फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Budget Income of Rs 10 lakh may be tax free big pressure on finance minister to give relief to middle class

Budget:10 लाख की आय हो सकती है 'कर मुक्त', मध्यवर्ग को राहत देने को लेकर वित्तमंत्री पर बड़ा दबाव

Mon, 27 Jan 2025 10:59 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Mon, 27 Jan 2025 10:59 PM IST
सार

Budget 2025:  इस बार सरकार 10 लाख की आय को आयकर के दायरे से मुक्त करके लोक लुभावन घोषणा कर सकती है। हालांकि, मुख्य मुद्दों पर किसी तरह का कोई विशेष सुधार का कदम उठाए जाने की उम्मीद कम है।

विज्ञापन
Budget Income of Rs 10 lakh may be tax free big pressure on finance minister to give relief to middle class
बजट - फोटो : अमर उजाला/एजेंसी

विस्तार

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2025 को आम बजट पेश करेंगी। देश के सबी वर्गों को बड़ी उम्मीद है, हालांकि अर्थशात्रियों का कहना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की चुनौती ने सरकार के हाथ बांध रखे हैं। चुनावों में फ्री..फ्री.. की घोषणा, शिक्षा, स्वास्थ्य, किसानी, मध्यवर्ग का भी बड़ा दबाव है। अर्थशास्त्री सारथी आचार्य कहते हैं कि इस बार सरकार 10 लाख की आय को आयकर के दायरे से मुक्त करके लोक लुभावन घोषणा कर सकती है।
विज्ञापन


देश के पूर्व बैंकिंग सचिव और अर्थशास्त्री डीके मित्तल को भी कुछ इसी तरह की घोषणा की उम्मीद है, लेकिन उन्हें मुख्य मुद्दों पर किसी तरह का कोई विशेष सुधार का कदम उठाए जाने की उम्मीद कम है। डीके मित्तल कहते हैं कि सरकार की आर्थिक सलाहकारों की टीम में भी नए सुधार वाले दृष्टिकोण के लोग नहीं दिखाई दे रहे हैं। अभी राज्य सरकारें और केन्द्र सरकार जनता को फ्री..फ्री.. का वादा करती जा रही हैं। इसके कारण कामगारों का संकट अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन रहा है। केन्द्र को इस बारे में भी सोचना और प्रावधान करना होगा।
विज्ञापन


सबसे बड़ी जरूरत विश्वास जगाने की है
डीके मित्तल कहते हैं कि देश की आर्थिक वृद्धि में दो चीजें बहुत महत्वपूर्ण हैं। पहली है वृद्धि और दूसरी है विश्वास, भरोसा। आज अर्थव्यवस्था में वृद्धि का सरकार चाहे जितना अच्छा दावा कर ले, लेकिन निवेशक में विश्वास का बड़ा संकट है। इसके लिए सरकार को सरलीकरण अपनाना होगा। देश की अर्थव्यवस्था अधिकांश केन्द्रीय कानून पर चल रही है। इसलिए पहला कदम भी केन्द्र को ही उठाना होगा। देश का निर्यात देख लीजिए, चुनौती है। देखना चाहिए कि देश में किस नए उत्पाद का निर्यात हो रहा है। 50-60 बड़े निर्यातकों में 10-15 को चोड़ दें तो कुछ खास बताने के लिए नहीं है। सरकार भी नहीं पूछती कि निर्यात को बढ़ावा क्यों नहीं हो पा रहा है। कैसे किया जाए। इसके लिए क्या करना चाहिए? लघु, सूक्ष्म एवं मजोले उद्योग लगातार कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। सारथी आचार्य भी कहते हैं कि भारत असेम्बलिंग हब बनता रहा है। हम 40 साल बाद भी कावेरी इजन विकसित नहीं कर सके। इसलिए सरकार जबतक सुधार या मुख्य मुद्दों से जुड़े मामले में राजनीतिक शक्ति नहीं दिखाती, तबतक कुछ खास घोषणा होने की उम्मीद नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन


राज्य को ज्यादा आर्थिक स्वतंत्रता के आसार
सारथी आचार्य कहते हैं कि राज्यों की सरकार और केन्द्र की सरकार ने फ्री..फ्री का फार्मूला अपना लिया है। केन्द्र की सरकार भी सहयोगी दलों के भरोसे हैं। इसलिए वित्त आयोग के फार्मूले पर राज्यों को जो 40-42 फीसदी हिस्सी जाता था, वह अब 50 प्रतिशत तक जा सकता है। इस तरह से राज्यों को आर्थिक स्वतंत्रता थोड़ा अधिक मिल सकती है। लेकिन अभी यही लग रहा है कि सरकार के पास किसानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, मंहगाई, बेरोजगारी समेत तमाम क्षेत्र में कुछ सुधार करने के लिए बजट नहीं है। सोच में भी नहीं है। उम्मीद यही है कि कुछ लोकलुभावन वाली घोषणा के सहारे आम बजट को पेश करेगी। उसका मुख्य ध्यान एफडीआई, पीएसयू में हिस्सेदारी बेचने आदि पर रह सकता है। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश से बाहर जाने वाला भारतीयों का पैसा और विदेशों में उनका निवेश है। देखना होगा कि आम बजट में सरकार कैसे इस रफ्तार को रोकने पर ध्यान देती है।


ध्यान से देखिए बदल रहा है देश, यह रफ्तार को रोक नहीं सकते
पिछले साल केन्द्रीय मंत्रालय से सचिव पद से रिटायर हुए आईआरएस अधिकारी हैं। नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश की तस्वीर बदल रही है। वंदे भारत ट्रेन की रफ्तार बढ़ा रही है। मेट्रो परिवहन शहरों की रफ्तार बढ़ा रहा है। एक्सप्रेसवे पर फर्राटा भरते वाहन देश के राज्यों को जोड़ रहे हैं। देश में गाड़ियों के बिकने की रफ्तार देख लीजिए। रियल स्टेट भी खड़ा होने लगा है। यूपीआई के जरिए भुगतान में भारत ने बड़ी छलांग लगाई है। फिनटेक कंपनियों ने तमाम नए पड़ाव जोड़े हैं। बैंको की स्थिति में गुणात्मक सुधार हुआ है। डिजिटल इंडिया से केवल नुकसान ही नहीं हो रहा है। यह सब कहीं न कहीं से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा है। सरकार इसे बंद नहीं कर सकती। सूत्र का कहना है कि मंहगाई, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य की चुनौतियां हैं। खेती-किसानी को भी उठाना है और गांव को शहर से जड़नो को साथ-साथ इसे अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाने का भी प्रयास करना है। इसलिए आपको बजट में बहुत आशावान रहना चाहिए। वरिष्ठ सूत्र का कहना है कि इस समय वैशिवक अर्थव्यवस्था में बड़ी अनिश्चितता बनी हुई है। इसलिए सरकार को आने वाले कल का भी सोचकर चलना है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed