आज भी 70- 80 फीसदी आबादी इलाज के लिए निजी क्षेत्र पर निर्भर
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स्वास्थ्य बजट से काफी उम्मीदें हैं, लेकिन किस हद तक पूरा हो पाता है यह बजट पेश होने के बाद ही पता लग पाएगा। प्राथमिक और आपातकालीन चिकित्सा सेवा पर सबसे ज्यादा ध्यान देना चाहिए, चाहे वह सरकारी हो या निजी क्षेत्र के अस्पताल, क्योंकि अभी भी 70 से 80 फीसदी आबादी इलाज के लिए निजी क्षेत्र पर निर्भर है। यह तभी संभव हो पाएगा जब सरकार स्वास्थ्य बजट पर कम से कम जीडीपी का दो फीसदी खर्च करे।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के प्रेसिडेंट डॉ. केके अग्रवाल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करना है तो सबसे पहले प्राथमिक और आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है। इसके लिए सरकार को स्वास्थ्य बजट के दौरान निजी या सरकारी क्षेत्र नहीं, बल्कि मरीज की सुविधा को प्राथमिकता देनी चाहिए।
मरीज को प्राथमिक और आपातकालीन चिकित्सा हर हाल में घर के नजदीक मिलनी चाहिए, चाहे वह निजी हो या सरकारी अस्पताल और इसकी व्यवस्था सरकार को करनी चाहिए। इसके लिए सरकार को स्वास्थ्य बजट पर जीडीपी का कम से कम दो फीसदी खर्च करना चाहिए।
पिछड़े लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए
पीएसआरआई अस्पताल बिजनेस डेवलपमेंट प्रमुख नवीन शर्मा का कहना है आर्थिक तौर पर पिछड़े लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए। देश में विशेषज्ञ चिकित्सकों, नर्सेज, चिकित्सा कर्मियों की कमी एक बड़ी समस्या है इस ओर ध्यान देने की जरूरत है।
बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. अनिल बंसल का कहना है कि सरकार को विदेशों से आयात होने वाली मेडिकल इक्यूपमेंट की कीमतों को कम करने पर काम करना चाहिए। इससे देश के मरीजों को सस्ता इलाज मिलने में मदद मिलेगी।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 50 फीसदी से ज्यादा लोग अपनी आर्थिक क्षमता से ज्यादा अपने इलाज पर खर्च करते हैं और हर वर्ष करीब 6 करोड़ लोग इलाज में हुए ज्यादा खर्च की वजह से गरीबी रेखा के नीचे चले जाते हैं।