BSP की दिग्गज सपाइयों पर नजर, कई मंत्री और विधायक छोड़ सकते हैं साईकिल का साथ
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उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी परिवार के सदस्यों में सरकार और संगठन को लेकर मची खींचतान के चलते कई मौजूदा मंत्री और विधायकों के चुनावी वक्त में पाला बदलने की सुगबुगाहट महसूस की जा रही है। कई मंत्री और विधायक साइकिल का साथ छोड़कर सुरक्षित राजनीतिक ठिकाने की तलाश में लगे हैं।
सपा में दो माह से चल रही उठापटक अब थोड़ा भले ही शांत दिख रही हो लेकिन सत्ता और सरकार में टकराव कम होता नहीं दिख रहा। कयास तक यहां तक लगाए जाने लगे कि सपा में टूट तय है, हालांकि अखिलेश यादव ऐसी किसी आशंका को खारिज कर रहे हैं। वैसे चाचा शिवपाल यादव और भतीजे अखिलेश यादव दोनों ही एक दूसरे के खिलाफ कदम उठाने से नहीं चूक रहे। हालात ऐेसे हैं कि हर जिले और विधानसभा क्षेत्र में सपा के दो खेमे बन गए हैं।
सपा से जुड़े एक वरिष्ठ पदाधिकारी का मानना है कि इस खींचतान से जनता की नजरों में पार्टी कमजोर आंकी जाने लगी हैं। इसलिए कई जिम्मेदार लोग खुद को सुरक्षित करने के लिए दूसरे दलों की तरफ रुख कर लें, इससे इनकार नहीं किया जा सकता। इस पदाधिकारी का यहां तक कहना है कि सपा की तरफ से अपनी कमजोर कड़ी की तलाश भी की जा रही है। ताकि उसके पार्टी छोडने पर दूसरे दमदार व्यक्ति को पेश कर भरपाई की जा सके।
भगवा ब्रिगेड पर बसपा की नजर
सूत्रों के मुताबिक बहुजन समाज पार्टी के दो राष्ट्रीय नेता सपा के ऐसे लोगों के संपर्क में हैं। बसपा का मानना है कि दिसंबर तक अगर कुछ सपा के बड़े नाम वाले नेता बसपा से जुड़ गए तब यह संदेश देने में आसानी होगी की कमजोर सपा में भगदड़ मच गई है। इसका फायदा होगा कि सपा के साथ खड़े मुसलमान ऐसे में भाजपा को हराने के लिए एकमुश्त बसपा के साथ आ सकते हैं। हालांकि बसपा का मानना है कि सपा खेमे से मंत्री या मौजूदा विधायक को आने पर अपने यहां सम्मान देना होगा, ऐसी स्थिति में एक बार फिर कुछ सीटों पर बसपा को टिकट में बदलाव का कदम उठाना पड़ सकता है।
बसपा की कोशिश है कि वह भाजपा के कुछ नेताओं को अपने साथ जोड़कर भगवा खेमे को झटका दे। खासकर ब्राह्मण नेताओं को भाजपा से अलग कर। पार्टी का मानना है कि जिस तरह बृजेश पाठक आदि को भाजपा ने बसपा से तोड़कर अपने पाले में जोड़ा है, उसी तरह बसपा भी अब बदले की ठोस रणनीति पर आगे बढ़ सकती है।
भाजपा के एक राष्ट्रीय स्तर के नेता संकेत दे रहे है कि उनकी पार्टी के कई ब्राह्मण नेताओं के संपर्क बसपा से होने की जानकारी आ जरूर रही है लेकिन उसमें कितना दम है, यह नहीं कहा जा सकता। हालांकि बसपा की तरफ से इस बारे में कोई बताने को तैयार नहीं है। वैसे भी बसपा में सिर्फ पार्टी मुखिया मायावती ही बड़े फैसलों की जानकारी अपने स्तर से देती है।