फीसदी रहा है। कॉमन प्रोफिशेंसी टेस्ट (सीपीटी) में 25037 में से केवल 9038 फीसदी छात्र पास रहे हैं। सीपीटी का पास प्रतिशत 36.10 फीसदी रहा है।
दर्जी के बेटे ने पहले प्रयास में ही किया टॉप
कोटा के रहने वाले शादाब हुसैन फाइनल (ओल्ड) के ऑल इंडिया टॉपर रहे। शादाब को यह सफलता उनके पहले प्रयास में ही मिल गई। शादाब ने कोटा विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है। उनके पिता दर्जी हैं और उन्होंने 10वीं तक पढ़ाई की है। शादाब की चार बहनें हैं। गरीब और कम पढ़े-लिखे होने के बावजूद शादाब के माता-पिता ने उसे अच्छी शिक्षा दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अब शादाब ने भी टॉप कर उनकी मेहनत सफल कर दी।
शादाब का कहना है, 'मैंने नौकरी के लिए दिन-रात पढ़ाई की ताकि मैं अपने पैरों पर खड़ा हो सकूं और माता-पिता को परेशान न होना पड़े। मैंने सीए के क्षेत्र में जाने का विचार बनाया, यह ऐसा प्लेटफॉर्म हैं जहां जीवनभर लोग सीखते रहते हैं। काफी सोच विचार करने के बाद मैंने सीए बनने का निश्चय किया था।'
23 वर्षीय शादाब ने दिन के 13-14 घंटे पढ़ाई को दिए। शादाब कहते हैं, 'तीन घंटे पढ़ाई के बाद मैं 30-40 मिनट का ब्रेक लिया करता था। इसके साथ ही हर रोज 2-3 किलोमीटर पैदल भी चलता था। इससे मुझे तनाव कम करने में दद मिलती थी। जैसे-जैसे परीक्षा नजदीक आ रही थी मैंने पढ़ाई का समय कम किया जिससे मेरा दिमाग अलर्ट रहे।'