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मिशन 2017 के लिए मायावती लेकर आईं 'गुप्त रणनीति', बसपा में खलबली
शादाब रिजवी/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 21 Jun 2016 11:19 AM IST
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बसपा अपनी चुनावी रणनति को विरोधी दलों के सामने सार्वजनिक नहीं करेगी। पार्टी की तरफ से लगने वाले कैडर कैंप अब खुले स्थानों पर नहीं लगेंगे। सारे कैंप बंद कमरों में लगेंगे। दो माह में खुले में लगाए गए सभी कैडर कैंपों को नाराज पार्टी मुखिया मायावती ने खारिज कर दिया है।
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बसपा ने बीते दो माह में विधानसभा क्षेत्र स्तर पर कैडर कैंप लगाए थे। इन कैंपों में बूथ लेबल के पदाधिकारी शामिल हुए थे। सभी को जोनल और मंडल को-ऑर्डिनेटरों ने पार्टी की गोपनीय चुनावी रणनीति समझाई थी।
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एक तरह से 2017 में जीत के लिए काम करने की ट्रेनिंग दी थी। लेकिन खुले में कैप लगाए जाने से उसमें कुछ बाहरी लोग भी शामिल हो गए पार्टी की गोपनीय बातें सार्वजनिक हो गईं। इसकी जानकारी पार्टी मुखिया मायावती के पास पहुंची तब वह खफा हो गई। उन्होंने अब खुले में लगे सभी कैडर कैंपों को निरस्त मान नए सिरे से बंद स्थान पर पार्टी की नीति के मुताबिक कैडर कैंप लगाने को कहा है।
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मायावती की सख्ती के बाद अब बसपा में खलबली मची हुई है। किस जिले में कितने कैडर कैंप खुले में लगे हैं, उनकी रिपोर्ट जिलाध्यक्षों से लेकर अगस्त तक सभी कैंप फिर से लगाने को कहा गया है। जिलाध्यक्षों को पार्टी की तरफ से यह भी हिदायत दी गई है कि इन कैंपों में हर समाज से जुड़े कैडर बेस कार्यकर्ताओं को शामिल किया जाए।
बसपा का मानना है कि उनके वोट बैंक दलित, पिछड़े और मुस्लिम में साक्षरता कम होती है। दिगभ्रमित करने के लिए उनके बीच विरोधी दल अफवाह फैलाने की कोशिश करते हैं, इसलिए कैडर कैंप में आने वाले बूूथ स्तरीय पदाधिकारियों को ट्रेंड किया जाता है कि वह वोटर के घर पर दस्तक देकर उनको विरोधियों की हर चाल से आगाह करा दें।