यूपीः तीन गांवों के 180 दलित परिवारों ने अपनाया बौद्ध धर्म, नहर में विसर्जित की देवताओं की मूर्तियां
जिले में पहले शब्बीरपुर फिर सहारनपुर में हुए बवाल के बाद भीम आर्मी पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में तीन गांवों के दलित समाज के कुछ परिवारों ने बौद्ध धर्म अपनाने का एलान किया है। इसके साथ ही उन्होंने नहर में देवी-देवताओं की मूर्तियों एवं कैलेंडर का विसर्जन कर दिया। इस दौरान 180 परिवारों द्वारा बौद्ध धर्म अपनाने का दावा किया गया है। दलितों की इस कार्रवाई से प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। हालांकि एसएसपी ने इस पूरे मामले में जानकारी होने से इनकार किया है।
भीम आर्मी का समर्थन करते हुए दलित समाज के कुछ लोगों ने बृहस्पतिवार सुबह ही बौद्ध धर्म अपनाने की चेतावनी दी थी। पूर्व निर्धारित घोषणा के अनुसार दोपहर लगभग ढाई बजे ग्राम रूपड़ी, कपूरपुर और ईघरी के लोग मानकमऊ स्थित बड़ी नहर पर पहुंचे और देवी-देवताओं की मूर्तियों एवं कैलेंडरों का विसर्जन कर दिया।
इस दौरान लगभग 180 दलित परिवारों द्वारा बौद्ध धर्म अपनाने का दावा किया गया और मूर्ति पूजा त्यागने की घोषणा की गई। बौद्ध धर्म अपनाने का दावा करने वालों में नरेंद्र गौतम, रोहित गौतम, दीपक कुमार, पंक्ति गौतम, अश्वनी गौतम, कुलदीप गौतम, सोनी गौतम, कल्पना गौतम, रचना गौतम, आरती गौतम, अनारकली, मनोज, लोकेश, डॉ. बलराम, नरेंद्र, सुदेश, मैना, रीना, सावित्री, शुभम समेत आदि शामिल थे।
भीम आर्मी को साजिश कर फंसाने का आरोप
बौद्ध धर्म अपनाने वालों ने आरोप लगाया कि भीम आर्मी को साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। दलित एवं पिछड़े समाज के शोषण के खिलाफ आवाज उठाने वाली भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद एवं कार्यकर्ताओं पर संगीन धाराएं लगाकर जेल भेजा जा रहा है। जो गलत है।
जब भी दलित समाज पर शोषण और अत्याचार हुआ, गरीब लड़की की शादी, पढ़ाई का मामला हुआ तो भीम आर्मी आगे आती है। भीम आर्मी निशुल्क पाठशालाएं चला रही है, शहीद होने वाले सैनिकों के लिए कैंडल मार्च निकालती है। सरकार दोहरा रवैया अपना रही है।
ऐसी कोई जानकारी नहीं है : एसएसपी
एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे का कहना है कि दलित समाज द्वारा बौद्ध अपनाने की पुलिस को कोई सूचना नहीं है। समाज में किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा। जो दोषी है सिर्फ उस पर कार्रवाई हो रही है। सभी लोग समाज के अंग हैं।