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Budget 2023: क्या है हलवा सेरेमनी? जो फिर पुराने रूप में लौटेगी, मोदी राज में बजट परंपराओं में हुए ये बदलाव

Wed, 25 Jan 2023 05:09 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Wed, 25 Jan 2023 05:09 PM IST
सार

एक फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में बजट पेश करेंगी। पिछले साल पहली बार बजट पेश होने से पहले हर साल परंपरागत तौर पर मनाई जाने वाली हलवा सेरेमनी नहीं मनाई गई थी। इसकी जगह कर्मचारियों में मिठाई बांटी गई थी।

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Budget 2023: What is Halwa Ceremony, changes in budget traditions in Modi reign
बजट 2023 - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को लोकसभा में बजट पेश करेंगी। मौजूदा मोदी सरकार का यह अंतिम पूर्ण बजट होगा। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि वित्त मंत्री इस बार के बजट में कोई बड़ी घोषणाएं कर सकती करेंगी। वित्त मंत्री सीतारमण टैक्स स्लैब में संशोधन कर भारतीय करदाताओं को राहत देंगी इस बात की भी अटकलें लग रही हैं।
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बजट तैयार होने से लेकर उसे पेश करने तक के दौरान कई परंपराएं निभाई जाती हैं। इनमें से एक है हलवा सेरेमनी। पिछले साल पहली बार बजट पेश होने से पहले हर साल परंपरागत तौर पर मनाई जाने वाली हलवा सेरेमनी नहीं मनाई गई थी। इसकी जगह कर्मचारियों में मिठाई बांटी गई थी। परंपरा में बदलाव कोरोना के दिशानिर्देशों के कारण किया गया था। हालांकि, इस बार परंपरागत तौर पर होने वाली हलवा सेरेमनी फिर से होगी। गुरुवार को इसका आयोजन होगा। आइये जानते हैं हलवा सेरेमनी क्या है? मोदी सरकार में बजट की परंपराओं में क्या-क्या बदलाव हुए... 
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Budget 2023: What is Halwa Ceremony, changes in budget traditions in Modi reign
हलवा रस्म - फोटो : ANI
क्या है हलवा सेरेमनी
मीठी शुरुआत के तौर पर हलवा सेरेमनी एक परंपरागत बजट पूर्व कार्यक्रम है जिसे बजट की छपाई से पहले मनाया जाता रहा है। कहा जाता है लंबे समय तक चलने वाली बजट बनाने की प्रक्रिया की समाप्ति के बाद मीठा खाकर बजट की छपाई को औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाई जाती रही। वित्त मंत्री कढ़ाई को हिलाती हैं और अधिकारियों को हलवा परोसकर इसकी हरी झंडी दिखाई जाती है। यह समारोह वित्त मंत्रालय के नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में होता है, जहां एक विशेष प्रिंटिंग प्रेस है। 
 
कहते हैं कि संसद में बजट पेश होने से पहले करीब 10 दिनों तक बजट से जुड़े वित्त मंत्रालय के अधिकारी और कर्मचारी नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में ही रहते हैं। जहां पूरी गोपनीयता रखी जाती है। दावों के मुताबिक मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों पर इंटेलिजेंस ब्यूरो की चौबीसों घंटे निगरानी रहती है, उन्हें प्रियजनों से संपर्क करने की भी अनुमति नहीं होती। यहां तक की उन्हें फोन करने की भी इजाजत नहीं होती है। सीसीटीवी का एक मजबूत नेटवर्क और जैमर उन्हें बाहरी संपर्क से काट कर रखता है। 

बताया जाता है 1950 तक  बजट दस्तावेज की छपाई राष्ट्रपति भवन में होती रही लेकिन उसी वर्ष एक लीक हो जाने के बाद इसे मिंटो रोड और बाद में नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में स्थानांतरित कर दिया गया। बजट की छपाई स्थायी रूप से इसी प्रिंटिंग प्रेस में होने लगी।

Budget 2023: What is Halwa Ceremony, changes in budget traditions in Modi reign
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को बजट पेश करेंगी - फोटो : Amar Ujala
बजट की कई परंपराओं में हो चुका है बदलाव 
चमड़े के ब्रीफकेस की जगह लाल कपड़ा 

मोदी सरकार के आने के बाद से बजट की कई परंपराओं को बदलते देखा गया है। जैसे आजादी के पहले से बजट को चमड़े के ब्रीफकेस में पेश करने की परंपरा रही। जब निर्मला सीतारमण ने वित्त मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला तो ब्रीफकेस के बजाय लाल कपड़ों में लिपटे बही-खाता के रूप में बजट पेश किया।  
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Budget 2023: What is Halwa Ceremony, changes in budget traditions in Modi reign
बजट पेश करतीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : पीटीआई
जब डिजिटल बजट आया 
डिजिटल बजट का आना बजट की परंपराओं में बदलाव की अगली कड़ी है। हर बार बजट की छपाई होती रही है लेकिन कोरोना काल के दौरान 2021 और 2022 में डिजिटल बजट पेश किया गया। एक फरवरी को संसद में बजट पेश करने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद केंद्रीय बजट 2021-2022 और 2022-23 बजट वेबसाइट www.indiabudget.gov.in और यूनियन बजट मोबाइल एप पर उपलब्ध कराया गया। एप पर केंद्रीय बजट का संपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध कराया गया जिसमें बजट भाषण से लेकर वार्षिक वित्तीय विवरण (आमतौर पर जिसे बजट के रूप में जाना जाता है), अनुदान की मांग और वित्त विधेयक शामिल रहे। ये एप हिंदी और इंग्लिश दोनों भाषाओं में उपलब्ध थे। लोकसभा के सभी सदस्यों समेत अन्य सभी लोगों को बजट की डिजिटल कॉपी दी गई। 

Budget 2023: What is Halwa Ceremony, changes in budget traditions in Modi reign
पंचवर्षीय योजना - फोटो : सोशल मीडिया
पंचवर्षीय योजना खत्म हुईं 
मोदी सरकार ने 2015 में योजना आयोग को खत्म कर नीति आयोग का गठन किया था। पंचवर्षीय योजनाएं पहली बार तब अस्तित्व में आई जब पंडित जवाहरलाल नेहरू स्वतंत्र भारत के प्रधानमंत्री बने थे। अंतिम पंचवर्षीय योजना 2012-17 की थी। एक जनवरी 2015  से योजना आयोग की जगह नीति आयोग काम करने लगा जो सरकार के थिंक टैंक के रूप में जाना जाता है। 

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बजट 2023 में रेलवे के लिए बड़े एलान संभव। - फोटो : अमर उजाला
रेल बजट को आम बजट के साथ मिलाया गया
ब्रिटिश शासन ने 1924 से दो अलग-अलग बजट रेल बजट और आम बजट पेश किए थे। भारत दुनिया का एकलौता देश था जहां आम बजट के साथ रेल बजट पेश किया जाता था।  हालांकि, मोदी सरकार ने बजट वर्ष 2017-18 से रेल बजट को केंद्रीय बजट में विलय करने का निर्णय लिया। आम बजट के साथ रेल बजट का विलय नीति आयोग के सदस्य बिबेक देबरॉय की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों पर आधारित था।

Budget 2023: What is Halwa Ceremony, changes in budget traditions in Modi reign
अरुण जेटली - फोटो : PTI
बजट पेश करने की तारीख बदली 
ब्रिटिश काल से हर साल 28 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश किया जाता था। हालांकि, 2017 में यह तारीख भी बदल गई, जब तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 1 फरवरी, 2017 को बजट पेश किया था। बजट संबंधी सभी प्रक्रियाएं एक अप्रैल यानी नए वित्तीय वर्ष के शुरू होने से पहले पूरी करने के उद्देश्य से तारीख में यह बदलाव किया गया था।
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